Follow Us:

राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन

1000724670

​मध्य प्रदेश राज्यसभा चुनाव: कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द, कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन

भोपाल/नई दिल्ली: मध्य प्रदेश में आगामी 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले सूबे की सियासत में उस वक्त बड़ा भूचाल आ गया, जब चुनाव अधिकारी (रिटर्निंग ऑफिसर) ने कांग्रेस की एकमात्र उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द कर दिया। इस फैसले के बाद कांग्रेस खेमे में भारी आक्रोश है और पार्टी ने इसे लोकतंत्र की हत्या और सोची-समझी राजनीतिक साजिश करार दिया है।

​क्या है पूरा मामला और बीजेपी की आपत्ति?

​राज्यसभा की तीसरी सीट के लिए मुकाबला बेहद दिलचस्प हो गया था। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार महेश केवट और उनके वकील संकेत गुप्ता ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन और हलफनामे (Affidavit) पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई थी।

​बीजेपी का आरोप था कि नटराजन ने अपने चुनावी हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित एक मामले (Legal Case) की जानकारी जानबूझकर छिपाई है। बीजेपी के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के तहत उम्मीदवारों को अपने खिलाफ चल रहे सभी कानूनी मामलों की जानकारी देना अनिवार्य है, और ऐसा न करना चुनावी नियमों का सीधा उल्लंघन है। इसी शिकायत के आधार पर रिटर्निंग ऑफिसर ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नटराजन का नामांकन रद्द करने का फैसला सुनाया।

​कांग्रेस की दलील: 'कोई केस दर्ज नहीं, सिर्फ नोटिस मिला था'

​नामांकन रद्द होने के बाद कांग्रेस ने बीजेपी के आरोपों को पूरी तरह आधारहीन बताया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद विवेक तन्खा और मध्य प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने स्पष्ट किया कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला या FIR दर्ज नहीं है।

​"भ्रम फैलाया जा रहा है। तेलंगाना का मामला केवल एक दीवानी (Civil) कारण बताओ नोटिस (Show-Cause Notice) है, जिसमें ₹10 करोड़ के मुआवजे की मांग की गई है। चुनाव आयोग के नियमों के मुताबिक, कोर्ट या पुलिस में दर्ज मुकदमों की जानकारी देना जरूरी होता है, न कि किसी सामान्य कानूनी नोटिस की। तकनीकी तौर पर यह नामांकन रद्द हो ही नहीं सकता था।"

विवेक तन्खा, वरिष्ठ कांग्रेस नेता व सांसद


 

​मीनाक्षी नटराजन ने भी इस फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बीजेपी जब हमारे विधायकों में सेंध लगाने में नाकाम रही, तो उसने 'वोट चोरी' के बजाय अब 'सीट चोरी' का रास्ता अपना लिया है।

​चुनाव आयोग के दफ्तर के बाहर कांग्रेस का भारी विरोध प्रदर्शन

​इस फैसले के आते ही कांग्रेस का गुस्सा फूट पड़ा। भोपाल से लेकर दिल्ली तक कांग्रेस के दिग्गज नेताओं ने मोर्चा संभाल लिया है।

  • भोपाल में प्रदर्शन: नामांकन रद्द होने की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और विधायक भोपाल में विधानसभा परिसर और चुनाव कार्यालय के बाहर धरने पर बैठ गए। परिसर में भारी गहमा-गहमी और तीखी नोकझोंक देखने को मिली।
  • दिल्ली में डेरा: कांग्रेस के राष्ट्रीय संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में 'निर्वाचन सदन' (चुनाव आयोग मुख्यालय) पहुंचा। कांग्रेस नेताओं ने आयोग के बाहर ही विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

​मध्य प्रदेश राज्यसभा का गणित और पलटा पासा

​मध्य प्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में इस समय 3 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं:

  • बीजेपी की स्थिति: बीजेपी के पास 164 विधायक हैं। दो सीटों पर जीत (116 वोट) तय करने के बाद भी बीजेपी के पास 48 अतिरिक्त वोट बच रहे थे, जो तीसरी सीट जीतने के लिए जरूरी 58 वोटों से 10 कम थे।
  • कांग्रेस की स्थिति: कांग्रेस के पास करीब 61 प्रभावी वोट थे, जो एक सीट जीतने के लिए पर्याप्त थे।

​सेंधमारी और क्रॉस-वोटिंग की आशंका को देखते हुए कांग्रेस अपने विधायकों को विशेष चार्टर्ड विमान से बेंगलुरु (कर्नाटक) भेजने की तैयारी में थी, लेकिन जैसे ही मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द हुआ, पूरी रणनीति बदल दी गई और विधायकों की रवानगी रोक दी गई। इस तकनीकी फैसले के बाद अब बीजेपी के तीसरे उम्मीदवार महेश केवट की निर्विरोध जीत का रास्ता साफ होता दिख रहा है।

​कांग्रेस अब इस मामले को लेकर चुनाव आयोग के केंद्रीय नेतृत्व के सामने अपनी बात रख रही है और कानूनी विकल्प तलाशने में जुटी है।

img
Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।