Follow Us:

नरसिंगपुर 8 करोड़ के शासकीय कॉलेज भवन साईखेडा में उद्घाटन के कुछ माह बाद दरारें

1000156379

8 करोड़ के शासकीय कॉलेज भवन साईखेडा में उद्घाटन के कुछ माह बाद दरारें

एक तरफ  शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह के प्रयासों से शिक्षा अधोसंरचना को मिल रही करोड़ों की राशि, दूसरी तरफ निर्माण गुणवत्ता पर गंभीर सवाल; विद्यार्थियों की सुरक्षा से खिलवाड़ का आरोप

साईं खेड़ा। विद्यार्थियों को बेहतर उच्च शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराने और शासकीय महाविद्यालयों की अधोसंरचना मजबूत करने के उद्देश्य से सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं। साईं खेड़ा के शासकीय महाविद्यालय के लिए भी लगभग 8 करोड़ रुपये की लागत से नवनिर्मित बहुमंजिला भवन तैयार किया गया, जिसका उद्घाटन हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा वर्चुअली तथा उच्च शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह की मौजूदगी में किया गया था। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही महीनों बाद भवन के मुख्य पिलर में दिखाई दे रही दरारों ने निर्माण की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

करोड़ों की राशि, फिर निर्माण में ऐसी स्थिति क्यों?

एक ओर  शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह द्वारा शिक्षा के क्षेत्र में भवन, सुविधाओं और विद्यार्थियों के लिए आवश्यक संसाधनों को उपलब्ध कराने के लिए लगातार राशि उपलब्ध कराई जा रही है, वहीं दूसरी ओर निर्माण एजेंसी और संबंधित ठेकेदार द्वारा किए गए कार्य की गुणवत्ता पर सवाल उठना पूरी व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है। यदि भवन का निर्माण मानकों के अनुरूप हुआ है तो इतनी कम अवधि में मुख्य स्ट्रक्चरल कॉलम में दरारें आने का कारण क्या है?

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि कहीं निर्माण में गुणवत्ता से समझौता तो नहीं किया गया। हालांकि इन आरोपों की वास्तविकता तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

विद्यार्थियों और स्टाफ की सुरक्षा सर्वोपरि

कॉलेज भवन में प्रतिदिन बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं एवं शिक्षक पहुंचते हैं। ऐसे में मुख्य पिलर अथवा अन्य संरचनात्मक हिस्सों में दरारें दिखाई देना सामान्य बात मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। जरूरत इस बात की है कि संबंधित विभाग तत्काल तकनीकी विशेषज्ञों से भवन का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराए और रिपोर्ट सार्वजनिक करे।

ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

सबसे बड़ा सवाल यह है कि करोड़ों रुपये की लागत से बने भवन के निर्माण के दौरान गुणवत्ता की निगरानी किस स्तर पर की गई? निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, निर्धारित मानकों, इंजीनियरिंग निरीक्षण, कार्य की माप-पुस्तिका और भुगतान प्रक्रिया की जांच हुई या नहीं—इन सभी बिंदुओं को जांच के दायरे में लाया जाना चाहिए।

यदि जांच में निर्माण कार्य में लापरवाही अथवा निर्धारित मानकों से विचलन सामने आता है, तो संबंधित ठेकेदार, निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करते हुए नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। वहीं यदि दरारें किसी तकनीकी या अन्य कारण से हैं, तो उसकी स्पष्ट जानकारी भी विद्यार्थियों और आमजन के सामने रखी जानी चाहिए।

मंत्री के प्रयासों पर भी सवाल नहीं, निर्माण की गुणवत्ता पर जवाब जरूरी

शिक्षा के लिए शासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही करोड़ों की राशि का उद्देश्य विद्यार्थियों को सुरक्षित और बेहतर शैक्षणिक वातावरण देना है। इसलिए सवाल राशि उपलब्ध कराने वाले जनप्रतिनिधियों के प्रयासों का नहीं, बल्कि उस राशि से कराए गए निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था का है।

अब देखने वाली बात यह होगी कि संबंधित विभाग इस मामले को गंभीरता से लेते हुए भवन की तकनीकी जांच कराता है या नहीं। 8 करोड़ रुपये की लागत से बने भवन में कुछ ही महीनों में सामने आई दरारें यदि निर्माण संबंधी खामी का परिणाम हैं, तो यह केवल एक भवन का मामला नहीं बल्कि विद्यार्थियों के भविष्य और सार्वजनिक धन के उपयोग से जुड़ा गंभीर विषय है।

img
Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।