ग्राम पंचायत कौड़ियां में विकास नहीं, सवालों का अंबार : कैमरे नहीं, भ्रष्टाचार लटक रहा है! 5 लाख का CCTV घोटाला, अधूरे निर्माण, कथित भूमि कब्जा, हाईकोर्ट के स्टे की अवहेलना और तिरंगे के अपमान से भड़का जनाक्रोश
- bySatendra Mishra
- 25 Apr 2026, 08:45 PM
- 16 Mins
ग्राम पंचायत कौड़ियां में विकास नहीं, सवालों का अंबार : कैमरे नहीं, भ्रष्टाचार लटक रहा है!
5 लाख का CCTV घोटाला, अधूरे निर्माण, कथित भूमि कब्जा, हाईकोर्ट के स्टे की अवहेलना और तिरंगे के अपमान से भड़का जनाक्रोश
“सिस्टम हमारा है…” जैसी चर्चाओं के बीच पंचायत सचिव पर गंभीर आरोप, जांच के आदेश के बाद भी जनता को कार्रवाई का इंतजार
गाडरवारा। ग्राम पंचायत कौड़ियां इन दिनों विकास कार्यों से नहीं, बल्कि कथित भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं, अधूरे निर्माण, शासकीय भूमि पर कथित कब्जे, निष्क्रिय CCTV व्यवस्था, हाईकोर्ट के स्टे ऑर्डर की अवहेलना और राष्ट्रध्वज के अपमान जैसे गंभीर मामलों को लेकर सुर्खियों में है। लगातार शिकायतों, धरना-प्रदर्शनों और समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के बावजूद पंचायत प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। ग्रामीणों का साफ कहना है कि पंचायत में विकास कम और जवाबदेही से बचने की कोशिश ज्यादा दिखाई दे रही है।
सूत्रों के अनुसार सबसे गंभीर मामला पंचायत सचिव पर पूर्व वित्तीय वर्ष 2025 के 33 विकास कार्यों का अब तक मूल्यांकन न होने को लेकर सामने आया है। मार्च समाप्त हो चुका, अप्रैल भी बीतने को है, लेकिन पुराने कार्यों की समीक्षा अब तक लंबित है। ग्रामीणों का आरोप है कि जानबूझकर मूल्यांकन रोका जा रहा है ताकि अधूरे कार्यों और वित्तीय गड़बड़ियों पर पर्दा डाला जा सके।
पूर्व में किसानों के धरना प्रदर्शन के दौरान पंचायत द्वारा नाली का पक्का निर्माण कार्य शीघ्र पूर्ण कराने का आश्वासन दिया गया था। ग्रामीणों के अनुसार पंचायत खाते में लगभग 21 लाख रुपए की राशि उपलब्ध है, लेकिन केवल 6 लाख रुपए की लागत से कच्चा और अधूरा कार्य कर बाकी राशि को निष्क्रिय छोड़ दिया गया। आरोप है कि राशि खाते में पड़ी रही, पंचायत को ब्याज मिलता रहा, लेकिन जनता को विकास नहीं मिला। इसी प्रकार 6 लाख रुपए की लागत से बनाई गई नाली आज झाड़ियों में तब्दील हो चुकी है। न उपयोग, न रखरखाव, न जवाबदेही—यह स्थिति पंचायत के दावों की पोल खोल रही है।
पंचायत में डिजिटल सुरक्षा के नाम पर लगाए गए लगभग 5 लाख रुपए के CCTV कैमरे अब कथित घोटाले की सबसे बड़ी मिसाल बन गए हैं। पंचायत भवन और आसपास लगे कैमरे आज केवल खंभों पर लटके दिखाई दे रहे हैं। न केबल, न DVR, न मॉनिटर और न कोई रिकॉर्डिंग व्यवस्था—यानी पूरी सुरक्षा व्यवस्था केवल कागजों में सीमित रह गई। ग्रामीण तंज कसते हुए कहते हैं— “कैमरे नहीं, भ्रष्टाचार लटक रहा है।” स्थिति और गंभीर तब हो गई जब यह सामने आया कि कैमरे लगाने वाले दुकानदार को भी कथित रूप से पूरा भुगतान नहीं किया गया। इससे यह सवाल और मजबूत हो गया कि आखिर यह पूरा सिस्टम किसके संरक्षण में चल रहा ह।
हाई कोर्ट के स्टे ऑर्डर की सरेआम अवहेलना!
क्या खुद को हाई कोर्ट से भी बड़ा प्रभावशाली समझ रहे हैं ग्राम पंचायत कौड़ियां के सचिव...? वक्फ मुस्लिम कब्रिस्तान की भूमि पर अवैध दुकान निर्माण को लेकर पहले ही गंभीर सवाल उठ चुके हैं। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा स्पष्ट रूप से स्टे ऑर्डर जारी किए जाने के बावजूद निर्माण कार्य रुकने के बजाय लगातार जारी रहने की जानकारी सामने आ रही है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर किसके संरक्षण में यह निर्माण कार्य चल रहा है? क्या ग्राम पंचायत कौड़ियां के सचिव स्वयं को कानून, प्रशासन और न्यायालय से ऊपर मान बैठे हैं? जब तहसीलदार द्वारा भी रोक लगाने के आदेश जारी किए जा चुके थे, तब भी निर्माण कार्य जारी रहना प्रशासनिक तंत्र पर सीधा प्रश्नचिन्ह खड़ा करता है। अब हाई कोर्ट के स्टे ऑर्डर के बाद भी यदि निर्माण नहीं रुकता, तो यह केवल लापरवाही नहीं बल्कि न्यायालय की अवमानना की श्रेणी में आता है।
स्ट्रीट लाइट कार्य में भी बड़ा विवाद : ₹2.45 लाख की राशि स्वीकृत
ग्राम पंचायत कौड़ियां के हाट बाजार क्षेत्र में “स्ट्रीट लाइट कार्य” के नाम पर 2 लाख 45 हजार की राशि स्वीकृत दर्शाई गई है। पंचायत राज संचालनालय की 5 वें वित्त आयोग की राशि से सब्जी मार्केट, ग्राम पंचायत कौड़िया में यह कार्य कराया गया था। अब गंभीर सवाल यह खड़ा होता है कि क्या यह कार्य वास्तव में गुणवत्ता, पारदर्शिता और निर्धारित मानकों के अनुसार किया गया है? ग्रामीणों का कहना है कि जनता के पैसे का हर हिसाब जनता को मिलना चाहिए। यदि विकास कार्य हुए हैं, तो वे धरातल पर स्पष्ट दिखने चाहिए, केवल कागजों में नहीं।
*राष्ट्रीय ध्वज का अपमान*
मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है। ग्राम पंचायत भवन के सामने मुख्य चौराहे पर स्टेट हाईवे 22 स्थित जय स्तंभ पर 26 जनवरी को लगाया गया राष्ट्रीय ध्वज आज भी कटा-फटा, मुड़ा, मैला और बदहाल स्थिति में लटका हुआ है। जिस चौराहे से प्रतिदिन तहसील, जिला और पंचायत स्तर के अधिकारी, विधायक, सांसद और मंत्री तक गुजरते हैं, वहां तिरंगे की यह स्थिति ग्रामीणों में गहरा आक्रोश पैदा कर रही है। कौड़ियां के ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल लापरवाही नहीं, बल्कि राष्ट्रध्वज के सम्मान और राष्ट्रीय गौरव का खुला अपमान है। जिस तिरंगे के सम्मान के लिए सैनिक अपने प्राण न्यौछावर कर देते हैं, उसी ध्वज को इस स्थिति में छोड़ देना प्रशासनिक संवेदनहीनता की पराकाष्ठा माना जा रहा है।
पहले से ही सफाई व्यवस्था, लंबित वेतन, अधूरे निर्माण कार्य, विकास योजनाओं की पारदर्शिता, जनसुनवाई की अनुपस्थिति और कथित वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सवाल उठ रहे थे। अब शासकीय भूमि, CCTV घोटाला, हाईकोर्ट स्टे की अवहेलना, स्ट्रीट लाइट कार्य और तिरंगे के अपमान जैसे मुद्दों ने पूरे मामले को और विस्फोटक बना दिया है।
जिला पंचायत नरसिंहपुर के अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा जांच के निर्देश दिए जा चुके हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अब केवल जांच के आदेश नहीं, बल्कि निष्पक्ष कार्रवाई चाहिए। उनका स्पष्ट कहना है कि यदि इस बार भी जांच केवल फाइलों तक सीमित रही, तो यह साफ हो जाएगा कि भ्रष्टाचार को रोकने नहीं, बचाने का प्रयास किया जा रहा है।
■ नगेंद्र रघुवंशी, जागरूक नागरिक, ग्राम पंचायत कौड़ियां
“पंचायत में जो CCTV कैमरे लगाए गए थे, वे शुरुआत में जरूर लगाए गए, लेकिन आज हालत यह है कि वे केवल दिखावे के लिए खंभों पर लटके हैं। न सुरक्षा है, न निगरानी, न जवाबदेही। सबसे गंभीर बात यह है कि कैमरे लगाने वाले दुकानदार को भी आज तक पूरा भुगतान नहीं किया गया। इसका मतलब साफ है कि यहां काम कम और कागजी लीपापोती ज्यादा हुई है। शासन-प्रशासन पंचायत को विकास कार्यों के लिए लगातार राशि देता है, लेकिन सरपंच और सचिव द्वारा काम कराने की बजाय केवल कागजों में विकास दिखाया जा रहा है। जमीन पर हकीकत बिल्कुल अलग है।हम किसान अपनी समस्याओं को लेकर धरना प्रदर्शन पर बैठे थे। उस समय विधायक, वरिष्ठ भाजपा नेता, सरपंच और अन्य जनप्रतिनिधि आए थे। सभी ने आश्वासन दिया था कि किसानों की समस्याओं का तत्काल समाधान होगा, अधूरे निर्माण पूरे होंगे और पंचायत में पारदर्शिता लाई जाएगी। लेकिन आज तक न समस्याओं का समाधान हुआ, न अधूरे कार्य पूरे हुए। पंचायत के पास लगभग 21 लाख रुपये उपलब्ध थे, लेकिन केवल लगभग 6 लाख का अधूरा काम कराया गया। बाकी राशि का उपयोग नहीं हुआ। हमें साफ लगता है कि विकास कार्यों के नाम पर भ्रष्टाचार की परतें छिपाई जा रही हैं।
■ कुंवर उदय प्रताप सिंह भदौरिया, अतिरिक्त मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत नरसिंहपुर
“ग्राम पंचायत कौड़ियां से संबंधित शिकायतों और अनियमितताओं को गंभीरता से संज्ञान में लिया गया है। मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए जनपद पंचायत चांवरपाठा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी संतोष मांगलिक को जांच हेतु भेजा गया है।हमारी प्राथमिकता यह है कि पहले जनपद स्तर पर पूरे मामले की वस्तुनिष्ठ, तथ्यात्मक और विस्तृत जांच हो। सभी बिंदुओं पर प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाएगा, जिसके बाद उसका परीक्षण जिला स्तर पर किया जाएगा। यदि जांच प्रतिवेदन संतोषजनक नहीं पाया जाता है या किसी प्रकार की अतिरिक्त तथ्यात्मक जांच की आवश्यकता महसूस होती है, तो जिला स्तर से अलग टीम गठित कर विस्तृत जांच कराई जाएगी।
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
