स्टेट हाईवे-22 बना ‘मौत का हाईवे’ करेली–गाडरवारा मार्ग पर कई जगह धंसे साइड शोल्डर, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा गाडरवारा।
- bySatendra Mishra
- 08 Mar 2026, 10:55 PM
- 10 Mins
लापरवाही की सड़क पर दौड़ रही ज़िंदगी : स्टेट हाईवे-22 बना ‘मौत का हाईवे’
करेली–गाडरवारा मार्ग पर कई जगह धंसे साइड शोल्डर, कभी भी हो सकता है बड़ा हादसा
गाडरवारा। करेली–गाडरवारा मार्ग पर स्थित स्टेट हाईवे-22 इन दिनों बदहाली, लापरवाही और घटिया निर्माण का जीता-जागता उदाहरण बन गया है। सड़क के कई हिस्सों में साइड शोल्डर धंस जाने से यह मार्ग वाहन चालकों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। कई बार शिकायत और सूचना दिए जाने के बावजूद भी मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम लिमिटेड (एमपीआरडीसी), जबलपुर के जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के कारण स्थिति जस की तस बनी हुई है। सड़क की मौजूदा हालत देखकर साफ लगता है कि विभाग मानो किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास के नाम पर शासन की लाखों-करोड़ों रुपये की राशि हर वर्ष सड़क मरम्मत और साइड शोल्डर सुधार के नाम पर खर्च दिखाई जाती है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। कई स्थानों पर सड़क किनारे बने शोल्डर धंस चुके हैं और सड़क के किनारे गहरी ढलान बन गई है, जिससे जरा-सी चूक किसी भी वाहन चालक के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
*कौड़ियां, डमरू घाटी से महाकाल चौराहा रिलायंस बाईपास तक सड़क बनी खतरे का रास्ता*
करेली–गाडरवारा मार्ग पर शिवधाम डमरू घाटी के सामने, महाकाल चौक से बाईपास घाटी, कौड़ियां और आसपास के कई हिस्सों में सड़क किनारे साइड शोल्डर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। कई जगह सड़क और शोल्डर के बीच इतना गहरा अंतर बन गया है कि यदि वाहन का पहिया थोड़ा भी नीचे उतर जाए तो वाहन असंतुलित होकर पलट सकता है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति सबसे अधिक खतरनाक बनी हुई है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार कई बार बाइक चालक सड़क से नीचे उतरने के कारण गिरकर घायल हो चुके हैं। रात के समय और बारिश के मौसम में यह खतरा और अधिक बढ़ जाता है, क्योंकि अंधेरे और पानी भरने के कारण वाहन चालक गड्ढों और धंसे हुए शोल्डर का अंदाजा तक नहीं लगा पाते।
*मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल*
स्थानीय ग्रामीणों और राहगीरों ने सड़क मरम्मत कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि सड़क निर्माण और मरम्मत में लगी निजी ठेकेदार कंपनी ने निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया। वहीं एमपीआरडीसी के जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा निरीक्षण और निगरानी में भी भारी लापरवाही बरती गई। सड़क किनारे बने शोल्डर की सही तरीके से फीलिंग नहीं की गई और उसकी मजबूती पर भी ध्यान नहीं दिया गया। परिणामस्वरूप कुछ ही महीनों में सड़क की स्थिति फिर से खराब हो गई। कई जगह डामर उखड़ गया है, गड्ढे बन गए हैं और बारिश के बाद पानी जमा रहने से सड़क और कमजोर हो रही है। यह सब निर्माण कार्य में उपयोग की गई सामग्री और गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर रहा है।
*ओवरलोड वाहनों का दबाव भी बना कारण*
इस मार्ग से लगातार भारी और क्षमता से अधिक भार वाले वाहनों का संचालन भी सड़क की बदहाली का बड़ा कारण माना जा रहा है। ओवरलोड ट्रकों और भारी वाहनों के लगातार आवागमन से सड़क की सतह तेजी से कमजोर हो रही है। हैरानी की बात यह है कि इस समस्या से सभी वाकिफ होने के बावजूद विभाग द्वारा ओवरलोड वाहनों पर नियंत्रण के लिए भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही।
*ना चेतावनी, ना सुरक्षा – यात्रियों की जान भगवान भरोसे*
इतने व्यस्त और संवेदनशील मार्ग पर न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए हैं, न ही खतरनाक स्थानों पर बेरिकेडिंग की गई है और न ही किसी प्रकार के अस्थायी सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि सड़क सुरक्षा को लेकर विभाग पूरी तरह लापरवाह बना हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षा उपाय नहीं किए गए तो किसी भी दिन यहां बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी सीधे संबंधित विभाग और प्रशासन की होगी।
*यह सड़क नहीं, पूरे क्षेत्र की है जीवनरेखा*
स्टेट हाईवे-22 कोई साधारण सड़क नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की जीवनरेखा है। यही मार्ग जबलपुर से नरसिंहपुर, करेली, गाडरवारा होते हुए पिपरिया, नर्मदापुरम, सिलवानी, रायसेन और भोपाल तक सीधा जुड़ाव प्रदान करता है। इसी मार्ग से प्रतिदिन जिले के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, तहसील स्तरीय अधिकारी-कर्मचारी, नरसिंहपुर जिले की सभी विधानसभाओं के विधायक, नर्मदापुरम के सांसद, अन्य जनप्रतिनिधि, व्यापारी वर्ग और हजारों आम नागरिक आवागमन करते हैं। ये वही नागरिक हैं जिन्होंने वाहन खरीदते समय सरकार को जीवन भर का रोड टैक्स चुकाया है, लेकिन बदले में उन्हें मिल रही है एक ऐसी सड़क जो हर दिन उनकी जान को जोखिम में डाल रही है।
*ग्रामीणों की मांग – तुरंत हो निरीक्षण और कार्रवाई*
स्थानीय ग्रामीणों और वाहन चालकों ने प्रशासन से मांग की है कि स्टेट हाईवे-22 की वर्तमान स्थिति का तत्काल तकनीकी निरीक्षण कराया जाए। साथ ही दोषपूर्ण निर्माण और लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों तथा संबंधित ठेकेदार कंपनी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। लोगों का कहना है कि यदि शीघ्र ही सड़क और साइड शोल्डर की मरम्मत, मजबूती और जलनिकासी की व्यवस्था नहीं की गई, तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
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