नाफेड अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, निजी कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ भ्रमण को लेकर निष्पक्षता पर चर्चा नरसिंहपुर। जिले में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी के दौरान नाफेड की निगरानी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
- bySatendra Mishra
- 23 Jul 2026, 05:57 PM
- 7 Mins
नाफेड अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, निजी कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ भ्रमण को लेकर निष्पक्षता पर चर्चा
नरसिंहपुर। जिले में समर्थन मूल्य पर मूंग खरीदी के दौरान नाफेड की निगरानी व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, नरसिंहपुर जिले में नाफेड के क्लस्टर हेड श्री सुरेश गौर कथित रूप से एनसीएमएल कंपनी के सुपरवाइजर एवं स्थानीय प्रतिनिधियों के साथ विभिन्न खरीदी केंद्रों का भ्रमण कर गुणवत्ता संबंधी निरीक्षण करते देखे गए। सूत्रों का यह भी दावा है कि निरीक्षण के दौरान वे निजी कंपनी की चार पहिया वाहन में यात्रा कर रहे थे।
सूत्रों के अनुसार, इस घटनाक्रम के बाद स्थानीय लोगों और विशेषज्ञों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि यदि निरीक्षण करने वाला अधिकारी उसी संस्था के प्रतिनिधियों के साथ लगातार भ्रमण करे, जिसकी कार्यप्रणाली की निगरानी और मूल्यांकन भी उसके दायित्व में है, तो निष्पक्षता की धारणा पर स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठना लाजिमी है।
स्थानीय स्तर पर लोग एक पुरानी कहावत भी दोहरा रहे हैं कि "जिसका नमक खाया जाए, उसके विरुद्ध निष्पक्ष निर्णय लेना कठिन हो जाता है।" लोगों का कहना है कि यदि कोई अधिकारी निजी कंपनी के प्रतिनिधियों के साथ लगातार उठता-बैठता हो, उनकी गाड़ियों में भ्रमण करता हो तथा उनके आतिथ्य का लाभ ले रहा हो, तो ऐसे में उसके द्वारा तैयार की जाने वाली निरीक्षण रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या नाफेड अपने अधिकारियों को भ्रमण, वाहन, आवास एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराती? यदि विभाग यह सभी सुविधाएं उपलब्ध कराता है, तो फिर निजी कंपनी की गाड़ियों, व्यवस्थाओं अथवा अन्य सुविधाओं का उपयोग किन परिस्थितियों में किया गया और क्या इसके लिए सक्षम स्तर से अनुमति प्राप्त थी? इस संबंध में विभाग की ओर से स्थिति स्पष्ट किया जाना आवश्यक माना जा रहा है।
सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि पूर्व के उपार्जन वर्षों में भी संबंधित अधिकारी का नाम विवादों में सामने आया था। हालांकि उन मामलों में विभाग द्वारा क्या कार्रवाई की गई, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, हाल ही में खरीदी केंद्रों के भ्रमण के बाद एक वाहन संबंधी मामूली घटना होने की भी चर्चा है। बताया जा रहा है कि वाहन से उतरते समय एक ऑटो को टक्कर लग गई। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया भी प्राप्त नहीं हुई है।
जनहित में आवश्यक है कि नाफेड एवं संबंधित सक्षम अधिकारी पूरे मामले की निष्पक्ष एवं वस्तुनिष्ठ जांच कर यह स्पष्ट करें कि निरीक्षण की प्रक्रिया निर्धारित नियमों, विभागीय दिशा-निर्देशों एवं आचार संहिता के अनुरूप संचालित हुई या नहीं। यदि किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है, तो विभाग को भी सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष स्पष्ट कर सभी शंकाओं का समाधान करना चाहिए।
(नोट: इस समाचार में उल्लिखित तथ्य विश्वसनीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी एवं स्थानीय चर्चाओं पर आधारित हैं। इनमें से कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। संबंधित अधिकारी एवं संस्था का पक्ष प्राप्त होने पर उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
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