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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना: 3.35 करोड़ की कौड़िया-लिलवानी सड़क दो साल में ही हुई खस्ताहाल

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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना: 3.35 करोड़ की कौड़िया-लिलवानी सड़क दो साल में ही हुई खस्ताहाल

जांच टीम के सामने ग्रामीणों ने खोला मोर्चा, अधिकारियों ने साधी चुप्पी; डामर की रोड पर सीमेंट के 'कच्चे मसाले' से लीपापोती

नरसिंहपुर।

ग्रामीणों को बेहतर आवागमन की सुविधा देने के उद्देश्य से बनाई गई प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना भ्रष्टाचार और कछुआ गति कार्यप्रणाली का शिकार हो चुकी है। मामला कौड़िया से लिलवानी मार्ग (पैकेज क्रमांक: MP 26706) का है, जहाँ मात्र दो साल के भीतर ही करोड़ों की लागत से बनी सड़क जगह-जगह से उखड़कर गहरे गड्ढों में तब्दील हो चुकी है।

गड्ढे भरने के नाम पर बड़ा मज़ाक

​ग्रामीणों का आरोप है कि डामर (दामल) की बनी इस सड़क पर जब बड़े-बड़े गड्ढे हो गए, तो ठेकेदार द्वारा तकनीकी नियमों को ताक पर रखकर डामर की जगह सीमेंट के 'कच्चे मसाले' से गड्ढों को भरने का काम किया गया। वह भी पूरी सड़क पर नहीं, बल्कि महज़ कुछ चुनिंदा जगहों पर औपचारिकता पूरी कर ली गई। डामर रोड पर सीमेंट का पैचवर्क कितना टिकेगा, यह अपने आप में बड़ा सवाल है।

जांच टीम के सामने फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, अधिकारी मौन

​आज जब इस बदहाल सड़क की हकीकत जानने के लिए एक विभागीय जांच टीम मौके पर पहुँची, तो वहाँ भारी संख्या में ग्रामीण एकत्र हो गए। ग्रामीणों ने जांच टीम के सामने सड़क निर्माण और उसकी गुणवत्ता को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराईं। लोगों ने ठेकेदार और स्थानीय प्रबंधन के बीच साठगांठ के आरोप भी लगाए।

ग्रामीणों का कहना है: "करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी हमें गड्ढों वाली सड़क पर चलना पड़ रहा है। ठेकेदार केवल कागजी खानापूर्ति कर रहा है।"


​हैरानी की बात यह रही कि ग्रामीणों द्वारा मौके पर इतनी शिकायतें और सबूत दिखाए जाने के बावजूद, जांच के लिए आए अधिकारियों के 'कान पर जूं तक नहीं रेंगा'। अधिकारियों ने ग्रामीणों की जायज आपत्तियों को गंभीरता से लेने के बजाय चुप्पी साधे रखना ही बेहतर समझा।

 

  • मार्ग का नाम: कौड़िया से लिलवानी (लंबाई- 7.35 कि.मी.)
  • लागत: ₹3,35,89,100
  • ठेकेदार: मेसर्स मदनलाल एण्ड पार्टनर्स कं. करेली
  • गारंटी कार्य पूर्णता तिथि:  नवंबर 2030
  • लापरवाही: डामर की सड़क पर सीमेंट के कच्चे मसाले से लीपापोती।

​अब देखना यह होगा कि इस जांच के बाद वरिष्ठ अधिकारी संबंधित ठेकेदार और गैर-जिम्मेदार कर्मचारियों पर क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर ग्रामीण इसी तरह जान जोखिम में डालकर इन गड्ढों से गुजरने को मजबूर रहेंगे।

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।