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“क्या एक सामान्य सर्दी-जुकाम ने ले ली महिला की जान… या निजी क्लीनिक की लापरवाही बनी मौत की वजह?” नरसिंहपुर में चिकित्सा व्यवस्था पर बड़ा सवाल “जांच समिति ने डॉक्टर को दी क्लीन चिट, पर बेटे ने कहा – यह सच नहीं, साजिश है!” गाडरवारा/नरसिंहपुर।

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“क्या एक सामान्य सर्दी-जुकाम ने ले ली महिला की जान… या निजी क्लीनिक की लापरवाही बनी मौत की वजह?”

नरसिंहपुर में चिकित्सा व्यवस्था पर बड़ा सवाल

“जांच समिति ने डॉक्टर को दी क्लीन चिट, पर बेटे ने कहा – यह सच नहीं, साजिश है!”

गाडरवारा/नरसिंहपुर।
नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा से सामने आया एक गंभीर मामला अब पूरे जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था और जांच प्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। एक महिला की मौत के बाद परिजनों ने निजी चिकित्सक पर गलत इलाज, ओवरडोज और गंभीर लापरवाही के आरोप लगाए हैं, जबकि जिला स्तरीय जांच समिति ने डॉक्टर को दोषमुक्त बताते हुए शिकायत को “मेडिकल जानकारी के अभाव में की गई शिकायत” करार दिया है। अब मृतका के बेटे ने जांच प्रतिवेदन को “झूठा और डॉक्टर को बचाने की साजिश” बताया है।

मामला ग्राम लिलवानी निवासी स्व. प्रभा बाई मिश्रा की मौत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता एवं मृतका के पुत्र सत्येंद्र मिश्रा का आरोप है कि उनकी मां पूरी तरह स्वस्थ थीं और केवल सर्दी-बुखार की शिकायत होने पर 12 जुलाई 2025 को उन्हें गाडरवारा स्थित डॉ. पंकज थारवानी के निजी क्लीनिक ले जाया गया था। आरोप है कि डॉक्टर ने बिना शुगर, बीपी, पल्स और वजन जांचे भारी मात्रा में इंजेक्शन और आईवी बॉटल चढ़ाईं तथा महंगी जांचें कराईं।

परिजनों का दावा है कि पहले दिन ईएसआर 65 थी, लेकिन तीन दिन इलाज के बाद जब दोबारा जांच हुई तो ईएसआर बढ़कर 125 पहुंच गई। इसके बाद डॉक्टर ने मरीज को बाहर ले जाने की सलाह दी। सत्येंद्र मिश्रा के अनुसार जब वे अपनी मां को जबलपुर लेकर गए तो वहां डॉक्टरों ने बताया कि किडनी में गंभीर संक्रमण, पस और गैस बन चुकी है तथा यह स्थिति “ओवर डोज” के कारण उत्पन्न हुई है। बाद में नरसिंहपुर के अस्पताल में इलाज के दौरान 7 अगस्त 2025 को उनकी मां की मौत हो गई।

“मेरी मां को पहले कोई गंभीर बीमारी नहीं थी” – पुत्र का आरोप

सत्येंद्र मिश्रा ने जांच समिति के प्रतिवेदन पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि उनकी मां को पहले से कोई बड़ी बीमारी नहीं थी। उनका कहना है कि जांच रिपोर्ट में यह लिखना कि मरीज पहले से “ग्रेड-5 किडनी डिजीज” से पीड़ित थी, पूरी तरह झूठ है और डॉक्टर को बचाने के लिए तथ्यों को तोड़ा-मरोड़ा गया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि यदि मरीज पहले से इतनी गंभीर बीमारी से ग्रसित थी तो डॉक्टर ने पहले दिन यह जानकारी क्यों नहीं दी? तीन दिन तक इलाज और भारी दवाइयां देने के बाद ही हालत अचानक क्यों बिगड़ी? उन्होंने कहा कि जांच समिति ने मरीज के इलाज के पूरे घटनाक्रम और बाद की मेडिकल स्थिति को नजरअंदाज कर केवल डॉक्टर को बचाने का प्रयास किया है।

जांच समिति ने क्या कहा?

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय द्वारा गठित जिला स्तरीय जांच समिति ने अपने प्रतिवेदन में कहा कि मरीज का eGFR 30 था, जो गंभीर किडनी रोग की ओर संकेत करता है। समिति के अनुसार ऐसे मरीज का इलाज गाडरवारा स्तर पर संभव नहीं था और डॉक्टर द्वारा मरीज को जबलपुर रेफर किया गया था। समिति ने यह भी कहा कि बाद में मरीज का इलाज अन्य अस्पतालों में भी हुआ, इसलिए मृत्यु के लिए केवल डॉ. पंकज थारवानी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।

सबसे बड़ा सवाल – यदि मरीज गंभीर थी तो तीन दिन तक इलाज क्यों?

अब इस पूरे मामले में कई गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं—

यदि मरीज पहले से गंभीर किडनी रोग से पीड़ित थी तो निजी क्लीनिक में लगातार इंजेक्शन और आईवी क्यों चढ़ाई गई?

मरीज की शुगर, बीपी और अन्य आवश्यक जांचें क्यों नहीं की गईं?

तीन दिन के भीतर ईएसआर 65 से 125 कैसे पहुंच गई?

क्या मरीज की स्थिति समय रहते समझी नहीं गई या जानबूझकर जोखिम भरा उपचार किया गया?

क्या जांच समिति ने निष्पक्ष जांच की या केवल औपचारिकता निभाई?


“डॉक्टरों को बचाने की कोशिश?”

मृतका के पुत्र ने जांच समिति पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पूरे मामले में मेडिकल लॉबी एक-दूसरे को बचाने में लगी हुई है। उन्होंने मांग की है कि इस मामले की उच्च स्तरीय स्वतंत्र जांच कराई जाए और जांच समिति की भूमिका की भी जांच हो।

यह मामला अब केवल एक महिला की मौत तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह सवाल बन गया है कि क्या छोटे शहरों के निजी क्लीनिकों में मरीजों की जान के साथ प्रयोग हो रहा है? और क्या आम आदमी को न्याय मिल पाना इतना आसान है?

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।