रेत माफिया के पक्ष में खड़ा मीडिया भास्कर MP.COM NEWS 24*7 अवैध खनन की खबरों पर उठाई मीडिया जगत पर उंगली

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रेत माफिया के पक्ष में खड़ा मीडिया भास्कर MP.COM NEWS 24*7

अवैध खनन की खबरों पर उठाई मीडिया जगत पर उंगली

 

गाडरवारा। चीचली में रेत माफिया और अवैध कारोबारियों के खिलाफ जैसे ही दैनिक समाचार पत्रों में अवैध उत्खनन रोकने से जुड़ी खबरें प्रकाशित हुईं, वैसे ही कुछ मीडिया प्लेटफॉर्मों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं। इन्हीं सवालों के केंद्र में भास्कर MP.COM NEWS 24*7 और उसके स्थानीय संवाददाता व टीम आ गई है।

आरोप है कि अवैध रेत खनन माफिया की पोल खुलते ही, उनके समर्थक माने जा रहे कुछ चैनल भास्कर MP.COM NEWS 24*7 अब माफिया पर सवाल उठाने के बजाय अपने ही मीडिया जगत और पत्रकारों पर उंगली उठा रहे हैं। यह रवैया न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि मीडिया की निष्पक्षता पर भी सीधा प्रहार करता है।

*खबर से बौखलाहट या कुछ और?*

सूत्रों के अनुसार, जब स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर के समाचार पत्रों में अवैध उत्खनन, प्रशासनिक लापरवाही और रेत माफिया के नेटवर्क को उजागर करने वाली खबरें सामने आईं, उसी के बाद भास्कर MP.COM NEWS 24*7 द्वारा इन खबरों पर सवाल खड़े किए गए। इस कदम से यह संदेह और गहराता है कि क्या यह प्रतिक्रिया माफिया के हितों की रक्षा में दी गई?

*जहां कमाई, वहां चुप्पी—जहां कमाई नहीं, वहां खबर?*

स्थानीय पत्रकारों और मीडिया जानकारों का कहना है कि भास्कर MP.COM NEWS 24*7 के यूट्यूब चैनल पर रायसेन एवं अन्य क्षेत्रों से जुड़े अवैध खनन की खबरें जरूर चलाई गई हैं, लेकिन उन स्थानों पर जहां से कथित तौर पर आर्थिक लाभ नहीं होता। वहीं, जिन इलाकों में अवैध रेत कारोबार से मोटी कमाई होने की चर्चाएं हैं, वहां या तो खबरें गायब रहती हैं या फिर उन्हीं पत्रकारों पर हमला किया जाता है जो सच्चाई सामने ला रहे हैं।

*मीडिया पर मीडिया का हमला—किसके इशारे पर?*

यह पहला मौका नहीं है जब अवैध कारोबारियों के खिलाफ खबरें सामने आने पर किसी मीडिया संस्थान ने माफिया से जुड़े मुद्दे से ध्यान भटकाने की कोशिश की हो। लेकिन इस पूरे प्रकरण में सबसे गंभीर सवाल यह है कि क्या कुछ स्थानीय संवाददाता और उनकी टीमें रेत माफिया और अवैध कारोबारियों से कथित तौर पर मोटी कमाई कर रही हैं? यदि ऐसा नहीं है, तो फिर अवैध उत्खनन के खिलाफ लिखी गई खबरों पर हमला क्यों? 

*पत्रकारिता की साख दांव पर*

पत्रकारिता का मूल उद्देश्य सत्ता, माफिया और अवैध तंत्र पर सवाल उठाना होता है—न कि उन्हें ढाल उपलब्ध कराना। आज जब रेत माफिया के खिलाफ लिखने वाले पत्रकार दबाव, धमकी और बदनाम करने की साजिशों का सामना कर रहे हैं, तब किसी मीडिया संस्थान द्वारा उन्हीं पर सवाल उठाना मीडिया की साख को कठघरे में खड़ा करता है।

*जांच की मांग*

इस पूरे मामले को लेकर स्वतंत्र पत्रकारों, प्रेस संगठनों और प्रशासन से मांग उठ रही है कि भास्कर MP.COM NEWS 24*7 के स्थानीय संवाददाताओं की भूमिका की निष्पक्ष जांच हो, यह स्पष्ट किया जाए कि अवैध रेत कारोबार से जुड़े तत्वों से उनका कोई संबंध तो नहीं और मीडिया की आड़ में माफिया संरक्षण देने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।