एनटीपीसी के प्रदूषण और 'ट्रालों' के तांडव से जनजीवन त्रस्त
- bySatendra Mishra
- 31 Dec 2025, 01:17 PM
- 5 Mins
विकास की चमक या विनाश का धुआं? एनटीपीसी के प्रदूषण और 'ट्रालों' के तांडव से जनजीवन त्रस्त
गाडरवारा विधानसभा क्षेत्र में स्थित एनटीपीसी (NTPC) संयंत्र आज स्थानीय लोगों के लिए वरदान के बजाय अभिशाप बनता जा रहा है। संयंत्र से निकलने वाली राख और सड़कों पर दौड़ते अनियंत्रित ट्रालों ने पूरे क्षेत्र में 'तांडव' मचा रखा है। आलम यह है कि गाडरवारा शहर से लेकर दूर-दराज के गांवों तक लोगों का सांस लेना दूभर हो गया है।
राख के गुबार ने छीनी स्वच्छ हवा
क्षेत्र के ग्रामीणों का आरोप है कि एनटीपीसी से निकलने वाली 'फ्लाई ऐश' (राख) हवा में घुलकर जहर बन रही है। हवा के साथ उड़कर यह राख लोगों के घरों, किचन और यहां तक कि फेफड़ों तक पहुंच रही है। बच्चों और बुजुर्गों में सांस की बीमारियां, अस्थमा और आंखों में जलन की समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। प्रदूषण की काली चादर ने पूरी विधानसभा क्षेत्र के पर्यावरण को अपनी चपेट में ले लिया है।
सड़कों पर मौत बनकर दौड़ रहे भारी वाहन
एनटीपीसी से जुड़े भारी ट्रालों और डंपरों ने सड़कों पर दहशत का माहौल बना दिया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि:
तेज रफ्तार और लापरवाही: ये वाहन बिना किसी ढके या सुरक्षा मानकों के राख और सामग्री लेकर तेज रफ्तार से दौड़ते हैं।
बदहाल सड़कें: इन भारी वाहनों के भार से सड़कें जर्जर हो चुकी हैं, जिससे आम वाहन चालकों के लिए निकलना दूभर हो गया है।
दुर्घटनाओं का केंद्र: आए दिन होने वाली छोटी-बड़ी दुर्घटनाओं ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है। प्रशासन की ओर से इन ट्रालों की गति सीमा या समय निर्धारण पर कोई सख्त कार्रवाई नहीं दिख रही है।
किसानों की बदहाली और प्रशासनिक चुप्पी
प्रदूषण का सीधा असर फसलों पर भी पड़ रहा है। खेतों में राख की परत जमने से पैदावार घट रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और एनटीपीसी प्रबंधन को बार-बार अवगत कराने के बावजूद, समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। सीएसआर (CSR) के नाम पर औपचारिकताएं तो पूरी की जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर जनता केवल धूल और धुआं फांकने को मजबूर है।
आक्रोश की सुगबुगाहट
यदि समय रहते प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं पाया गया और ट्रालों की आवाजाही को व्यवस्थित नहीं किया गया, तो क्षेत्र में बड़ा जन-आंदोलन खड़ा हो सकता है। जनता अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्वच्छ हवा और सुरक्षित सड़कों की मांग कर रही है।
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
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