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राज्यसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश में सियासी हलचल तेज, कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के CM हाउस पहुँचने से मंचा हड़कंप

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राज्यसभा चुनाव से पहले मध्य प्रदेश में सियासी हलचल तेज, कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे के CM हाउस पहुँचने से मंचा हड़कंप

​मध्य प्रदेश में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक पारा चरम पर पहुँच गया है। पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष और टूट की अटकलों के बीच, बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे का मुख्यमंत्री निवास पहुँचना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। भाजपा विधायक दल की बैठक के ठीक बाद सप्रे की सीएम हाउस में मौजूदगी ने कांग्रेस खेमे में बेचैनी बढ़ा दी है।

​पुराना है भाजपा से 'मोह', सदस्यता पर लटकी है तलवार

​निर्मला सप्रे का भाजपा नेताओं के साथ मंच साझा करना कोई नया वाकया नहीं है। पिछले कई महीनों से वे लगातार सरकारी और भाजपा के संगठनात्मक कार्यक्रमों में नजर आती रही हैं।

दल-बदल का मामला: कांग्रेस पहले ही सप्रे की इन गतिविधियों को दल-बदल कानून का उल्लंघन बताते हुए उनकी विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की मांग कर चुकी है। हालांकि, यह मामला अभी न्यायालय में विचाराधीन है, लेकिन राज्यसभा चुनाव के ऐन पहले उनका फिर से भाजपा खेमे के करीब दिखना कांग्रेस के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।


 

​तीसरे उम्मीदवार 'महेश केवट' ने बिगाड़ा गणित, कांग्रेस की 'लंच पॉलिटिक्स'

​भाजपा द्वारा राज्यसभा के लिए तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को मैदान में उतारने के बाद चुनावी गणित बेहद दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण हो गया है। इस चुनौती से निपटने और अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए कांग्रेस ने 'लंच पॉलिटिक्स' का सहारा लिया है।

  • रणनीतिक बैठक: प्रदेश कांग्रेस कार्यालय  में विधायकों की एक महत्वपूर्ण बैठक और सामूहिक भोज का आयोजन किया गया।
  • मंथन: इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, प्रभारी हरीश चौधरी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने चुनावी रणनीति पर घंटों मंथन किया और विधायकों को एकजुट रहने का मंत्र दिया।

​'बाड़ेबंदी' की तैयारी में कांग्रेस!

​सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व को आशंका है कि चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग या भाजपा द्वारा बड़ी सेंधमारी की जा सकती है। इसी डर के चलते पार्टी अपने विधायकों की बाड़ेबंदी  को लेकर भी गंभीरता से विचार कर रही है। ऐसे माहौल में निर्मला सप्रे का मुख्यमंत्री आवास जाना कांग्रेस के दावों और रणनीति पर बड़े सवाल खड़े करता है।

​निष्ठा और प्रबंधन की बड़ी परीक्षा

​18 जून को होने वाला यह राज्यसभा चुनाव अब केवल संख्या बल का खेल नहीं रह गया है। यह दोनों ही दलों के लिए:

  1. राजनीतिक प्रबंधन 
  2. संगठनात्मक एकजुटता
  3. विधायकों की निष्ठा

​की एक बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने जा रहा है। अब देखना यह होगा कि क्या कांग्रेस अपने कुनबे को बिखरने से बचा पाती है, या भाजपा विपक्षी खेमे में सेंध लगाकर एक बार फिर राजनीतिक बढ़त हासिल करने में कामयाब होती है।

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।