नरसिंहपुर: डॉक्टर पर गलत इलाज से मौत का आरोप, 8 महीने बाद भी जांच शून्य; क्या स्वास्थ्य विभाग बचा रहा है आरोपी को?
- bySatendra Mishra
- 20 May 2026, 11:36 AM
- 7 Mins
नरसिंहपुर: डॉक्टर पर गलत इलाज से मौत का आरोप, 8 महीने बाद भी जांच शून्य; क्या स्वास्थ्य विभाग बचा रहा है आरोपी को?
नरसिंहपुर। जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था और प्रशासनिक न्याय प्रणाली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। एक पीड़ित महिला पिछले आठ महीनों से अपने पति की मौत के मामले में न्याय के लिए भटक रही है, लेकिन ज़िला स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन मौन साधे बैठा है। मामला गाडरवारा तहसील के देवरी की रहने वाली प्रीति बाई नाथ का है, जिन्होंने कलेक्टर कार्यालय में शिकायत सौंपकर डॉ. पंकज थारवानी पर गलत इलाज करने और उसके कारण पति की जान जाने का संगीन आरोप लगाया है।
हैरानी की बात यह है कि जनसुनवाई में लिखित शिकायत दर्ज होने के बावजूद आज दिनांक तक इस मामले में कोई ठोस जांच शुरू नहीं हो पाई है। पीड़ित पक्ष का सीधा सवाल है कि आखिर जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पंकज थारवानी को क्यों बचा रहे हैं?
क्या है पूरा मामला?
शिकायत पत्र के अनुसार, देवरी निवासी प्रीति बाई नाथ दिनांक 02 अक्टूबर 2024 को अपने पति स्वर्गीय सुनील कुमार नाथ को इलाज के लिए डॉ. पंकज थारवानी के निजी क्लिनिक लेकर गई थीं। आरोप है कि वहां डॉक्टर द्वारा मरीज को बॉटल और इंजेक्शन लगाए गए, जिसके तुरंत बाद मरीज की हालत बेहद गंभीर रूप से बिगड़ गई।
मरीज की नाजुक स्थिति को देखते हुए परिजन उन्हें आनन-फानन में नागपुर ले गए, लेकिन वहां इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। पीड़ित परिवार का स्पष्ट आरोप है कि डॉ. पंकज थारवानी द्वारा किए गए गलत और लापरवाह इलाज के कारण ही सुनील कुमार नाथ की अकाल मृत्यु हुई।
जनसुनवाई के 8 महीने बाद भी न्याय से कोसों दूर परिवार
इस घटना के बाद पीड़ित पत्नी प्रीति बाई नाथ ने 16 सितंबर 2025 को कलेक्टर कार्यालय, नरसिंहपुर की जनसुनवाई में पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई थी। उनके आवेदन को 'जनसुनवाई' के तहत दर्ज भी किया गया (जिसका प्रमाण पत्र पर लगी मुहर है)।
परंतु, आज मई 2026 आ चुका है—इस शिकायत को दर्ज हुए पूरे 8 महीने बीत चुके हैं और घटना को डेढ़ साल से अधिक का समय हो गया है, लेकिन धरातल पर जांच के नाम पर नतीजा सिफ़र (शून्य) है।
खड़े होते हैं ये तीखे सवाल:
- प्रशासनिक सुस्ती या मिलीभगत?: जनसुनवाई के मामलों पर त्वरित कार्रवाई का दावा करने वाला प्रशासन आठ महीनों तक एक पीड़ित महिला के आवेदन पर कुंडली मारकर क्यों बैठा रहा?
- स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी क्यों?: जिला स्वास्थ्य अधिकारी और संबंधित जांच कमेटी ने अब तक डॉ. पंकज थारवानी के खिलाफ जांच शुरू क्यों नहीं की? क्या रसूखदार डॉक्टरों को बचाने के लिए विभागीय स्तर पर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है?
- कहाँ गया 'न्याय'?: एक गरीब और बेसहारा महिला, जिसने अपने पति को खो दिया, वह न्याय के लिए और कितने चक्कर काटेगी?
उचित और निष्पक्ष जांच की मांग
पीड़ित परिवार और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले को ठंडे बस्ते से निकालकर तत्काल एक निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कमेटी गठित की जाए। आरोपी डॉक्टर के क्लिनिक के रिकॉर्ड खंगाले जाएं और यदि लापरवाही सिद्ध होती है, तो अनावेदक के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
यदि स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन अब भी नहीं जागा, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि तंत्र आम जनता के बजाय रसूखदारों के हितों की रक्षा करने में व्यस्त है।
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
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