डॉ. पंकज थारवानी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में : मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री शिकायत पर सख्त

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डॉ. पंकज थारवानी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में : मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री शिकायत पर सख्त

थारवानी केस में निष्पक्ष जांच के आदेश क्लीन चिट के बाद भी विवाद बरकरार—होर्डिंग, मशीनों के दुरुपयोग और मौत के आरोपों से घिरा मामला

गाडरवारा। नरसिंहपुर जिले की तहसील गाडरवारा का एक चर्चित चिकित्सक डॉ. पंकज थारवानी का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। मुख्यमंत्री एवं उपमुख्यमंत्री कार्यालय को जनसुनवाई में दी गई लिखित शिकायत पर त्वरित संज्ञान लेते हुए निष्पक्ष जांच के आदेश जारी कर दिए गए हैं। इससे पहले मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नरसिंहपुर द्वारा जांच में डॉक्टर को लापरवाही के आरोपों से क्लीन चिट मिल चुकी है, लेकिन अब पूरे प्रकरण ने नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नरसिंहपुर की जांच रिपोर्ट के मुताबिक संबंधित मरीज पहले से ही गंभीर किडनी बीमारी (एंड स्टेज रीनल डिजीज) से पीड़ित था और विभिन्न अस्पतालों में उसका इलाज जारी रहा। इसी आधार पर डॉक्टर को दोषी नहीं माना गया। जबकि पैथोलॉजी रिपोर्ट के अनुसार किडनी बीमारी (एंड स्टेज रीनल डिजीज) सही बताई गई थी। बावजूद इसके विवाद थमता नजर नहीं आ रहा।

*आदेश बेअसर : शहर में अब भी टंगे निजी होर्डिंग*

स्वास्थ्य विभाग और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नरसिंहपुर द्वारा निजी प्रचार-प्रसार (होर्डिंग, फ्लेक्स) हटाने के स्पष्ट निर्देश दिए जाने के बावजूद गाडरवारा की मुख्य सड़कों पर डाक्टर पंकज थारवानी की निजी क्लीनिक के बड़े-बड़े बोर्ड अब भी रोड पर लगे हुए हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या विभागीय आदेश सिर्फ कागजों तक और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नरसिंहपुर के निर्देश हवा तक सीमित हैं...??

डॉ. थारवानी पर दो मरीजों की मौत, कई मरीजों के कथित लापरवाहीपूर्ण इलाज, शासकीय अस्पताल गाडरवारा की बाउंड्री वॉल तोड़ने और सरकारी एक्स-रे मशीन के निजी उपयोग जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। हैरानी की बात यह है कि इतने गंभीर मामलों के बावजूद अब तक न FIR दर्ज हुई, न निलंबन और न ही कोई ठोस विभागीय कार्रवाई सामने आई है।

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नरसिंहपुर और प्रशासन पर उठे सवाल
मुख्य चिकित्सा अधिकारी की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। न तो शिकायतकर्ता से संपर्क किया गया, न ही जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई। वहीं कलेक्टर स्तर पर भी प्रभावी हस्तक्षेप न दिखने से प्रशासनिक निष्क्रियता पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
जनता में आक्रोश, अब कार्रवाई की उम्मीद
पूरे मामले ने स्वास्थ्य व्यवस्था की साख और प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है। क्षेत्र में चर्चा है कि क्या किसी चिकित्सक को संरक्षण प्राप्त है या मामला जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाला जा रहा है।

अब मुख्यमंत्री और उप मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद उम्मीद की जा रही है कि निष्पक्ष जांच होगी, रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी और दोष सिद्ध होने पर संबंधितों पर सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।