गाडरवारा सिविलसिस्पताल की ड्यूटी व्यवस्था पर बड़ा सवाल: रोस्टर में एक डॉक्टर, इमरजेंसी में दूसरा—कौन दे रहा था अनुमति? हार्ट अटैक के लक्षणों वाली वृद्धा को गैस बताकर घर भेजने के आरोप के बाद उठा मामला; परिजनों ने मांगी उच्चस्तरीय जांच,
- bySatendra Mishra
- 19 Sep 2026, 06:58 PM
- 12 Mins
सिविल अस्पताल की ड्यूटी व्यवस्था पर बड़ा सवाल: रोस्टर में एक डॉक्टर, इमरजेंसी में दूसरा—कौन दे रहा था अनुमति?
हार्ट अटैक के लक्षणों वाली वृद्धा को गैस बताकर घर भेजने के आरोप के बाद उठा मामला; परिजनों ने मांगी उच्चस्तरीय जांच, CCTV-बायोमेट्रिक और ड्यूटी रिकॉर्ड सुरक्षित कराने की मांग
गाडरवारा। शासकीय सिविल अस्पताल गाडरवारा में 72 वर्षीय वृद्धा की मौत के मामले में सामने आई शिकायत ने अस्पताल की ड्यूटी व्यवस्था और इमरजेंसी में चिकित्सकीय सेवाओं को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतका के पुत्र एवं कॉलेज प्राध्यापक डॉ. सुनील कुमार शर्मा द्वारा एसडीओ को दिए गए आवेदन में 18 अगस्त की रात वृद्धा लक्ष्मी शर्मा (72) को सीने से जुड़े संभावित लक्षणों के बावजूद ईसीजी नहीं कराए जाने और गैस की समस्या बताकर घर भेजे जाने का आरोप लगाया गया है। अगले दिन वृद्धा की हालत बिगड़ने के बाद अस्पताल लाने पर उनकी मृत्यु हो गई। परिजनों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
मामले को और गंभीर बनाने वाला सवाल अस्पताल की ड्यूटी व्यवस्था को लेकर है। शिकायत में कहा गया है कि 18 अगस्त की रात ड्यूटी रोस्टर में डॉ. पंकज थारवानी का नाम था, जबकि उस दौरान उपचार डॉ. परितोष जैन द्वारा किए जाने की बात सामने आई। अस्पताल प्रबंधन ने भी पुष्टि की है कि उस रात की ड्यूटी से संबंधित डॉक्टरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। ऐसे में अब जांच का अहम बिंदु यह है कि ड्यूटी रोस्टर में दर्ज चिकित्सक के स्थान पर दूसरे व्यक्ति द्वारा इमरजेंसी में मरीजों का उपचार किस आदेश या अनुमति के आधार पर किया जा रहा था।
‘क्या ड्यूटी बदलने की थी कोई लिखित अनुमति?’
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि ड्यूटी रोस्टर के अनुसार डॉ. पंकज थारवानी की ड्यूटी थी और वे उस रात अस्पताल में उपस्थित नहीं थे, तो उनकी जगह डॉ. परितोष जैन को मरीजों के उपचार की जिम्मेदारी किसने सौंपी? क्या ड्यूटी परिवर्तन का कोई लिखित आदेश था? क्या अस्पताल के रिकॉर्ड में इसका उल्लेख है? यदि कोई आदेश था तो उसे किस अधिकारी ने जारी किया? जांच में इन सवालों के जवाब सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
‘अक्सर इमरजेंसी में मौजूद रहने’ के दावों की भी हो जांच
स्थानीय स्तर पर कुछ लोगों द्वारा यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि डॉ. परितोष जैन अक्सर सिविल अस्पताल की इमरजेंसी में किसी न किसी डॉक्टर के साथ दिखाई देते हैं और मरीजों के उपचार में भूमिका निभाते हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। यदि ऐसा नियमित रूप से होता रहा है, तो अस्पताल प्रशासन के रिकॉर्ड से यह स्पष्ट किया जा सकता है कि वे किस पद या अधिकार के तहत इमरजेंसी में मरीजों का उपचार करते थे और क्या उन्हें इसके लिए कोई अधिकृत अनुमति प्राप्त थी।
ड्यूटी बदलने के बदले निजी भुगतान के आरोप भी चर्चा में
इसी बीच स्थानीय स्तर पर यह आरोप और चर्चाएं भी सामने आ रही हैं कि कुछ चिकित्सक अपनी निर्धारित ड्यूटी के स्थान पर दूसरे व्यक्ति से ड्यूटी करवाते हैं और इसके बदले निजी तौर पर भुगतान किए जाने की व्यवस्था हो सकती है। इस दावे की कोई स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है, इसलिए इसे जांच का विषय माना जाना चाहिए। यदि ऐसा कोई प्रचलन है तो ड्यूटी रोस्टर, उपस्थिति रजिस्टर, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, ड्यूटी परिवर्तन के आदेश तथा संबंधित भुगतान संबंधी रिकॉर्ड की जांच से स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
क्या अस्पताल प्रबंधन को थी जानकारी?
मामले में अस्पताल प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यदि कोई गैर-ड्यूटी चिकित्सक नियमित रूप से इमरजेंसी में मरीजों का उपचार कर रहा था, तो क्या अस्पताल के प्रभारी अधिकारी या वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी जानकारी थी? यदि जानकारी थी तो क्या इसके लिए लिखित अनुमति थी? और यदि जानकारी नहीं थी, तो अस्पताल की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि अस्पताल प्रबंधन की किसी मिलीभगत का निष्कर्ष जांच के बिना निकालना उचित नहीं होगा।
CCTV और बायोमेट्रिक बताएंगे कौन था अस्पताल में
मृतका के पुत्र डॉ. सुनील शर्मा ने 18 अगस्त की रात 11 बजे से 19 अगस्त की रात 12 बजे तक तथा 19 अगस्त की सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12 बजे तक की CCTV फुटेज सुरक्षित कराने की मांग की है। इसके अलावा ड्यूटी रोस्टर, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, उपस्थिति रजिस्टर, ड्यूटी आदेश, इमरजेंसी रजिस्टर और उपचार संबंधी सभी दस्तावेज सुरक्षित रखने की मांग की गई है। इन रिकॉर्ड से यह पता चल सकता है कि संबंधित समय पर अस्पताल में कौन मौजूद था और मरीज का उपचार किसने किया।
अस्पताल अधीक्षक ने कहा- डॉक्टरों को नोटिस जारी
सिविल अस्पताल अधीक्षक डॉ. उपेंद्र वस्त्रकार ने बताया कि 18 अगस्त की रात जिन डॉक्टरों की ड्यूटी थी, उन्हें नोटिस जारी किया गया है। जिस डॉक्टर द्वारा उपचार किए जाने की शिकायत सामने आई है, उन्हें भी नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। घटना से वरिष्ठ अधिकारियों को भी अवगत कराया गया है।
वहीं एसडीओ गाडरवारा प्रगति सिंह ने बताया कि सिविल अस्पताल में डॉक्टर की ड्यूटी एवं अनधिकृत डॉक्टर द्वारा उपचार किए जाने संबंधी शिकायत प्राप्त हुई है और इसे जांच के लिए संबंधित विभाग एवं जिम्मेदार अधिकारियों को भेज दिया गया है।
अब पूरे मामले में ड्यूटी रोस्टर बनाम वास्तविक उपस्थिति, बायोमेट्रिक रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, ड्यूटी परिवर्तन का आदेश, संबंधित चिकित्सक की पदस्थापना एवं पंजीयन, मरीज के उपचार का रिकॉर्ड तथा ईसीजी नहीं किए जाने के कारण जांच के प्रमुख बिंदु होंगे। यदि जांच में शिकायत में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारी तय करने का रास्ता साफ होगा, वहीं यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो रिकॉर्ड के आधार पर वास्तविक स्थिति भी सामने आ सकेगी। फिलहाल वृद्धा की मौत और ड्यूटी व्यवस्था से जुड़े सभी आरोप जांच के अधीन हैं, और निष्पक्ष जांच से ही पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आएगी।
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
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