एक ही बाउंड्रीवॉल के लिए दो बार राशि? साईंखेड़ा कॉलेज में पहले ₹1.06 करोड़ की स्वीकृति, फिर ₹73.10 लाख की नई मंजूरी ने खड़े किए सवाल
- bySatendra Mishra
- 05 Oct 2026, 07:26 PM
- 7 Mins
एक ही बाउंड्रीवॉल के लिए दो बार राशि?
साईंखेड़ा कॉलेज में पहले ₹1.06 करोड़ की स्वीकृति, फिर ₹73.10 लाख की नई मंजूरी ने खड़े किए सवाल
साईंखेड़ा। शासकीय महाविद्यालय साईंखेड़ा में बाउंड्रीवॉल निर्माण को लेकर अब वित्तीय स्वीकृतियों पर सवाल खड़े होने लगे हैं। उपलब्ध दस्तावेज के अनुसार जनभागीदारी समिति, शासकीय महाविद्यालय साईंखेड़ा के अध्यक्ष राकेश खेमरिया द्वारा 24 अप्रैल 2026 को कलेक्टर नरसिंहपुर को पत्र भेजकर बताया गया था कि महाविद्यालय की आवंटित भूमि का उचित सीमांकन नहीं होने के कारण बाउंड्रीवॉल का निर्माण नहीं कराया गया है।
पत्र में स्पष्ट उल्लेख है कि मध्यप्रदेश शासन द्वारा बाउंड्रीवॉल के लिए ₹1,06,51,175.46 (एक करोड़ छह लाख इक्यावन हजार एक सौ पचहत्तर रुपये छियालीस पैसे) की राशि स्वीकृत की जा चुकी है, लेकिन पत्र दिनांक तक स्वीकृत राशि से बाउंड्रीवॉल का निर्माण नहीं हुआ था। पत्र में यह भी कहा गया कि महाविद्यालय की भूमि की सुरक्षा तथा विद्यार्थियों की सुरक्षा की दृष्टि से बाउंड्रीवॉल अत्यंत आवश्यक है।
इसी बीच अब शासकीय महाविद्यालय साईंखेड़ा में बाउंड्रीवॉल निर्माण के लिए ₹73.10 लाख की नई राशि स्वीकृत किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पहले ही ₹1.06 करोड़ से अधिक की राशि इसी बाउंड्रीवॉल के लिए स्वीकृत हो चुकी थी, तो फिर दोबारा ₹73.10 लाख की राशि किस कार्य के लिए स्वीकृत की गई?
❓ उठ रहे हैं ये अहम सवाल
क्या ₹1.06 करोड़ की पूर्व स्वीकृति उसी बाउंड्रीवॉल निर्माण के लिए थी?
यदि हां, तो उस राशि से आज तक निर्माण क्यों नहीं हुआ?
पूर्व स्वीकृत राशि का वर्तमान में क्या स्टेटस है—राशि जारी हुई, लंबित है या लैप्स हुई?
क्या ₹73.10 लाख की नई स्वीकृति पूर्व स्वीकृति का संशोधित/प्रतिस्थापित प्रस्ताव है या अलग मद की राशि?
यदि पुरानी स्वीकृति अभी भी प्रभावी है तो नई राशि की आवश्यकता क्यों पड़ी?
क्या पूर्व स्वीकृति के बावजूद निर्माण न होने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों/निर्माण एजेंसी से जवाब लिया गया?
आखिर ₹1.06 करोड़ से अधिक की स्वीकृति के बाद भी कॉलेज की बाउंड्रीवॉल आज तक धरातल पर क्यों नहीं है?
मंत्री की घोषणा पर भी उठे सवाल
जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष राकेश खेमरिया द्वारा पूर्व में ही कलेक्टर को पत्र लिखकर स्वीकृत राशि और बाउंड्रीवॉल निर्माण नहीं होने का मामला सामने लाया जा चुका था। अब यदि उच्च शिक्षा/संबंधित विभाग की ओर से ₹73.10 लाख की नई स्वीकृति उसी कार्य के लिए है, तो शासन और महाविद्यालय प्रबंधन को सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करना चाहिए कि दोनों स्वीकृतियों का आपसी संबंध क्या है।
मामला भ्रष्टाचार का है या प्रशासनिक प्रक्रिया की गड़बड़ी का—यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन एक ही बाउंड्रीवॉल के लिए अलग-अलग समय पर इतनी बड़ी धनराशि की स्वीकृति और इसके बावजूद निर्माण नहीं होना निश्चित रूप से जांच और जवाबदेही का विषय है।
अब देखना यह है कि शासन और महाविद्यालय प्रबंधन ₹1.06 करोड़ की पूर्व स्वीकृति तथा ₹73.10 लाख की नई स्वीकृति का पूरा हिसाब-किताब सार्वजनिक करते हैं या नहीं।
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
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