मां नर्मदा भक्त भाजपा नेता पवन पटेल पर जानलेवा हमला: अवैध रेत खनन के खिलाफ आवाज उठाना पड़ा भारी, हाईकोर्ट से आरोपियों की जमानत याचिका खारिज नरसिंहपुर/जबलपुर। जिले के पलोहा बाड़ा थाना क्षेत्र में भाजपा नेता एवं मां नर्मदा भक्त पवन पटेल पर हुए जानलेवा
- bySatendra Mishra
- 25 Apr 2026, 04:11 PM
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मां नर्मदा भक्त भाजपा नेता पवन पटेल पर जानलेवा हमला: अवैध रेत खनन के खिलाफ आवाज उठाना पड़ा भारी, हाईकोर्ट से आरोपियों की जमानत याचिका खारिज
नरसिंहपुर/जबलपुर।
जिले के पलोहा बाड़ा थाना क्षेत्र में भाजपा नेता एवं मां नर्मदा भक्त पवन पटेल पर हुए जानलेवा हमले के मामले में आरोपियों को मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय से भी राहत नहीं मिली। अवैध रेत खनन और नर्मदा सहित जिले की सहायक नदियों को बचाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे पवन पटेल पर कथित रूप से प्रभावशाली रेत माफियाओं द्वारा बेरहमी से हमला किया गया था। इस गंभीर मामले में दर्ज जमानत याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार यह मामला अपराध क्रमांक 36/2026 से संबंधित है, जिसमें आरोपी आशीष सिंह एवं अन्य के विरुद्ध गंभीर धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किया गया है। बताया जा रहा है कि पवन पटेल लंबे समय से मां नर्मदा की गोद में हो रहे अवैध रेत उत्खनन, नदी तटों की बर्बादी और प्रशासनिक उदासीनता के खिलाफ लगातार शिकायतें कर रहे थे। वे जिले में सक्रिय रेत माफियाओं के विरुद्ध मुखर होकर आवाज उठा रहे थे और प्रशासन से कार्रवाई की मांग कर रहे थे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि पवन पटेल ने कई बार संबंधित विभागों, प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को ज्ञापन देकर अवैध खनन रोकने की मांग की थी। उनका उद्देश्य केवल मां नर्मदा ही नहीं, बल्कि जिले की दूधी, शक्कर, शेर, तेंदूखेड़ा क्षेत्र की सहायक नदियों और प्राकृतिक जल स्रोतों को विनाश से बचाना था। लेकिन इसी सक्रियता के कारण वे कथित रूप से रेत माफियाओं के निशाने पर आ गए।
पुलिस दस्तावेजों के अनुसार 1 अप्रैल 2026 की रात लगभग 12 बजे फरियादी पवन पटेल पर आरोपियों ने मिलकर हमला किया। आरोप है कि उनके साथ अत्यंत बेरहमी से मारपीट की गई, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले में उनके दोनों पैरों के घुटनों के नीचे गंभीर चोटें आईं और मल्टीपल फ्रैक्चर पाए गए। घायल अवस्था में उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत लंबे समय तक चिंताजनक बनी रही।
मामले की सुनवाई मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में माननीय न्यायमूर्ति जी. एस. अहलूवालिया के समक्ष हुई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं ने विस्तृत बहस प्रस्तुत की। शिकायतकर्ता पवन पटेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सौरभ भूषण श्रीवास्तव ने प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय को बताया कि घायल के दोनों पैरों में गंभीर फ्रैक्चर हैं तथा हमला अत्यंत क्रूर और गंभीर प्रकृति का है। उन्होंने यह भी प्रस्तुत किया कि यह केवल सामान्य मारपीट नहीं, बल्कि दुर्भावनापूर्ण हमला है, जिसका संबंध अवैध खनन के खिलाफ उठाई गई आवाज से जुड़ा है।
घायल की गंभीर स्थिति और मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए आरोपियों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने स्वयं ही जमानत याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। न्यायालय ने याचिका को वापस लिया हुआ मानते हुए खारिज कर दिया। इससे स्पष्ट है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा।
इस घटनाक्रम के बाद क्षेत्र में अवैध रेत खनन और उससे जुड़े प्रभावशाली तंत्र पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सामाजिक संगठनों, पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि पवन पटेल पर हमला करने वालों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई की जाए तथा जिले में सक्रिय अवैध रेत माफियाओं पर भी निर्णायक कार्रवाई हो।
लोगों का कहना है कि यदि मां नर्मदा और अन्य नदियों को बचाने के लिए आवाज उठाने वालों पर इसी प्रकार हमले होते रहे, तो पर्यावरण संरक्षण की लड़ाई कमजोर पड़ जाएगी। प्रशासन से अपेक्षा है कि वह केवल अपराधियों की गिरफ्तारी तक सीमित न रहे, बल्कि अवैध खनन के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने की दिशा में ठोस कदम उठाए।
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई जारी है। वहीं पवन पटेल के समर्थकों का कहना है कि यह लड़ाई केवल एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि मां नर्मदा और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है।
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
