Follow Us:

नवजात को चूहे ने काटा या स्वास्थ्य व्यवस्था को लग गया जंग? गाडरवारा सिविल अस्पताल में कथित घटना से हड़कंप, नवजात की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

1000716164

नवजात को चूहे ने काटा या स्वास्थ्य व्यवस्था को लग गया जंग?

गाडरवारा सिविल अस्पताल में कथित घटना से हड़कंप, नवजात की सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

जांच के निर्देश; प्रभारी सीएमएचओ बोले— दोषी पाए जाने पर होगी सख्त कार्रवाई

गाडरवारा। नरसिंहपुर जिले का शासकीय सिविल अस्पताल गाडरवारा एक बार फिर व्यवस्थागत खामियों और गंभीर आरोपों को लेकर चर्चा के केंद्र में है। अस्पताल के नवजात शिशु वार्ड से सामने आई एक कथित घटना ने न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर सरकारी अस्पतालों में मरीज और नवजात कितने सुरक्षित हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम नानदनेर निवासी कुमकुम नामक महिला ने हाल ही में शासकीय सिविल अस्पताल गाडरवारा में बच्चे को जन्म दिया था। आरोप है कि अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान नवजात शिशु के हाथ को चूहे ने काट लिया, जिससे उसे चोट पहुंची। घटना की जानकारी सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन की कार्यशैली, स्वच्छता व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों को लेकर लोगों में नाराजगी व्याप्त है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि जिस नवजात वार्ड में संक्रमण और बाहरी खतरों से सुरक्षा के लिए विशेष व्यवस्थाएं होनी चाहिए, वहां यदि चूहा पहुंच जाता है तो यह केवल एक घटना नहीं बल्कि पूरी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है। आज यदि चूहा नवजात तक पहुंचा है तो कल कोई सांप, बिच्छू या अन्य खतरनाक जीव अस्पताल परिसर अथवा वार्ड तक पहुंच जाए तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि अस्पताल परिसर में लंबे समय से अव्यवस्थाओं की शिकायतें सामने आती रही हैं। कभी दवाओं की कमी, कभी डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की कमी, कभी एम्बुलेंस सेवाओं को लेकर विवाद, तो कभी अस्पताल परिसर में असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठते रहे हैं। लोगों का आरोप है कि अस्पताल का मुख्य प्रवेश द्वार कई बार नशेड़ियों का जमावड़ा स्थल बन जाता है, जबकि अस्पताल परिसर में असामाजिक गतिविधियां भी चर्चा का विषय रही हैं। अस्पताल में पहले भी ऐसे मामले सामने आते रहे हैं जिनमें सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न उठे। सुरक्षा कर्मियों द्वारा चिकित्सकीय कार्य किए जाने के आरोप, दवाओं की अनुपलब्धता, विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, मेडिकल अधिकारियों एवं नर्सिंग स्टाफ की कमी जैसी समस्याएं लगातार चर्चा में रही हैं। इसके बावजूद व्यवस्थाओं में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दिया।

गौरतलब है कि अस्पतालों में चूहों, मच्छरों, कॉकरोच एवं अन्य जीव-जंतुओं की रोकथाम के लिए शासन द्वारा नियमित रूप से बजट उपलब्ध कराया जाता है। पेस्ट कंट्रोल, साफ-सफाई और संक्रमण नियंत्रण के लिए अलग व्यवस्थाएं हैं। ऐसे में यदि नवजात वार्ड तक चूहों की पहुंच की बात सामने आती है तो यह जांच का विषय है कि संबंधित व्यवस्थाओं का पालन कितना प्रभावी ढंग से किया जा रहा था।

विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार घटना के बाद नवजात का उपचार कराया गया। वहीं स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी रही कि मामले को अधिक तूल न मिले, इसके लिए स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया। हालांकि इस संबंध में अस्पताल प्रशासन का विस्तृत पक्ष भी सामने आना शेष है।

घटना के बाद नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि अस्पताल के सबसे सुरक्षित माने जाने वाले नवजात वार्ड में भी मासूम सुरक्षित नहीं हैं तो आम मरीजों की सुरक्षा का अंदाजा सहज लगाया जा सकता है।


*"दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा"*

*डॉ. देवेंद्र रिपुदमन (प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, नरसिंहपुर)*

"यदि जांच में यह पाया जाता है कि अस्पताल परिसर अथवा नवजात शिशु वार्ड में सुरक्षा व्यवस्था में किसी प्रकार की चूक हुई है या पेस्ट कंट्रोल व्यवस्था में लापरवाही बरती गई है, जिसके कारण किसी नवजात को नुकसान पहुंचा है, तो इसे किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। मामले की तत्काल जांच कराई जाएगी तथा जो भी अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाएगा उसके विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।"

img
Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।