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पेयजल संकट से त्रस्त ग्रामीणों का बड़ा फैसला: नरसिंहपुर के बिजोरा गांव में नेताओं की 'नो-एंट्री', 'पानी नहीं तो वोट नहीं' का नारा बुलंद

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​पेयजल संकट से त्रस्त ग्रामीणों का बड़ा फैसला: नरसिंहपुर के बिजोरा गांव में नेताओं की 'नो-एंट्री', 'पानी नहीं तो वोट नहीं' का नारा बुलंद

नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के  बिजोरा गांव से ग्रामीण आक्रोश की एक बड़ी खबर सामने आ रही है। भीषण पेयजल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों ने प्रशासन और राजनीतिक दलों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बुधवार रात आयोजित एक ग्राम सभा में ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित कर आगामी सभी चुनावों के बहिष्कार का सामूहिक निर्णय लिया है। ग्रामीणों का साफ कहना है—"अब पानी नहीं, तो वोट नहीं।"

​चुनावों का पूर्ण बहिष्कार और नेताओं के प्रवेश पर प्रतिबंध

​ग्राम सभा में लिए गए निर्णय के अनुसार, जब तक बिजोरा गांव में नर्मदा नदी का जल नहीं पहुंच जाता, तब तक ग्रामीण पंचायत चुनाव से लेकर लोकसभा चुनाव तक किसी भी मतदान में हिस्सा नहीं लेंगे।

​इसके साथ ही, ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि समस्या का स्थायी समाधान होने तक गांव की सीमाओं में किसी भी राजनीतिक दल के नेता का प्रवेश पूरी तरह वर्जित रहेगा। ग्रामवासियों ने यह भी तय किया है कि वे अपने किसी भी निजी या सार्वजनिक कार्यक्रम में राजनीतिक हस्तियों को आमंत्रित नहीं करेंगे। अब गांव की गलियों में नेताओं के बैनर-पोस्टर की जगह 'नर्मदा जल' की मांग वाले पोस्टर और ग्रामीणों की एकजुटता दिखाई दे रही है।

​हैंडपंपों से निकल रही सिर्फ हवा, जो पानी बचा वह दूषित

​गांव में जल संकट की स्थिति बेहद गंभीर हो चुकी है। ग्रामीणों के अनुसार:

  • सूखते हैंडपंप: भूजल स्तर (Groundwater level) अत्यधिक गिरने के कारण अधिकांश हैंडपंप पूरी तरह सूख चुके हैं। अब उनसे पानी की जगह सिर्फ हवा निकल रही है।
  • दूषित जल का खतरा: जहां कहीं थोड़ा-बहुत पानी उपलब्ध भी है, वह लाल-पीला और अत्यधिक दूषित है। इस मजबूरी के पानी को पीने के कारण ग्रामीण लगातार बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।

​प्रशासनिक अनदेखी से बढ़ा आक्रोश

​ग्रामीणों का आरोप है कि इस विकट समस्या को लेकर प्रशासन को बार-बार अवगत कराया गया है। सेवानिवृत्त शिक्षक वृंदावन पटेल और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने 'लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग' (PHE) को कई बार लिखित शिकायतें सौंपी हैं। इसके बावजूद प्रशासन की ओर से केवल खोखले आश्वासन ही मिले हैं, धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसी प्रशासनिक अनदेखी और झूठे वादों से नाराज होकर ग्रामीणों को आंदोलन का यह कड़ा रास्ता चुनना पड़ा है।

​ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि पानी उनका मौलिक अधिकार और मूलभूत आवश्यकता है, और वे अपने इस जल अधिकार के लिए आंदोलन को लगातार जारी रखेंगे

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।