राज्यसभा चुनाव: सीएम मोहन यादव के एक बयान से पलटा मध्य प्रदेश का सियासी समीकरण, कांग्रेस खेमे में हलचल मध्य प्रदेश में आगामी 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पारा गरमा गया है।
- bySatendra Mishra
- 06 Jun 2026, 08:54 PM
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राज्यसभा चुनाव: सीएम मोहन यादव के एक बयान से पलटा मध्य प्रदेश का सियासी समीकरण, कांग्रेस खेमे में हलचल
भोपाल/इंदौर: मध्य प्रदेश में आगामी 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक पारा गरमा गया है। बीजेपी और कांग्रेस के बीच जारी बयानबाजी के बीच सूबे के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने एक ऐसा बयान दिया है, जिसने विपक्ष की चिंता बढ़ा दी है और सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है।
सीएम ने दिया बड़ा संदेश: "तीसरी सीट आएगी नहीं तो जाएगी कहां?"
इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री मोहन यादव से जब मीडिया कर्मियों ने पूछा कि क्या भाजपा तीसरी सीट पर भी अपना दावा ठोकने जा रही है, तो उन्होंने बेहद मजाकिया और सस्पेंस भरे अंदाज में कहा:
"अरे भाई! तीसरी सीट आएगी नहीं तो जाएगी कहां?"
मुख्यमंत्री की इस एक लाइन ने सोशल मीडिया पर तेजी से सुर्खियां बटोर ली हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बयान के जरिए मोहन यादव ने यह साफ संदेश दे दिया है कि संख्या बल के लिहाज से प्रदेश का पूरा समीकरण पूरी तरह भाजपा के नियंत्रण में है।
क्यों अहम है सीएम का यह बयान? (सीटों का गणित)
दरअसल, मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों में से संख्या बल के हिसाब से दो सीटों पर भाजपा और एक सीट पर कांग्रेस का दावा तय माना जा रहा था। हालांकि, हालिया घटनाक्रमों और आंकड़ों ने माहौल को दिलचस्प बना दिया है:
- भाजपा के पास सरप्लस वोट: भाजपा के पास मौजूद 164 विधायकों के बहुमत के चलते दो सीटें आसानी से जीतने के बाद भी उसके पास 48 अतिरिक्त (सरप्लस) वोट बचते हैं।
- अटकलों पर विराम: इसी वजह से राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे थे कि क्या भाजपा किसी निर्दलीय या गुप्त प्रत्याशी को मैदान में उतारकर कांग्रेस की तीसरी सीट छीनने का प्रयास करेगी।
- बयान का असली मतलब: लेकिन मुख्यमंत्री के ताजा बयान ने अब यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि जो सीट सीधे तौर पर भाजपा के कोटे में नहीं आ रही है, उसे लेकर उन्हें किसी भी तरह की चिंता या अतिरिक्त बयानबाजी करने की आवश्यकता नहीं है।
विपक्ष में मची हलचल, क्रॉस वोटिंग का डर
भले ही मुख्यमंत्री मोहन यादव ने यह बात हल्के-फुल्के या मजाकिया अंदाज में कही हो, लेकिन इसने कांग्रेस खेमे की अंदरूनी कलह को हवा दे दी है।
वर्तमान में कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। सीएम के इस बयान के बाद कांग्रेस पूरी तरह सतर्क हो गई है और अपने विधायकों को एकजुट रखने में जुट गई है। किसी भी तरह की क्रॉस वोटिंग की गुंजाइश को खत्म करने के लिए कांग्रेस लगातार विधायक दल की बैठकें सफल बनाने और अपनी रणनीति को मजबूत करने का प्रयास कर रही है।
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
