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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी लिलवानी की नल-जल योजना: ठेकेदार की मनमानी से जनता प्यासी, कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन ​घटिया निर्माण और तकनीकी धांधली की खुली पोल

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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी लिलवानी की नल-जल योजना: ठेकेदार की मनमानी से जनता प्यासी, कुंभकर्णी नींद में सोया प्रशासन

  • घटिया निर्माण और तकनीकी धांधली की खुली पोल, 

  • ​लाखों के बजट पर ठेकेदार और अधिकारियों का डाका; ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, आंदोलन की चेतावनी।

गाडरवारा (लिलवानी)।

सरकार की सबसे महत्वाकांक्षी 'नल-जल योजना' को किस तरह भ्रष्टाचार की दीमक चाट रही है, इसका जीता-जागता और शर्मनाक उदाहरण गाडरवारा तहसील की ग्राम पंचायत लिलवानी में देखने को मिल रहा है। 'हर घर जल' पहुंचाने का दम भरने वाली सरकार के दावों को यहाँ के भ्रष्ट ठेकेदार और लापरवाह अधिकारियों ने मिलकर पूरी तरह ठेंगा दिखा दिया है। कागजों पर तो घर-घर पानी पहुँचकर नदियाँ बह रही हैं, लेकिन धरातल की कड़वी सच्चाई यह है कि आज भी लिलवानी की जनता पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रही है।

घटिया निर्माण की पराकाष्ठा: सरकारी पैसे की सरेआम लूट

​ग्रामीणों का आरोप है कि इस पूरी योजना में गुणवत्ता को ताक पर रखकर सरेआम डाका डाला गया है। ठेकेदार द्वारा पाइपलाइन बिछाने से लेकर अन्य निर्माण कार्यों में जमकर तकनीकी लापरवाही और अत्यंत घटिया दर्जे की सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। निर्माण कार्य इतना बदतर है कि उद्घाटन से पहले ही योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। सरकारी खजाने को चूना लगाकर अपनी जेबें भरने वाले इस ठेकेदार की मनमानी के आगे पूरा सिस्टम घुटने टेके नजर आ रहा है।

अधिकारियों की रहस्यमयी चुप्पी, क्या भ्रष्टाचार में है बराबर की हिस्सेदारी?

​लिलवानी में हो रहे इस खुले भ्रष्टाचार और धांधली पर संबंधित विभागीय अधिकारियों ने रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है। इतनी बड़ी गड़बड़ी और जनता की लगातार मिल रही शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों का आँखें मूंदकर बैठे रहना उनकी कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्षेत्र में यह चर्चा आम है कि क्या बिना विभागीय शह और कमीशनखोरी के कोई ठेकेदार इतना बेलगाम हो सकता है? आखिर अधिकारियों की यह चुप्पी किस बात का इशारा है?

जनता का फूटा आक्रोश: 

​सरकारी बजट के खुलेआम दुरुपयोग लिलवानी के ग्रामीणों का सब्र अब जवाब दे चुका है। प्रशासन और ठेकेदार के इस गठजोड़ के खिलाफ ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों का कहना है कि एक तरफ सरकार पानी का अधिकार देने की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर उनके हक के पैसे को डकारा जा रहा है। आक्रोशित जनता ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस मामले का समाधान नहीं हुआ, तो वे सड़कों पर उतरकर उग्र प्रदर्शन करेंगे।

यक्ष प्रश्न: कब जागेगा अंधा-बहरा तंत्र?

​लिलवानी का यह मामला पूरे सिस्टम के मुंह पर करारा तमाचा है। सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि आखिर कब तक ऐसे लापरवाह और भ्रष्ट ठेकेदारों पर मेहरबानी बरती जाएगी? क्या जिला प्रशासन और वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जाँच कराएंगे? क्या घटिया सामग्री लगाने वाले ठेकेदार को ब्लैकलिस्ट कर उस पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी या फिर हमेशा की तरह लीपापोती कर जनता को प्यासा मरने के लिए उनके हाल पर छोड़ दिया जाएगा?


 

यह जनता के हक का सवाल है, और इसका जवाब जनता को मिलना ही चाहिए!

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।