गाडरवारा की दो पैथोलॉजी की रिपोर्ट पर उठे सवाल बिलीरुबिन जांच के आंकड़ों में अंतर, CM हेल्पलाइन पर शिकायत; मशीन और जांच प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग
- bySatendra Mishra
- 02 Sep 2026, 11:50 PM
- 6 Mins
गाडरवारा की दो पैथोलॉजी की रिपोर्ट पर उठे सवाल
बिलीरुबिन जांच के आंकड़ों में अंतर, CM हेल्पलाइन पर शिकायत; मशीन और जांच प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग
गाडरवारा। बांसखेड़ा निवासी कृष्णकांत गुर्जर द्वारा गाडरवारा शहर में संचालित अलग-अलग पैथोलॉजी लैबों में कराई गई बिलीरुबिन जांच की अलग-अलग रिपोर्टों में अंतर सामने आने के बाद स्वास्थ्य जांच व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं। मामले में शिकायतकर्ता द्वारा CM हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कर निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। शिकायत में विशेष रूप से गाडरवारा की संबंधित दो पैथोलॉजी की जांच मशीन, नमूना संग्रह, जांच प्रक्रिया और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था की जांच कराने की मांग की गई है।
प्राप्त जांच रिपोर्टों के अनुसार, 30 अगस्त 2026 को श्री बालाजी पैथो सेंटर की रिपोर्ट में Total Bilirubin 2.16 mg/dL, Direct Bilirubin 0.49 mg/dL और Indirect Bilirubin 1.67 mg/dL दर्ज किया गया। वहीं 1 सितंबर 2026 को लाइफ लाइन अस्पताल की पैथोलॉजी रिपोर्ट में Total Bilirubin 1.71 mg/dL, Direct Bilirubin 0.52 mg/dL तथा Indirect Bilirubin 1.19 mg/dL दर्ज हुआ।
रिपोर्टों को लेकर संतुष्टि नहीं होने पर मरीज ने अन्य स्थानों पर भी जांच कराई। 31 अगस्त को Patel Patho Diagnostics की रिपोर्ट में Direct Bilirubin 0.70 mg/dL, Indirect Bilirubin 0.40 mg/dL, SGPT/ALT 16.9 U/L और SGOT/AST 24.1 U/L दर्ज किए गए। वहीं 1 सितंबर को Dr. Lal PathLabs की रिपोर्ट में Total Bilirubin 1.19 mg/dL, Direct Bilirubin 0.29 mg/dL तथा Indirect Bilirubin 0.90 mg/dL दर्ज हुआ।
रिपोर्टों में अंतर को लेकर जांच की मांग
शिकायतकर्ता का कहना है कि अलग-अलग स्थानों पर कराई गई जांच में बिलीरुबिन के आंकड़ों में अंतर सामने आया है। इसी आधार पर उसने संबंधित पैथोलॉजी की मशीनों की कार्यक्षमता, जांच की तकनीक, नमूना संग्रह एवं पहचान की प्रक्रिया तथा Quality Control की जांच कराने की मांग की है। साथ ही यह भी स्पष्ट करने की मांग की गई है कि एक ही मरीज की जांच रिपोर्टों में अंतर किन परिस्थितियों में आया।
स्वास्थ्य विभाग की जांच से स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
मामला सामने आने के बाद अब स्वास्थ्य विभाग की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। निष्पक्ष जांच में यदि सभी रिपोर्टों के मूल रिकॉर्ड, नमूना विवरण, जांच उपकरण, इस्तेमाल की गई विधि और गुणवत्ता नियंत्रण संबंधी दस्तावेजों का परीक्षण किया जाता है तो रिपोर्टों में अंतर के कारणों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
हालांकि, चिकित्सकीय रूप से केवल बिलीरुबिन की एक रिपोर्ट के आधार पर पीलिया या किसी बीमारी का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। मरीज की चिकित्सकीय स्थिति, अन्य लिवर फंक्शन टेस्ट और चिकित्सकीय परीक्षण को भी ध्यान में रखना आवश्यक होता है। इसलिए रिपोर्टों में अंतर को लेकर अंतिम निष्कर्ष संबंधित विशेषज्ञ एवं सक्षम स्वास्थ्य अधिकारियों की जांच के बाद ही निकाला जाना उचित होगा।
अब देखना यह है कि CM हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत के बाद स्वास्थ्य विभाग इस मामले में क्या कार्रवाई करता है और संबंधित पैथोलॉजी की जांच मशीन व जांच प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कर रिपोर्टों में अंतर का कारण सामने लाया जाता है या नहीं।
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
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