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साईंखेड़ा नगर परिषद में भ्रष्टाचार और गुणवत्ताहीन निर्माण के विरोध में धरना शुरू “आश्वासन नहीं, जांच चाहिए… भ्रष्टाचार पर कार्यवाही चाहिए” के नारों से गूंजा धरना स्थल

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साईंखेड़ा नगर परिषद में भ्रष्टाचार और गुणवत्ताहीन निर्माण के विरोध में धरना शुरू

“आश्वासन नहीं, जांच चाहिए… भ्रष्टाचार पर कार्यवाही चाहिए” के नारों से गूंजा धरना स्थल

 

गाडरवारा। दादा धूनीवालों की नगरी साईंखेड़ा नगर परिषद में विकास कार्यों के नाम पर कथित गुणवत्ताहीन निर्माण, वित्तीय अनियमितताओं, भ्रष्टाचार एवं प्रशासनिक लापरवाही के विरोध में मंगलवार से धरना प्रदर्शन शुरू हो गया। इस आंदोलन का नेतृत्व रंजीत सिंह तोमर (प्रदेश सचिव, मध्यप्रदेश राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो) द्वारा किया जा रहा है, जिसमें पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं बड़ी संख्या में नगरवासियों ने सहभागिता दर्ज कराई।

धरना प्रदर्शन के माध्यम से नगर परिषद क्षेत्र में करोड़ों रुपये की लागत से हुए विभिन्न निर्माण कार्यों में कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कठोर कार्रवाई तथा आम नागरिकों के अधिकारों की बहाली की मांग उठाई गई। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कहा कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ठोस जांच और भ्रष्टाचारियों पर कानूनी कार्रवाई चाहिए।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि नगर परिषद में विकास कार्यों के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए, लेकिन अधिकांश कार्य या तो गुणवत्ताहीन हैं या उनमें गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आ रही हैं। नागरिकों ने 2 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे बस स्टैंड एवं शॉपिंग कॉम्प्लेक्स की उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि कलेक्टर की उपस्थिति में कॉलम खुदवाकर निर्माण गुणवत्ता की जांच कराई जाए, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

इसके साथ ही मुक्तिधाम, नव-निर्मित नगर परिषद भवन, नगर तालाब एवं लगभग 2 करोड़ रुपये की लागत से बने नाले के निर्माण कार्यों की भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई। नगर के ऐतिहासिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण तालाब नरहरियानंद को NGT के आदेशानुसार संरक्षित करने की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई।

धरना प्रदर्शन में तहसील कार्यालय के सामने बनी सड़क तथा जागा मंदिर से बरेठी तक लगभग 65-65 लाख रुपये की लागत से हुए सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। प्रदर्शनकारियों ने इन कार्यों की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की।

इसके अलावा नव निर्मित नगर परिषद दुकानों का पारदर्शी एवं निष्पक्ष आवंटन कर 10 वर्षों से प्रतीक्षारत हितग्राहियों को अधिकार दिलाने, प्रधानमंत्री आवास योजना में हुई कथित अनियमितताओं की जांच कर अपात्र लाभार्थियों पर कार्रवाई तथा पात्र हितग्राहियों को लाभ सुनिश्चित करने की मांग की गई।

कृषि उपज मंडी को मूल नक्शे के अनुसार विकसित कर सब्जी बाजार की व्यवस्था सुनिश्चित करने, नगर के एकमात्र खेल मैदान को व्यावसायिक गतिविधियों से मुक्त रखते हुए संरक्षित करने, स्वच्छ भारत अभियान में खर्च हुई राशि एवं सामग्री की सार्वजनिक जांच तथा नगर परिषद द्वारा खरीदे गए फायर ब्रिगेड एवं अन्य वाहनों की जांच की मांग भी आंदोलन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी।

धरना स्थल पर उपस्थित नागरिकों ने एक स्वर में नारा लगाया—

“आश्वासन नहीं, जांच चाहिए… भ्रष्टाचार पर कार्यवाही चाहिए।”

धरना प्रदर्शन के प्रथम दिन ही आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन प्राप्त हुआ। पत्रकार सचिन जोशी, दीपक अग्रवाल, सतेन्द्र मिश्रा, रजनीश कुमार कौरव, सामाजिक कार्यकर्ता सुनील विश्वकर्मा, रूपसिंह बड़कुर (जिला उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं अपराध नियंत्रण ब्यूरो नरसिंहपुर), सुशांत राय, वीरेंद्र पटेल, सुजान सिंह राजपूत, बृजेश राजपूत, मोना तोमर, शेख हनीफ (अध्यक्ष, मध्यप्रदेश मुस्लिम विकास परिषद), सुरेश साध, गनपत सिंह पटेल (रमपुरा), संतोष श्रीवास, देवेन्द्र विश्वकर्मा, पन्नालाल जोशी, कमलेश अवधिया (पत्रकार), नीलेश तोमर सहित अनेक नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

नगरवासियों का कहना है कि यदि समय रहते निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। धरना अब नगर परिषद प्रशासन और जिला प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।       

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।