अवैध रूप से संचालित मौली पैथोलॉजी लैब पर कार्यवाही, सीएमएचओ के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने जांच, पैथोलॉजिस्ट डॉ. मोनिका लिल्हारे के स्कैन हस्ताक्षर मिले बालाघाट। जिले में बिना पंजीयन और बिना योग्यता के पैथालॉजी का संचालन किया जा रहा है,

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अवैध रूप से संचालित मौली पैथोलॉजी लैब पर कार्यवाही, सीएमएचओ के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने जांच, पैथोलॉजिस्ट डॉ. मोनिका लिल्हारे के स्कैन हस्ताक्षर मिले

बालाघाट। जिले में बिना पंजीयन और बिना योग्यता के पैथालॉजी का संचालन किया जा रहा है, यही नहीं बल्कि कर्मचारी स्वयं जांच कर पैथोलॉजिस्ट की साईन से उसकी जानकारी के बिना मरीजांे को रिपोर्ट दे रहे है। यह जांच और रिपोर्ट मरीजो के स्वास्थ्य से सीधा खिलवाड़ है, जिले में संचालित होे रही ऐसे लेबो के खिलाफ, स्वास्थ्य विभाग कार्यवाही में जुटा है, जिसमें मंगलवार को मौली पेथो-लेब के संचालक चंद्रशेखर पटले को सीएमएचओ डॉ. परेश उपलप ने जांच में मिली खामियों के बाद बिना अनुमति अवैध रूप से पैथोलॉजी संचालित करने और अन्य अनिमिताओं पर जवाब देने नोटिस जारी किया है।

 दरअसल, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र सरेखा के प्रभारी चिकित्सा अधिकारी डॉ. निशांत नंदा गौली ने, बालाघाट हॉस्पिटल लिमिटेड परिसर स्थित मौली पेथो-लेब की आकस्मिक जांच की। जिसमें कई गंभीर अनियमितताएं मिली है। जांच में पता चला कि पैथोलॉजी का संचालन चंद्रशेखर पटले, अवैध रूप से कर रहे थे, जिनके पास किसी प्रकार का कोई वैधानिक पंजीयन नहीं थी। यही नहीं बल्कि वे, पैथोलॉजी चलाने, अन्य क्लीनिक के पंजीयन प्रमाण-पत्र और लाइसेंस का अवैध उपयोग कर रहे थे। साथ ही यहां नियमित नहीं होने के बावजूद, पैथोलॉजिस्ट डॉ. मोनिका लिल्हारे के स्कैन किए हस्ताक्षर, जांच टीम को मिले है। जांच दल को पता चला कि लैब में कार्यरत कर्मचारी, ही जांच रिपोर्ट तैयार करते है और मरीज को रिपोर्ट देने, डॉ. मोनिका लिल्हारे के हस्ताक्षरयुक्त सील का उपयोग करते है, ताकि मरीज को विश्वास हो जाए कि उनकी लैब जांच, पैथोलॉजिस्ट ने की है। जिससे वह, जांच कराने आने वाले को भी गुमराह कर रहे थे। 

 इसके अलावा बायो-मेडिकल वेस्ट प्रबंधन का पंजीयन और अधिकृत संस्था से अनुबंध भी लैब में नहीं था। जिस दौरान, टीम निरीक्षण कर रही थी, उस दौरान, कथित लैब, संचालक चंद्रशेखर पटले मौजूद नहीं थे। ना ही टीम को जांच में वहां मौजूद, किसी ने हॉस्पिटल परिसर में किराए पर संचालित लैब के अनुबंध  नवीनीकरण संबंधी भी कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया। 

 जिसे गंभीरता से लेते हुए सीएमएचओ डॉ. परेश उपलप ने मौली पैथोलॉजी के संचालक चंद्रशेखर पटले के विरुद्ध मध्यप्रदेश नर्सिंग होम एक्ट 1973 के प्रावधानों के उल्लंघन का मामला पाए जाने पर उन्हें एक सप्ताह का समय, अपना जवाब पेश करने दिया गया है, जिसके बाद उनके खिलाफ नियमानुसार वैधानिक कार्यवाही की जाएगी।

 

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Satendra Mishra

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