इथेनॉल प्लांट में मौत का मंजर: टैंक गिरने से दो मजदूरों की दर्दनाक मौत
- bySatendra Mishra
- 05 May 2026, 07:27 PM
- 3 Mins
इथेनॉल प्लांट में मौत का मंजर: टैंक गिरने से दो मजदूरों की दर्दनाक मौत
नरसिंहपुर एक टैंक नहीं… ये लापरवाही का बम था, जो आखिरकार फट ही गया। एथेनॉल प्लांट में 10 दिनों से मौत बनकर लटक रहा करीब 1100 किलो का टैंक अचानक मजदूरों पर टूट पड़ा — और दो जिंदगियां चंद सेकंड में खत्म हो गईं।
पवन ठाकुर और जगदीश यादव… ये सिर्फ नाम नहीं, दो परिवारों की पूरी दुनिया थे। टैंक गिरा तो ऐसा मंजर बना कि देखने वालों की रूह कांप गई — शरीर के टुकड़े, चारों तरफ खून और चीखों की गूंज।
सबसे खौफनाक सच:
मजदूरों ने पहले ही खतरे की चेतावनी दी थी। बार-बार कहा — “ये टैंक गिर सकता है…”
लेकिन जवाब मिला — काम करो, कुछ नहीं होगा!
उसी “कुछ नहीं होगा” ने आज दो घर उजाड़ दिए।
हादसे के वक्त किस्मत ने दो मजदूरों को बचा लिया — वे पानी पीने गए थे। अगर वो भी वहीं होते, तो मौत का आंकड़ा और बढ़ जाता।
पीछे रह गए छोटे-छोटे बच्चे…
घरों में चीख-पुकार…
और जिम्मेदार लोग? अब भी खामोश!
बड़ा सवाल:
क्या मजदूरों की जान इतनी सस्ती है?
क्या चेतावनियों की कोई कीमत नहीं?
और कब तक “लापरवाही” के नाम पर मौतें होती रहेंगी?
यह हादसा नहीं… सीधा-सीधा सिस्टम की नाकामी और जिम्मेदारों की लापरवाही का खून से लिखा सबूत है।
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
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