चैत्र नवरात्रि पूजा में क्या करना चाहिए पंडित निखिल स्थापक शास्त्री जी के अनुसार

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चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है, जो इस बार 19 मार्च, गुरुवार को पड़ रही है। हिंदू धर्म में इन नौ दिनों का बहुत खास महत्व होता है। इस दौरान दुर्गा मां के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। पंडित निखिल स्थापक शास्त्री लिलवानी गाडरवारा जिला नरसिंगपुर के अनुसार चैत्र नवरात्रि में पूजा के समय कुछ नियमों का ध्यान रखना आवश्यक होता है। पूजा में कुछ चीजों को करना वर्जित माना जाता है और कुछ चीजों को करने की मनाही होती है। ऐसे में आइए विस्तार से जानते हैं चैत्र नवरात्रि की पूजा में क्या करें और क्या न करें।

चैत्र नवरात्रि पूजा में क्या नहीं करना चाहिए?
मान्यता है कि चैत्र नवरात्रि की पूजा करने वालों को भूलकर भी तामसिक भोजन का सेवन नहीं करना चाहिए। ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है।
अगर आपके घर चैत्र नवरात्रि की पूजा होती है तो 9 दिनों के दौरान परिवार के किसी भी सदस्य को नाखून या बाल नहीं कटवाने चाहिए। ऐसा करने से प्रतिकूल प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है।
चैत्र नवरात्रि की पूजा के समय मन में किसी भी प्रकार के नकारात्मक विचार नहीं रखने चाहिए। साथ ही, किसी के प्रति मन में क्रोध और लालच की भावना नहीं रखनी चाहिए।
कलश स्थापना के लिए जो पंच पल्लव उपयोग किए जाते हैं उन्हें लेते समय इस बात का ख्याल रखें की पत्ते कटे-फटे नहीं होने चाहिए।
देवी दुर्गा की पूजा कभी भी चमड़े की बेल्ट, जैकेट आदि पहनकर नहीं करना चाहिए। क्योंकि पूजा के दौरान चमड़े से बनी चीजों का इस्तेमाल करना वर्जित माना गया है।
नवरात्रि के दौरान मंदिर और घर में गंदगी नहीं होनी चाहिए। घर और पूजा घर की साफ-सफाई के पश्चात ही मां दुर्गा की पूजा करनी चाहिए।
चैत्र नवरात्रि में भूलकर भी काले रंग के वस्त्र पहनकर पूजा नहीं करनी चाहिए। शास्त्रों में ऐसा करना वर्जित माना गया है।
ऐसी मान्यता है की अगर चैत्र नवरात्रि में अखंड ज्योत रखी गई हो तो उसे गलती से भी अकेले छोड़कर नहीं जाना चाहिए।

चैत्र नवरात्रि पूजा में क्या करना चाहिए?
नवरात्रि के प्रथम दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना करने के पश्चात मां दुर्गा का विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। इन नौ दिनों के दौरान माता के नौ स्वरूपों की पूजा करनी चाहिए।
नवरात्रि की पूजा करने वालों को ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए पूरे नौ दिन श्रद्धा भाव से मां दुर्गा की आराधना करनी चाहिए।
मान्यता है की माता रानी का भोग जरूर बदलना चाहिए और भोग लगाने के कुछ देर बाद प्रसाद को वहां से उठा लेना चाहिए।
शास्त्रों में मां दुर्गा की पूजा में लौंग और कपूर प्रयोग करने का खास महत्व बताया गया है। ऐसे में पूजा के दौरान इन 2 चीजों को जरूर शामिल करें।
नवरात्रि के दौरान सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करने के पश्चात रोजाना मां दुर्गा का पूजा करनी चाहिए। साथ ही, इन 9 दिनों में अखंड ज्योत जलाने का भी खास महत्व होता है।
मां दुर्गा का पूजा में लाल, पीला, गुलाबी आदि रंगों के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। इसका अनुकूल प्रभाव जातक के जीवन पर भी पड़ता है।
नवरात्रि में माता रानी को अर्पित किया गया श्रृंगार का सामान अंतिम दिन पूजा के बाद उठाकर किसी सुहागिन को दे देना चाहिए या फिर, अपने श्रृंगार के सामान में ही उसे खुद प्रयोग करना चाहिए।
अगर संभव हो तो नवरात्रि में 9 दिनों तक रोजाना एक कन्या को भोजन जरूर कराना चाहिए। ऐसा करना बहुत शुभ फलदायी माना गया है।

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Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।