नरसिंगपुर ढाई महीने में भी एक ग्राम पंचायत की जांच पूरी नहीं! 5 मई को शिकायत, 13 मई को जांच दल गठित, 17 जुलाई तक सिर्फ "जांच प्रक्रियाधीन" — आखिर किसे बचाने में जुटा है प्रशासन?
- bySatendra Mishra
- 17 Jul 2026, 09:51 AM
- 8 Mins
ढाई महीने में भी एक ग्राम पंचायत की जांच पूरी नहीं!
5 मई को शिकायत, 13 मई को जांच दल गठित, 17 जुलाई तक सिर्फ "जांच प्रक्रियाधीन" — आखिर किसे बचाने में जुटा है प्रशासन?
गाडरवारा। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। ग्राम पंचायत कौड़ियां से जुड़ी गंभीर शिकायत 5 मई 2026 को मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर दर्ज कराई गई थी, जिसमें डिजिटल सुरक्षा के नाम पर लाखों रुपये खर्च कर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों में कथित अनियमितता, पंचायत सचिव की संदिग्ध भूमिका, बीते पांच वर्षों में हुए विकास कार्यों की निष्पक्ष जांच, सार्वजनिक धन के कथित दुरुपयोग तथा पंचायत भवन के सामने लगे राष्ट्रीय ध्वज के अपमानजनक रखरखाव जैसे गंभीर मुद्दे उठाए गए थे। शिकायत की गंभीरता को देखते हुए मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत नरसिंहपुर के निर्देशन में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत चावरपाठा द्वारा 13 मई 2026 को जांच दल गठित किया गया और उसी दिन जनपद पंचायत का पूरा अमला ग्राम पंचायत कौड़ियां पहुंचा, जहां पंचायत भवन में बैठक लेकर विभिन्न अभिलेखों एवं विकास कार्यों का प्रारंभिक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान पंचायत भवन के चारों ओर फैली गंदगी, वर्षों से बंद पड़ा सार्वजनिक सुलभ कॉम्प्लेक्स, जिसके कारण आसपास खुले में शौच एवं गंदगी की स्थिति, साफ-सफाई की बदहाल व्यवस्था तथा अन्य कई कथित अनियमितताएं सामने आने की चर्चा रही। उस समय यह भी कहा गया कि पंचायत सचिव को तत्काल हटाकर जनपद पंचायत कार्यालय चावरपाठा से संबद्ध किया जाएगा, किंतु ऐसा नहीं हुआ। जबकि पंचायत भवन के आसपास गंदगी के ढेर जस के तस पड़े हैं। बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक गंभीर हो गई है, जहां सड़ांध, बदबू और संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी अब तक प्रभावी कार्रवाई करते दिखाई नहीं दे रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि 13 मई को गठित जांच दल आखिर पिछले ढाई महीने से कर क्या रहा है? यदि एक ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड, निर्माण कार्यों और वित्तीय दस्तावेजों की जांच में ही इतना लंबा समय लग रहा है, तो पारदर्शिता और जवाबदेही की बात कैसे की जा सकती है? आमजन के बीच यह चर्चा तेज है कि क्या जांच जानबूझकर लंबित रखी जा रही है, क्या दोषियों को बचाने के लिए समय बढ़ाया जा रहा है, क्या जांच केवल कागजों तक सीमित होकर रह गई है, या फिर प्रशासनिक स्तर पर पूरे मामले को ठंडे बस्ते में डालने का प्रयास किया जा रहा है? क्योंकि 17 जुलाई 2026 तक मुख्यमंत्री शिकायत पोर्टल पर शिकायत की स्थिति केवल "जांच प्रक्रियाधीन (WIP)" ही प्रदर्शित हो रही है और न तो जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है तथा न ही शिकायत में उठाए गए किसी भी मुद्दे पर धरातल पर सुधार दिखाई देता है।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि डिजिटल सुरक्षा के नाम पर लगाए गए कई सीसीटीवी कैमरे केवल खंभों पर लटके हुए दिखाई देते हैं, जबकि उनमें न तो केबल कनेक्शन है, न डीवीआर की व्यवस्था और न ही मॉनिटर उपलब्ध है। यदि यह आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह सार्वजनिक धन के उपयोग और कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्न खड़े करते हैं। इसके साथ ही शिकायतकर्ता ने ग्राम पंचायत में पिछले पांच वर्षों के सभी विकास कार्यों, वित्तीय व्यय, निर्माण कार्यों और भुगतान की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।
अब ग्रामीणों और क्षेत्रीय नागरिकों का कहना है कि यदि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद महीनों तक जांच पूरी नहीं होती और न ही कोई ठोस कार्रवाई दिखाई देती है, तो शासन की पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के विरुद्ध कार्रवाई के दावों पर स्वाभाविक रूप से प्रश्न उठेंगे। लोगों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि जांच रिपोर्ट कब सार्वजनिक होगी, यदि अनियमितताएं पाई जाती हैं तो दोषियों पर क्या कार्रवाई होगी, और यदि जांच में अनावश्यक विलंब हुआ है तो उसके लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही कौन तय करेगा।
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
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