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नर्मदापुरम–नरसिंहपुर आज़ादी के 80 साल बाद भी नाव के सहारे जिंदगी! दूधी नदी पर पुल नहीं, बारिश के चार महीने 20 से अधिक गांवों के हजारों लोग नाव के भरोसे बनखेड़ी/सांईखेड़ा

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 नर्मदापुरम–नरसिंहपुर
आज़ादी के 80 साल बाद भी नाव के सहारे जिंदगी!
दूधी नदी पर पुल नहीं, बारिश के चार महीने 20 से अधिक गांवों के हजारों लोग नाव के भरोसे
बनखेड़ी/सांईखेड़ा।
देश आज विकास के उस दौर में पहुंच चुका है, जहां बड़े-बड़े राष्ट्रीय राजमार्ग बन रहे हैं, फ्लाईओवर तैयार हो रहे हैं और गांवों को जोड़ने के लिए करोड़ों रुपये की सड़क परियोजनाएं चल रही हैं। वहीं नर्मदापुरम जिले की बनखेड़ी तहसील और नरसिंहपुर जिले के सांईखेड़ा क्षेत्र के बीच दूधी नदी के किनारे बसे गांवों की तस्वीर आज भी चिंता बढ़ाने वाली है।
दूधी नदी पर स्थायी पुल नहीं होने के कारण बारिश के मौसम में क्षेत्र के लोगों को नाव के सहारे नदी पार करनी पड़ती है।
क्षेत्र में बारछी, पुरैना रंधीर, जेटवाड़ा, डूमर, अन्हाई, सुरेला, रिछेड़ा, सलैया, मलकाजरा, राजा पिपरिया, सेमखेड़ा, नंदना, परसवाड़ा, वेदर, इमलिया, पठा, खैरी, जमुनिया, आमगांव और महुआखेड़ा सहित 20 से अधिक गांव इस समस्या से प्रभावित बताए जाते हैं।
स्थानीय जानकारी के अनुसार 80 हजार से 1 लाख तक की आबादी प्रभावित
ग्रामीणों के अनुसार इन गांवों और आसपास के क्षेत्र में लगभग 80 हजार से 1 लाख तक की आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से इस संपर्क समस्या से प्रभावित होती है। हालांकि इस संयुक्त आबादी के आधिकारिक आंकड़े अलग-अलग गांवों के स्तर पर सत्यापित किए जाना बाकी हैं।
चार महीने नाव ही सहारा!
बारिश के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने पर ग्रामीणों का सड़क संपर्क प्रभावित हो जाता है। ऐसे में बाइक और अन्य दोपहिया वाहन तक नाव में रखकर नदी पार कराने की तस्वीरें सामने आती हैं।
स्कूल जाने वाले बच्चे, मरीज, बुजुर्ग, किसान, मजदूर और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों के लिए यह सिर्फ परेशानी नहीं, बल्कि जोखिम भरा आवागमन भी है।
 बारछी-सांईखेड़ा क्षेत्र के आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों और विद्यार्थियों के बरसात में नाव अथवा नदी पार करके आवागमन करने तथा दूधी नदी पर पुल की मांग का उल्लेख किया गया था। �

मांग वर्षों पुरानी, इंतजार अब भी जारी
दूधी नदी पर पुल की मांग कोई नई बात नहीं है। वर्षों से क्षेत्र के ग्रामीण इस समस्या के स्थायी समाधान की मांग करते आ रहे हैं।
अब सवाल यह है—
जब बड़े-बड़े पुल और फ्लाईओवर बन सकते हैं, तो इन गांवों को जोड़ने के लिए दूधी नदी पर स्थायी पुल कब बनेगा?
ग्रामीणों को अब उम्मीद
क्षेत्र के लोगों को वर्तमान सरकार और जनप्रतिनिधियों से उम्मीद है कि इस समस्या को प्राथमिकता देते हुए दूधी नदी पर स्थायी पुल और दोनों ओर बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएंगे।
क्योंकि विकास की तस्वीर तभी पूरी मानी जाएगी, जब इन गांवों के लोगों को भी बारिश के चार महीने नाव के सहारे अपनी जिंदगी और वाहन नदी पार कराने की मजबूरी से मुक्ति मिले।
🔴 बड़ा सवाल:
“AI के युग में नाव पर जिंदगी क्यों?”
“आखिर कब बनेगा दूधी नदी पर पुल?”
“कब खत्म होगा बारिश में नाव से आवागमन का सिलसिला?”
80 साल बाद भी पुल का इंतजार…
क्या अब बदलेगी दूधी नदी के किनारे बसे गांवों की तस्वीर?

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।