कानपुर: ITBP जवान की माँ का हाथ काटने का मामला; 36 घंटे में पलटी रिपोर्ट, दोनों बड़े अस्पतालों पर FIR
- bySatendra Mishra
- 25 May 2026, 09:58 PM
- 10 Mins
कानपुर: ITBP जवान की माँ का हाथ काटने का मामला; 36 घंटे में पलटी रिपोर्ट, दोनों बड़े अस्पतालों पर FIR के आदेश
कानपुर। उत्तर प्रदेश के कानपुर शहर से चिकित्सा जगत और प्रशासनिक व्यवस्था को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक इंडो-तिब्बत बॉर्डर पुलिस (ITBP) के जवान की माँ का इलाज के दौरान लापरवाही के कारण दाहिना हाथ काटना पड़ा। न्याय के लिए थर्माकोल के आइस-बॉक्स में माँ का कटा हाथ लेकर 9 दिनों तक भटक रहे जवान विकास सिंह को आखिरकार सफलता मिली है।
मामले के तूल पकड़ने और आईटीबीपी (ITBP) के उच्च अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद, महज 36 घंटे के भीतर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) की पहली रिपोर्ट पलट गई है। अब कानपुर के दो बड़े अस्पतालों—कृष्णा अस्पताल और पारस अस्पताल के प्रबंधन के खिलाफ एफआईआर (FIR) दर्ज करने के सख्त आदेश जारी कर दिए गए हैं।
पीड़ित: निर्मला देवी (ITBP जवान विकास सिंह की माँ)।
आरोपी संस्थान: टाटमिल स्थित कृष्णा अस्पताल और पारस अस्पताल।
घटना: इलाज में लापरवाही के कारण 17 मई को महिला का दाहिना हाथ कलाई के पास से काटना पड़ा।
बदलाव: पहली रिपोर्ट में क्लीनचिट देने वाले स्वास्थ्य विभाग ने 36 घंटे बाद आई दूसरी रिपोर्ट में दोनों अस्पतालों को दोषी माना।
प्रशासनिक कार्रवाई: पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने दोनों अस्पतालों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए।
क्या है पूरा मामला?
जवान विकास सिंह ने कानपुर में एक नया मकान बनवाया था, जिसकी छत की पूजा के लिए उन्होंने 10 मई को अपनी माँ निर्मला देवी को गाँव से बुलाया था। अचानक माँ को सांस लेने में तकलीफ (Chest Problem) होने के कारण उन्हें टाटमिल स्थित कृष्णा अस्पताल में भर्ती कराया गया।
लापरवाही का घटनाक्रम:
- हाथ का काला पड़ना: भर्ती होने के अगले ही दिन मरीज का दाहिना हाथ काला पड़ने लगा और उसमें सूजन आ गई। डॉक्टरों ने इसे सामान्य बताते हुए एक-दो दिन में ठीक होने का दावा किया, लेकिन धीरे-धीरे हाथ में फफोले पड़ गए।
- बिना सर्जन की सलाह के डिस्चार्ज: कृष्णा अस्पताल में महिला की गंभीर स्थिति होने के बावजूद किसी वैस्कुलर सर्जन (Vascular Surgeon) को नहीं दिखाया गया और मरीज को दूसरे अस्पताल जाने दिया गया।
- हाथ काटने की नौबत: स्थिति बिगड़ने पर 14 मई की रात मरीज को पारस अस्पताल में शिफ्ट किया गया। लेकिन तब तक संक्रमण (Infection) इतना बढ़ चुका था कि डॉक्टरों को 17 मई को महिला का दाहिना हाथ कलाई के पास से काटना पड़ा।
36 घंटे के भीतर कैसे पलटी जांच रिपोर्ट?
शुरुआत में स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन के स्तर पर जवान को भारी उपेक्षा का सामना करना पड़ा। रेल बाजार थाना और सीएमओ कार्यालय के चक्कर काटने के बाद भी जब सुनवाई नहीं हुई, तो मजबूरन जवान अपनी माँ का कटा हुआ हाथ आइस-बॉक्स में लेकर सीधे पुलिस आयुक्त कार्यालय जा पहुँचा।
- पहली रिपोर्ट (क्लीनचिट): पुलिस आयुक्त के निर्देश पर सीएमओ द्वारा गठित डॉक्टरों की टीम ने पहले दोनों अस्पतालों को क्लीनचिट दे दी थी। इस रिपोर्ट को बेहद 'गोलमोल' और संभावनाओं पर आधारित माना गया, जिसमें डॉक्टरों को बचाने का प्रयास साफ दिख रहा था।
- ITBP अधिकारियों की एंट्री और दूसरी जांच: जवान के समर्थन में जब लखनऊ से लाइजनिंग अफसर अर्पित कुमार और कमांडेंट के साथ साथी जवान पुलिस दफ्तर पहुंचे, तो प्रशासनिक अमला हरकत में आया। रविवार को दोबारा हुई जांच में डॉक्टरों के बयान दर्ज किए गए।
- खुलासा: दोबारा हुई जांच में सामने आया कि मरीज की नसों में खून का थक्का जमने (Thromboembolism) से प्रेशर बढ़ रहा था। यदि समय रहते वैस्कुलर सर्जन की सलाह लेकर हाथ में एक छोटा कट लगा दिया जाता, तो हाथ काटने की नौबत ही नहीं आती।
अस्पतालों पर गंभीर आरोप
आईटीबीपी के लाइजनिंग अफसर अर्पित कुमार ने बताया कि कृष्णा अस्पताल पहले आईटीबीपी के पैनल (कैशलेस इलाज) में शामिल था। लेकिन पूर्व में भी दो जवानों की लापरवाही से हुई मौत के बाद इस अस्पताल को पैनल से हटा दिया गया था। इसके अलावा, यह भी सामने आया है कि क्षेत्र के कई निजी अस्पतालों के बोर्ड पर नामचीन डॉक्टरों के नाम लिखे होते हैं, जबकि धरातल पर मौके पर कोई विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध नहीं रहता।
अस्पताल प्रबंधन का पक्ष:
कृष्णा अस्पताल के योगेंद्र यादव ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि उनके यहाँ महिला के केवल चेस्ट (सीने) का इलाज हुआ था। हाथ की समस्या उनके अस्पताल में नहीं हुई थी और उनके यहाँ सर्जनों की टीम हमेशा उपलब्ध रहती है।
आगामी कदम
पीड़ित महिला के दूसरे बेटे आकाश सिंह (रोडवेजकर्मी) ने बताया कि फिलहाल उनकी माँ के स्वास्थ्य में सुधार है और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज किया जा सकता है। उन्होंने साफ किया कि यदि इस मामले में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं हुई, तो वे न्याय के लिए मुख्यमंत्री के जनता दरबार में गुहार लगाएंगे। फिलहाल, पुलिस आयुक्त के आदेश के बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन दोनों अस्पतालों पर कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी में
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
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