Follow Us:

नरसिंहपुर स्वास्थ्य विभाग में हाहाकार: भ्रष्टाचार, लापरवाही के 10 संगीन मामलों ने खोली सरकारी दावों की पोल; जांच के नाम पर लीपापोती

1000101475

BREAKING NEWS

नरसिंहपुर स्वास्थ्य विभाग में हाहाकार: भ्रष्टाचार, लापरवाही और मौतों के 10 संगीन मामलों ने खोली सरकारी दावों की पोल; जांच के नाम पर लीपापोती से जनता में भारी आक्रोश

नरसिंहपुर:

नरसिंहपुर जिले के शासकीय अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में लाचार मरीजों की जिंदगी खिलौना बनकर रह गई है। इलाज के नाम पर हो रही मौतों, सुरक्षा गार्डों द्वारा मरीजों को इंजेक्शन ठोंकने और भ्रष्टाचार के दलदल में धंसे प्रशासनिक तंत्र के खिलाफ जनता का गुस्सा चरम पर पहुंच गया है। स्थानीय स्तर पर सुनवाई न होने और विभागीय लीपापोती से क्षुब्ध होकर अब 10 अति-गंभीर प्रकरणों की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच और दोषियों पर एफआईआर की मांग की गई है।

​जिला अस्पताल से लेकर ग्रामीण स्वास्थ्य केंद्रों तक फैली प्रशासनिक बदहाली और भ्रष्टाचार के वे 10 मामले, जिन्होंने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है:

  • डॉ. पंकज धारवानी प्रकरण: पूर्व में तैयार की गई जांच रिपोर्ट को पूरी तरह फर्जी और पक्षपातपूर्ण बताते हुए पुन: समीक्षा की मांग उठाई गई है। दो मरीजों की संदेहास्पद मृत्यु और कथित जानलेवा लापरवाही की उच्चस्तरीय जांच की तलवार लटक गई है।
  • सुनील नाथ प्रकरण (देवरी): इलाज के दौरान मरीज की मृत्यु के इस संवेदनशील मामले में पूरे 12 महीने बीत जाने के बाद भी जांच ठंडे बस्ते में है। जिम्मेदारों को बचाने की इस साजिश पर तत्काल रोक लगाकर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की गई है।
  • साईखेड़ा स्वास्थ्य केंद्र का काला सच: प्राथमिक/सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अप्रशिक्षित कर्मचारियों और सफाईकर्मियों द्वारा मरीजों को ड्रिप एवं इंजेक्शन लगाए जा रहे हैं, जो सीधे-सीधे मरीजों की जान से खिलवाड़ है।
  • गाडरवारा अस्पताल (सुरक्षा गार्ड बने डॉक्टर): सुरक्षा गार्ड्स द्वारा मरीजों का इलाज करने और इंजेक्शन लगाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। इस घोर प्रशासनिक लापरवाही पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।
  • गाडरवारा एक्स-रे मशीन का दुरुपयोग: शासकीय एक्स-रे मशीन और सरकारी संपत्ति के अनाधिकृत व निजी उपयोग के जरिये बड़े वित्तीय घोटाले का आरोप है। मामले में विभागीय जांच और सरकारी खजाने को पहुंचाए गए नुकसान की रिकवरी की मांग की गई है।
  • अस्पताल की बाउंड्री वॉल क्षति प्रकरण: गाडरवारा अस्पताल की बाउंड्री वॉल को क्षति पहुंचाने वाले भू-माफियाओं और अराजक तत्वों की पहचान कर उनके खिलाफ नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कराने का दबाव बढ़ गया है।
  • नवजात शिशु सुरक्षा में भारी चूक: गाडरवारा अस्पताल परिसर में नवजात शिशु की सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़ी गंभीर लापरवाही ने अस्पताल प्रशासन की संवेदनहीनता को बेनकाब कर दिया है।
  • जिला अस्पताल में सिजेरियन के नाम पर वसूली: नरसिंहपुर जिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं से सिजेरियन डिलीवरी कराने के एवज में अनुचित मांगों और अवैध वसूली की शिकायतें हैं। दोषी डॉक्टरों और दलालों पर कठोर कार्रवाई की मांग की गई है।
  • डॉ. संदीप पटेल प्रकरण: लंबित विभागीय निर्णय और ठप पड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई को लेकर प्रशासनिक मंशा पर सवाल खड़े हो रहे हैं। मामले का बिना किसी दबाव के शीघ्र नियमानुसार निराकरण करने का आग्रह किया गया है।
  • करेली अस्पताल (एम्बुलेंस सेवा में जानलेवा चूक): आपातकालीन स्थिति में मरीजों को समय पर एम्बुलेंस न मिलने के कारण कई जिंदगियां दांव पर लगी हैं। इस आपराधिक लापरवाही के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है।

​स्वास्थ्य विभाग की इस बदहाली और प्रशासनिक अनदेखी ने यह साफ कर दिया है कि जिले में सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह वेंटिलेटर पर हैं। यदि इन मामलों में तत्काल निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की गई, तो जिला स्तर पर बड़े जनांदोलन का विस्फोट होना तय है।

img
Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।