महिला सशक्तिकरण और उनकी सुरक्षा महिला की सर्वोच्च प्राथमिकता- मप्र राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती साधना स्थापक महिलाओं और बालिकाओं के गायब (लापता) होने के मामलों पर त्वरित एवं कड़े कदम उठाने के निर्देश बैठक में महिलाओं और बालिकाओं से जुड़े विभिन्न ग
- bySatendra Mishra
- 22 May 2026, 04:51 PM
- 10 Mins
महिला सशक्तिकरण और उनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता- मप्र राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती साधना स्थापक
महिलाओं और बालिकाओं के गायब (लापता) होने के मामलों पर त्वरित एवं कड़े कदम उठाने के निर्देश
बैठक में महिलाओं और बालिकाओं से जुड़े विभिन्न गंभीर मुद्दों पर की समीक्षा
मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य (राज्य मंत्री दर्जा) श्रीमती साधना स्थापक की अध्यक्षता में गुरूवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक में उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण और उनकी सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ काम कर अंतिम छोर पर खड़ी महिला तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुँचे। बैठक में उन्होंने महिलाओं व बालिकाओं की सुरक्षा, उनके स्वास्थ्य, स्वावलंबन और अधिकारों से जुड़े विभिन्न गंभीर मुद्दों पर बिंदुआवार विस्तृत समीक्षा कर अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
बैठक में कलेक्टर श्रीमती रजनी सिंह, पुलिस अधीक्षक डॉ. ऋषिकेश मीणा, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्री गजेंद्र सिंह नागेश, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री संदीप भूरिया, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष कुमार मिश्रा, जिला कार्यक्रम अधिकारी श्री राधेश्याम वर्मा एवं सहायक संचालक सुश्री प्रांजली मर्सकोले सहित अन्य अधिकारी मौजूद थे।
राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती स्थापक ने जिले से महिलाओं और बालिकाओं के गायब (लापता) होने के मामलों पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को त्वरित और कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए। इस संबंध में पुलिस प्रशासन द्वारा लापता बच्चों की दस्तयाबी के लिए चलाए जा रहे "ऑपरेशन मुस्कान" की समीक्षा की। इसके साथ ही पुलिस प्रशासन द्वारा चलाए जा रहे 'ऑपरेशन अपराजिता' के अंतर्गत स्कूलों और विभिन्न स्तरों पर बच्चों को "बैड टच और गुड टच" के बारे में जागरूक करने और आवश्यक जानकारी देने के निर्देश दिए गए। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार करने पर ज़ोर दिया, ताकि समाज में जागरूकता बढ़े और बालिकाओं के लिंगानुपात व शिक्षा की स्थिति में सुधार हो।
राज्य महिला आयोग की सदस्य श्रीमती साधना स्थापक ने प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के क्रियान्वयन में आधार कार्ड और बैंक खाता लिंक होने संबंधी आ रही तकनीकी समस्याओं को तत्काल दूर करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र महिलाओं को समय पर इस योजना का लाभ मिल सके। बैठक में स्वास्थ्य और संस्थागत प्रसव के संबंध में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष कुमार मिश्रा ने रिपोर्ट प्रस्तुत की, जिसमें एक बड़ी उपलब्धि सामने आई। पिछले 5-6 महीनों में जिले के मातृ मृत्यु अनुपात में भारी गिरावट दर्ज की गई है। पूर्व में जहाँ एमएआर का आंकड़ा 176 हुआ करता था, वहीं प्रभावी प्रयासों के चलते यह घटकर अब 104 पर आ गया है, जो राज्य के औसत एमएमआर (170) की तुलना में बहुत बेहतर और सराहनीय स्थिति है। इसके साथ ही गैर-संस्थागत प्रसव को पूरी तरह रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा ग्राउंड लेवल स्टाफ आशा एवं एएनएम को विशेष ट्रेनिंग दी जा रही है, ताकि महिलाओं के प्रसव से ठीक पहले दी जाने वाली तत्काल सहायता को और मजबूत किया जा सके।
बैठक में श्रीमती स्थापक ने महिला उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और दहेज संबंधी मामलों की समीक्षा की। पीड़िता को न्याय दिलाने और ऐसे अपराधियों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही "वन स्टॉप सेंटर" पर पीड़ित महिलाओं को निःशुल्क विधिक (कानूनी) सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए। जेल से रिहा हुई महिलाओं को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर (स्वावलंबी) बनाने के प्रयासों पर चर्चा की। एमएसएमई योजना का लाभ अधिक से अधिक महिलाओं तक पहुँचाने के लिए रणनीति बनाई गई। सीईओ जिला पंचायत श्री गजेन्द्र सिंह नागेश ने बताया कि एक बगिया मां के नाम परियोजना के तहत ज़िले को 610 का लक्ष्य प्राप्त हुआ था, जिसे सफलतापूर्व शत-प्रतिशत पूर्ण कर लिया गया है। श्रीमती स्थापक ने इस उपलब्धि की सराहना की। उन्होंने स्वसहायता समूहों द्वारा किए जा रहे शहद उत्पादन कार्य को बढ़ावा देने और उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर बल दिया। श्रीमती स्थापक ने स्वाधार गृह की महिलाओं की आवश्यकताओं और उनकी वर्तमान स्थिति को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने ज़ोर देते हुए कहा कि संकटग्रस्त और बेसहारा महिलाओं के संरक्षण के लिए स्वाधार गृह की सुचारू व्यवस्था होना अत्यंत आवश्यक है। इस संबंध में उन्होंने त्वरित कार्रवाई करते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग से नए और बेहतर स्वाधार गृह स्थापित करने हेतु आवश्यक प्रस्ताव तत्काल मंगवाए है। पारिवारिक विवादों को सुलझाने और घरों को टूटने से बचाने के लिए परिवार परामर्श केंद्रों के सुचारू संचालन और उनकी भूमिका को और मजबूत करने के निर्देश दिए गए। माननीय सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के अनुरूप (कार्यस्थल पर लैंगिक उत्पीड़न रोकने हेतु) कमेटियों के गठन की स्थिति की समीक्षा की गई।
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
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