गाडरवारा मंडी की शर्मनाक बदइंतजामी: टीन शेड के नीचे ही पानी-पानी हुई किसानों की उपज,

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गाडरवारा मंडी की शर्मनाक बदइंतजामी: टीन शेड के नीचे ही पानी-पानी हुई किसानों की उपज, अन्नदाता की मेहनत पर फिरी प्रशासन की लापरवाही

गाडरवारा (नरसिंहपुर)।

बुधवार की दोपहर अचानक बदले मौसम और तेज आंधी के साथ हुई मूसलाधार बारिश ने स्थानीय जवाहर कृषि उपज मंडी प्रशासन के दावों की पोल खोल कर रख दी है। इस बारिश ने जहाँ एक तरफ आम जनता को भीषण गर्मी से राहत दी, वहीं दूसरी तरफ अपनी खून-पसीने की कमाई बेचने आए सैकड़ों किसानों के लिए यह आफत का सबब बन गई। मंडी प्रशासन की घोर लापरवाही के चलते खुले आसमान और तथाकथित 'टीन शेड' के नीचे रखी किसानों की कीमती फसल पूरी तरह भीगकर बर्बाद हो गई।

झरने की तरह टपका पानी टीन शेड मंडी में मची अफरा-तफरी

​प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों के अनुसार, मंडी परिसर में लाखों-करोड़ों की लागत से बने टीन शेड केवल नाम मात्र के साबित हुए। तेज बारिश के दौरान शेड की छतों से पानी इस कदर टपक रहा था मानो कोई झरना बह रहा हो। देखते ही देखते मंडी परिसर टापू में तब्दील हो गया और अनाज के बड़े-बड़े ढेरों के बीच पानी की तेज धाराएं बहने लगीं।

​अचानक हुई इस बारिश और बदइंतजामी से निपटने के लिए किसानों के पास पर्याप्त त्रिपाल या साधन नहीं थे। नतीजतन, अन्नदाता का कीमती अनाज पानी में तैरता नजर आया। इस अप्रत्याशित तबाही के बाद मंडी परिसर में किसानों और हम्मालों के बीच अफरा-तफरी और चीख-पुकार का माहौल निर्मित हो गया।

करोड़ों का टैक्स वसूलने वाले प्रशासन पर उठे गंभीर सवाल

​पीड़ित किसानों ने रोष व्यक्त करते हुए कहा कि मंडी प्रशासन हर साल किसानों की सुरक्षा, छांव और अनाज के रख-रखाव के नाम पर लाखों-करोड़ों रुपए का टैक्स (मंडी शुल्क) वसूलता है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि एक सामान्य बारिश भी यहाँ की व्यवस्थाओं को ध्वस्त कर देती है।

पीड़ित किसान का बयान:

"हम कई दिनों तक खेतों में जागकर, मेहनत से उगाई फसल को उचित दाम की उम्मीद में मंडी लेकर आए थे। लेकिन यहाँ की बदइंतजामी ने हमें सड़क पर लाकर खड़ा कर दिया है। अब इस गीले अनाज को व्यापारी या तो औने-पौने दामों में खरीदेंगे या सीधे रिजेक्ट कर देंगे।"


 

आर्थिक संकट में अन्नदाता, 

​इस लापरवाही के कारण किसानों को लाखों रुपए का सीधा आर्थिक नुकसान हुआ है। अब बड़ा सवाल यह उठता है कि:

  1. ​क्या दोषी और लापरवाह मंडी अधिकारियों पर कोई कड़ी दंडात्मक कार्रवाई होगी?
  2. ​या हर बार की तरह इस बार भी इस प्रशासनिक नाकामी की कीमत गरीब किसान को अपनी जेब से चुकानी पड़ेगी?

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।