गाडरवारा एमपी बोर्ड में बड़ा खुलासा! पुनर्मूल्यांकन में 33 अंक बढ़े, लेकिन पोर्टल पर अब भी “No Change” विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप, मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग
- bySatendra Mishra
- 09 May 2026, 03:41 PM
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एमपी बोर्ड में बड़ा खुलासा!
पुनर्मूल्यांकन में 33 अंक बढ़े, लेकिन पोर्टल पर अब भी “No Change”
विद्यार्थियों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप, मुख्यमंत्री से निष्पक्ष जांच की मांग
गाडरवारा। माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल की मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा तहसील अंतर्गत ग्राम सूकरी निवासी छात्र अभय कौरव ने बोर्ड की कार्यप्रणाली को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों को शिकायत भेजकर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है। जानकारी के अनुसार कक्षा 12वीं बोर्ड परीक्षा 2026 में न्यू एरा पब्लिक स्कूल गाडरवारा के छात्र अभय कौरव को हिंदी विषय में प्रारंभिक परिणाम में मात्र 40 अंक प्राप्त हुए थे। छात्र का कहना है कि उसने परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन किया था, इसलिए कम अंक आने पर उसने रीटोटलिंग एवं पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन किया।पुनर्मूल्यांकन के बाद मंडल द्वारा जीमेल पर उपलब्ध कराई गई उत्तरपुस्तिका में उसके अंक 40 से बढ़कर 73 हो गए, यानी कुल 33 अंकों की वृद्धि दर्ज हुई। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि माध्यमिक शिक्षा मंडल के ऑनलाइन पोर्टल पर अब भी आवेदन की स्थिति “No Change” प्रदर्शित हो रही है।
इस मामले के सामने आने के बाद शिक्षा मंडल की मूल्यांकन प्रक्रिया और तकनीकी व्यवस्था दोनों पर सवाल उठने लगे हैं। छात्र और परिजनों का आरोप है कि इतनी बड़ी अंक वृद्धि के बावजूद पोर्टल पर सुधार अपडेट नहीं होना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही का मामला है। छात्र ने अपनी शिकायत में कहा है कि इस प्रकार की त्रुटियां विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और मानसिक स्थिति पर गहरा असर डालती हैं। कई प्रतिभाशाली विद्यार्थी कम अंक आने के कारण तनाव और निराशा का सामना करते हैं।
मुख्यमंत्री, स्कूल शिक्षा मंत्री, प्रमुख सचिव स्कूल शिक्षा, माध्यमिक शिक्षा मंडल भोपाल, आयुक्त लोक शिक्षण, कलेक्टर नरसिंहपुर सहित कई अधिकारियों को जीमेल और पोस्ट ऑफिस के माध्यम से भेजे गए शिकायत पत्र में पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच, दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई तथा मूल्यांकन प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने की मांग की गई है।अब यह मामला शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।
Satendra Mishra
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