नरसिंहपुर में 'सफेद कोट' का खूनी खेल: इलाज के नाम पर मौत बाँट रहा स्वास्थ्य विभाग, सोता रहा प्रशासन!
- bySatendra Mishra
- 21 Jul 2026, 09:28 PM
- 8 Mins
नरसिंहपुर में 'सफेद कोट' का खूनी खेल: इलाज के नाम पर मौत बाँट रहा स्वास्थ्य विभाग, सोता रहा प्रशासन!
विशेष संवाददाता | नरसिंहपुर
नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश का नरसिंहपुर जिला स्वास्थ्य विभाग इस समय चिकित्सा सेवा का केंद्र न रहकर भ्रष्टाचार, हैवानियत और अवैध वसूली का अड्डा बन चुका है। सरकारी अस्पतालों की चौखट पर उम्मीद लेकर पहुँचने वाले गरीब और लाचार मरीजों को यहाँ इलाज नहीं, बल्कि मानसिक प्रताड़ना, आर्थिक शोषण और मौत का खौफ परोसा जा रहा है। ‘सबको मुफ्त और सुरक्षित स्वास्थ्य’ के तमाम सरकारी दावों की धज्जियाँ उड़ाते हुए नरसिंहपुर स्वास्थ्य विभाग का शर्मनाक और घिनौना चेहरा पूरी तरह बेनकाब हो चुका है।
1. गाडरवारा अस्पताल में संवेदनहीनता की हद: मासूम नवजात को चूहों ने कुतरा
गाडरवारा अस्पताल से सामने आई तस्वीर इंसानियत को झकझोर देने वाली है। अस्पताल प्रबंधन की आपराधिक लापरवाही के कारण वार्ड में एक मासूम नवजात बच्चे को चूहों ने कुतर डाला। अस्पताल परिसर में जगह-जगह फैली गंदगी और अव्यवस्था के कारण यहाँ चूहे और जहरीले जीव स्वच्छंद घूम रहे हैं। नवजात शिशुओं को लेप्टोस्पायरोसिस और रैट-बाइट फीवर जैसी जानलेवा बीमारियों के मुंह में धकेल दिया गया है। सवाल यह उठता है कि क्या प्रशासन इसी दयनीय व्यवस्था को 'सुरक्षित प्रसव सेवा' कहता है?
2. जिला अस्पताल बना 'रिश्वतखोरी का अड्डा': ऑपरेशन के नाम पर खुली लूट
नरसिंहपुर जिला अस्पताल में डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की साठगांठ से खुलेआम आर्थिक डकैती चल रही है। ऑपरेशन और बुनियादी इलाज के नाम पर गरीब मरीजों से ₹3,000 से ₹5,000 तक की सीधी रिश्वत ऐंठी जा रही है। अपनी लाचारी और खून-पसीने की कमाई लेकर पहुँचने वाले मरीजों की मजबूरी का सौदा किया जा रहा है। जो गरीब रिश्वत देने में असमर्थ हैं, उन्हें तड़पने के लिए उनके हाल पर छोड़ दिया जाता है।
3. साईंखेड़ा CHC में जिंदगी से खिलवाड़: डॉक्टर गायब, सफाईकर्मी लगा रहे इंजेक्शन
ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और भी भयावह है। साईंखेड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) में डॉक्टर और प्रशिक्षित नर्सें ड्यूटी से नदारद रहते हैं। स्थिति इतनी गंभीर है कि यहाँ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी और सफाईकर्मी मरीजों को गंभीर दवाइयाँ, ड्रिप और इंजेक्शन लगा रहे हैं। बिना किसी मेडिकल प्रशिक्षण के अप्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा इंजेक्शन लगाना सीधे तौर पर एयर एम्बोलिज्म (नसों में हवा जाने से तत्काल मृत्यु) जैसी स्थिति को न्योता देना है। यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे-सीधे हत्या का प्रयास है।
4. भ्रष्टाचार को संरक्षण: CMHO और आला अधिकारियों की सरपरस्ती में फर्जी जांच
इतने गंभीर अपराधों के बाद भी दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय पूरा प्रशासनिक अमला उन्हें बचाने में जुटा है। आरोप हैं कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और वरिष्ठ अधिकारी मिलकर लीपापोती करने के लिए झूठी और मनगढ़ंत जांच रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। भ्रष्टाचार में लिप्त चेहरों पर आखिर किसकी मेहरबानी है? अवैध निर्माणों और करोड़ों के घोटालों की फाइलों पर आँखें मूँदकर बैठना अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका पर सीधा निशान-ए-ज़द करता है।
जनता का सीधा प्रहार: कलेक्टर साहब, आखिर कब टूटेगी कुंभकर्णी नींद?
नरसिंहपुर की पीड़ित और आक्रोशित जनता अब सीधे जिला कलेक्टर और शासन-प्रशासन से जवाब मांग रही है। जनता का सवाल है कि इस खूनी और भ्रष्ट तंत्र को और कितने दिन संरक्षण दिया जाएगा? क्या किसी बड़े हादसे या मासूमों की बलि चढ़ने के बाद ही जिम्मेदार अधिकारियों की नींद टूटेगी? जनता की स्पष्ट मांग है कि दोषी डॉक्टरों, कर्मचारियों और इस भ्रष्टाचार को संरक्षण देने वाले अधिकारियों पर तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए।
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
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