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नगर की धरोहर पर खुला राजनीतिक कब्ज़ा ओशो की पावन धरा के स्वागत गेट को प्रचार मंच बनाकर नियमों की धज्जियां

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नगर की धरोहर पर खुला राजनीतिक कब्ज़ा

ओशो की पावन धरा के स्वागत गेट को प्रचार मंच बनाकर नियमों की धज्जियां

गाडरवारा। नगर की पहचान और गौरव का प्रतीक ओशो की पावन धरा – गाडरवारा का मुख्य स्वागत गेट आज राजनीतिक प्रचार का अड्डा बन चुका है। नगर पालिका परिषद गाडरवारा द्वारा स्टेट हाईवे–22 पर लाखों रुपये की लागत से निर्मित इस भव्य स्वागत गेट को खुलेआम राजनीतिक बैनरों से ढक दिया गया है। यह कृत्य न केवल नगर पालिका अधिनियम बल्कि सार्वजनिक संपत्ति विरूपण निवारण कानून का भी सीधा और निर्लज्ज उल्लंघन है।राजनीतिक चेतना यात्रा समाप्त हुए पंद्रह दिनों से अधिक समय बीत चुका है, इसके बावजूद बैनर जस के तस लगे हुए हैं। यह स्थिति किसी सामान्य लापरवाही का परिणाम नहीं बल्कि राजनीतिक संरक्षण में पनप रही प्रशासनिक उदासीनता का स्पष्ट प्रमाण है। सार्वजनिक संपत्ति को निजी और दलगत प्रचार के लिए उपयोग में लेना स्थानीय प्रशासन की विफलता और निष्क्रियता को उजागर करता है।

*प्रशासनिक मौन और नगर पालिका की निष्क्रियता*
डमरू घाटी मेला, महाशिवरात्रि जैसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के दौरान जिला प्रशासन, नगर पालिका और विभिन्न विभागों के अधिकारियों का इसी मार्ग से लगातार आवागमन होता रहा। इसके बावजूद स्वागत गेट पर लटके राजनीतिक बैनर किसी को दिखाई नहीं दिए। यह मौन साधारण संयोग नहीं बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की जानबूझकर की गई अनदेखी और संरक्षणकारी रवैये को दर्शाता है।

*नगर की गरिमा का अपमान*
ओशो की पावन धरा के नाम से निर्मित स्वागत गेट केवल एक ढांचा नहीं बल्कि गाडरवारा की सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक है। इस धरोहर को राजनीतिक पोस्टरों से ढक देना नगर के सम्मान, नागरिक चेतना और सामूहिक अस्मिता का खुला अपमान है। सार्वजनिक स्थलों को दलगत प्रचार का माध्यम बनाना नगर की छवि को लगातार धूमिल कर रहा है।

*कानून का खुला उल्लंघन*
सार्वजनिक भवनों, स्वागत द्वारों और शासकीय संरचनाओं पर राजनीतिक बैनर लगाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। न तो किसी अनुमति का कोई रिकॉर्ड सामने आया और न ही हटाने की कोई ठोस कार्रवाई की गई। यह स्थिति साबित करती है कि नियम-कानून अब केवल कागज़ों तक सीमित रह गए हैं और प्रभावशाली राजनीतिक तत्वों के सामने प्रशासन पूरी तरह नतमस्तक दिखाई दे रहा है।

*दिखावे की कार्रवाई और असली चुप्पी*
नगर पालिका परिषद की गाड़ियां पूरे नगर में प्रचार और फोटो खिंचवाने के लिए घूमती नजर आती हैं। नगर पालिका कर्मचारी स्टेशन रोड और छोटे मार्गों पर होर्डिंग हटाकर दिखावटी कार्रवाई करते दिखाई देते हैं। लेकिन नगर के मुख्य प्रवेश मार्ग पर स्थित ओशो की पावन धरा के स्वागत गेट को राजनीतिक बैनरों से ढक दिया गया, यह जिम्मेदारों की नजर में नहीं आता।

*जवाबदेही तय होना अनिवार्य*
इस पूरे प्रकरण में राजनीतिक प्रचार कराने वालों, बैनर लगाने वालों और नगर पालिका परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों की सामूहिक जवाबदेही तय होना अनिवार्य है। जब सार्वजनिक संपत्ति पर खुलेआम कब्ज़ा होता है और प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है, तब यह व्यवस्था के पतन और लोकतांत्रिक मूल्यों के क्षरण का प्रत्यक्ष प्रमाण बन जाता है। नगर की धरोहर पर यह राजनीतिक कब्ज़ा केवल नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि गाडरवारा के स्वाभिमान पर सीधा प्रहार है।

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।