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कौडिया ( गाडरवारा) सुरक्षा के नाम पर ₹5 लाख खर्च, फिर भी खंभों पर लटक रहे CCTV कैमरे!

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💥 सुरक्षा के नाम पर ₹5 लाख खर्च, फिर भी खंभों पर लटक रहे CCTV कैमरे!

पंचायत की डिजिटल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल, न केबल का पता, न DVR-मॉनिटर और न रिकॉर्डिंग का इंतजाम; सरकारी राशि के उपयोग की निष्पक्ष जांच की मांग

 

ग्राम पंचायत में सुरक्षा के नाम पर लाखों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद यदि CCTV कैमरे केवल खंभों पर लटके नजर आएं, तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। लगभग पांच लाख रुपये की लागत से स्थापित बताई जा रही CCTV व्यवस्था को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने इस पूरे मामले की तकनीकी जांच कराने और सरकारी राशि के उपयोग का हिसाब सार्वजनिक करने की मांग उठाई है।

🔴 सुरक्षा का दावा, लेकिन निगरानी व्यवस्था कहां?

ग्राम पंचायत में CCTV कैमरे लगाए जाने का उद्देश्य पंचायत भवन और आसपास के क्षेत्रों की निगरानी करना तथा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाना था। लेकिन मौके पर कैमरों की स्थापना और उनके संचालन को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

आरोप है कि कैमरों के साथ आवश्यक केबलिंग, DVR, मॉनिटर और रिकॉर्डिंग व्यवस्था मौके पर दिखाई नहीं दे रही है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कैमरे रिकॉर्डिंग ही नहीं कर रहे हैं, तो सुरक्षा के लिए किए गए खर्च का वास्तविक लाभ किसे मिल रहा है?

ग्रामीणों का कहना है कि केवल खंभों पर कैमरे टांग देने से डिजिटल निगरानी व्यवस्था प्रभावी नहीं हो जाती। कैमरों का चालू होना, रिकॉर्डिंग सुरक्षित रहना और जरूरत पड़ने पर फुटेज उपलब्ध होना भी उतना ही जरूरी है।

🔍 पांच लाख रुपये के खर्च का हिसाब कौन देगा?

इस मामले में लगभग पांच लाख रुपये की राशि खर्च होने की बात सामने आ रही है। हालांकि, वास्तविक भुगतान, स्वीकृत राशि, खरीदे गए उपकरणों, स्थापना कार्य और संबंधित बिल-वाउचर की स्वतंत्र जांच आवश्यक है।

यदि स्वीकृत बजट के अनुसार उपकरण लगाए ही नहीं गए, या भुगतान के बावजूद CCTV व्यवस्था काम नहीं कर रही है, तो यह सरकारी धन के उपयोग और कार्य की गुणवत्ता से जुड़ा गंभीर मामला हो सकता है।

अब सवाल उठता है कि इस कार्य की तकनीकी जांच किसने की? भुगतान से पहले उपकरणों और स्थापना कार्य का सत्यापन हुआ था या नहीं? क्या कैमरों के संचालन और रिकॉर्डिंग का परीक्षण किया गया था? इन सवालों के जवाब संबंधित अभिलेखों और निष्पक्ष जांच से ही सामने आ सकते हैं।

⚠️ खंभों पर कैमरे, व्यवस्था पर सवाल!

ग्रामीणों के बीच इस मामले को लेकर नाराजगी बताई जा रही है। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन का उपयोग ऐसी व्यवस्था के लिए होना चाहिए, जिसका लाभ आम नागरिकों को वास्तव में मिले।

ग्रामीणों का सवाल है—जब कैमरों से निगरानी और रिकॉर्डिंग ही नहीं हो रही, तो सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य कैसे पूरा होगा?

मामले में संबंधित पंचायत प्रतिनिधियों, अधिकारियों और कार्य करने वाली एजेंसी की भूमिका की जांच किए जाने की मांग की जा रही है। हालांकि, किसी भी व्यक्ति या संस्था की जिम्मेदारी तय करने से पहले दस्तावेजों, तकनीकी तथ्यों और संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना जरूरी है।

📌 ग्रामीणों ने उठाईं ये प्रमुख मांगें

1. उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच: CCTV स्थापना कार्य, स्वीकृत बजट, भुगतान, बिल-वाउचर और तकनीकी सत्यापन की जांच कराई जाए।

2. तकनीकी ऑडिट: सभी कैमरों की कार्यशीलता, केबलिंग, DVR, मॉनिटर, बिजली कनेक्शन और रिकॉर्डिंग व्यवस्था की विशेषज्ञों से जांच कराई जाए।

3. खर्च का विवरण सार्वजनिक हो: कार्यादेश, उपकरणों की खरीद, भुगतान की राशि और कार्य पूर्णता प्रमाण-पत्र का विवरण सार्वजनिक किया जाए।

4. जिम्मेदारी तय हो: जांच में यदि वित्तीय अनियमितता, लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

5. सरकारी राशि की वसूली: यदि जांच में गलत भुगतान या सरकारी धन के दुरुपयोग की पुष्टि होती है, तो नियमानुसार राशि की वसूली की जाए और दोषी पाए जाने वालों पर आवश्यक कार्रवाई हो।

📰 अब जांच और जवाबदेही का इंतजार

ग्राम पंचायत की CCTV व्यवस्था से जुड़ा यह मामला केवल कैमरों के चालू या बंद होने तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग, कार्य की गुणवत्ता और जवाबदेही से भी जुड़ा है।

अब देखना होगा कि संबंधित विभाग इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और लगभग पांच लाख रुपये के कथित खर्च की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए क्या कदम उठाता है।

जनता के पैसे का हिसाब जनता को मिलना चाहिए। यदि व्यवस्था में गड़बड़ी है, तो उसकी निष्पक्ष जांच हो और यदि सब कुछ नियमानुसार हुआ है, तो संबंधित अभिलेखों के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जाए।

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।