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गाडरवारा एनटीपीसी क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग का मज़ाक: अवैध पैथोलॉजी लैब पर सिर्फ 'दिखावे' की कार्रवाई क्यों?

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गाडरवारा एनटीपीसी क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग का मज़ाक: अवैध पैथोलॉजी लैब पर सिर्फ 'दिखावे' की कार्रवाई क्यों?

नरसिंहपुर (गाडरवारा):

नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा एनटीपीसी (NTPC) क्षेत्र में लोगों की जिंदगी से सरेआम खिलवाड़ करने वाली एक अवैध पैथोलॉजी लैब का भंडाफोड़ तो हुआ, लेकिन उसके बाद की प्रशासनिक ढिलाई ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर और तीखे सवाल खड़े कर दिए हैं।

​सीएमएचओ (CMHO) नरसिंहपुर की टीम ने मौके पर पहुंचकर इस फर्जी पैथोलॉजी लैब पर छापा मारा और उसे बंद भी करा दिया, लेकिन जनता अब यह पूछ रही है कि क्या प्रशासन की जिम्मेदारी सिर्फ लैब को सील करने भर की थी?

अधिकारियों की नीयत पर उठते गंभीर सवाल

​जब जांच में यह पूरी तरह साफ हो चुका है कि यह पैथोलॉजी लैब बिना किसी वैध परमिशन और बिना किसी तय मापदंडों के धड़ल्ले से चल रही थी, तो फिर असली दोषियों को बचाने का खेल क्यों खेला जा रहा है? जागरूक नागरिकों और जनता के बीच इस 'आधी-अधूरी' कार्रवाई को लेकर कई बड़े सवाल तैर रहे हैं:

  • ब्लैकलिस्ट करने में देरी क्यों?: बिना अनुमति के इंसानी जिंदगियों के साथ खिलवाड़ करने वाले इस लैब के संचालक को अब तक ब्लैकलिस्ट क्यों नहीं किया गया? क्या उसे भविष्य में दोबारा ऐसा ही अवैध धंधा शुरू करने की मौन स्वीकृति दी जा रही है?
  • एफआईआर (FIR) दर्ज करने से क्यों कतरा रहा प्रशासन?: फर्जी रिपोर्ट देकर लोगों की जान जोखिम में डालने जैसा गंभीर अपराध साबित होने के बावजूद, दोषियों पर अब तक पुलिस केस (FIR) दर्ज क्यों नहीं कराया गया? आखिर वह कौन सा प्रशासनिक या राजनीतिक दबाव है जो अधिकारियों के हाथ बांध रहा है?
  • महज 'रस्म अदायगी' क्यों?: अवैध रूप से लैब चलाना एक बेहद गंभीर और दंडनीय अपराध है। इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग इसे सिर्फ सीलिंग की रस्म अदायगी करके ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश क्यों कर रहा है?

साठगांठ या रसूखदारों का हाथ?

​ये सारे सवाल बेहद तार्किक हैं और सीधे तौर पर जिले के प्रशासनिक तंत्र की नीयत पर चोट करते हैं। अगर बड़े पैमाने पर हुआ यह फर्जीवाड़ा पूरी तरह साबित हो चुका है, तो दोषियों को अब तक जेल की सलाखों के पीछे होना चाहिए था, न कि खुलेआम घूमने की आज़ादी मिलनी चाहिए थी।

​क्या स्वास्थ्य विभाग ने यह कार्रवाई सिर्फ जनता के गुस्से को शांत करने और दिखावे के लिए की है? या फिर इस पूरे अवैध खेल के पीछे किसी बड़े रसूखदार का हाथ है, जो पर्दे के पीछे से दोषियों को संरक्षण दे रहा है?

​जनता और पीड़ित लोग अब जिले के आला अधिकारियों से यह साफ़ जवाब चाहते हैं कि इस गंभीर मामले में केवल कागजी खानापूर्ति करने के बजाय दोषियों पर कड़ी से कड़ी कानूनी कार्रवाई कब की जाएगी।

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।