नरसिंगपुर सहकारिता विभाग बना भ्रष्टाचार का गढ़: जिला पंचायत बैठक में उपायुक्त पर बरसे धनंजय पटेल नियमों को ताक पर रखकर अधिकारियों की मनमानी, किसानों के हितों से खिलवाड़ का आरोप

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सहकारिता विभाग बना भ्रष्टाचार का गढ़: जिला पंचायत बैठक में उपायुक्त पर बरसे धनंजय पटेल

नियमों को ताक पर रखकर अधिकारियों की मनमानी, किसानों के हितों से खिलवाड़ का आरोप

नरसिंहपुर। जिला पंचायत की सामान्य सभा की बैठक में सहकारिता विभाग में व्याप्त कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं का मुद्दा जोरदार तरीके से उठा। जिला पंचायत सदस्य धनंजय पटेल ने उपायुक्त सहकारिता दिनेश चौरसिया की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए विभाग में मनमानी और नियमविरुद्ध फैसले लेने के आरोप लगाए।

मौखिक आदेशों पर चल रहा विभाग?

बैठक के दौरान धनंजय पटेल ने आरोप लगाया कि सहकारिता विभाग में नियम-कानूनों को दरकिनार कर केवल मौखिक आदेशों और फोन कॉल के आधार पर नियुक्तियां एवं जिम्मेदारियां सौंपी जा रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर किस नियम के तहत एक वरिष्ठ सहकारिता अधिकारी को मौखिक निर्देशों के आधार पर उप-सहकारिता अधिकारी बनाकर पूरे जिले की जिम्मेदारी दे दी गई।

पटेल ने इसे प्रशासनिक प्रक्रिया का खुला उल्लंघन बताते हुए कहा कि एक ही व्यक्ति को वरिष्ठ अधिकारी, उपायुक्त और प्रशासक जैसी कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपना किसी बड़े खेल की ओर इशारा करता है।

22 समितियों को ब्लैकलिस्ट करने पर सवाल

बैठक में यह मुद्दा भी उठा कि बिना स्पष्ट आदेश और ठोस कारण बताए 22 अनुभवी सहकारी समितियों को ब्लैकलिस्ट कर दिया गया। धनंजय पटेल ने आरोप लगाया कि वर्षों से किसानों की सेवा कर रही समितियों को हटाकर उन समितियों को गेहूं खरीदी का जिम्मा दिया गया जिनके मामले न्यायालय में लंबित हैं।

उन्होंने कहा कि यह फैसला किसानों के हितों के खिलाफ है और इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर संदेह खड़े होते हैं। उनके अनुसार यह पूरा मामला कथित रूप से कुछ खास समूहों को लाभ पहुंचाने का प्रयास प्रतीत होता है।

जवाब देने से बचते दिखे अधिकारी

बैठक में जब उपायुक्त दिनेश चौरसिया से इन आरोपों पर जवाब मांगा गया तो वे संतोषजनक उत्तर नहीं दे सके। बैठक में मौजूद सदस्यों के अनुसार अधिकारी के जवाब गोलमोल और अस्पष्ट रहे, जिससे सदन में नाराजगी का माहौल बन गया।

धनंजय पटेल ने चेतावनी देते हुए कहा कि विभाग की कार्यप्रणाली से किसानों का नुकसान हो रहा है और इससे सरकार की छवि भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।

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Satendra Mishra

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