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गाडरवारा रेत माफिया के आतंक के बीच घायल भाजपा नेता को अस्पताल से जबरन डिस्चार्ज करने की कोशिश! अवैध खनन की शिकायत पड़ी भारी, दोनों पैर टूटे, अब इलाज भी संकट में

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रेत माफिया के आतंक के बीच घायल भाजपा नेता को अस्पताल से जबरन डिस्चार्ज करने की कोशिश!

अवैध खनन की शिकायत पड़ी भारी, दोनों पैर टूटे, अब इलाज भी संकट में

गाडरवारा (नरसिंहपुर)। जिले में अवैध रेत उत्खनन और रेत माफियाओं के बढ़ते आतंक ने अब भयावह रूप ले लिया है। रेत माफिया के खिलाफ आवाज उठाने वाले भाजपा नेता पवन पटेल आज अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे हैं। आरोप है कि शिकायत के बाद माफियाओं ने उन पर जानलेवा हमला किया, जिससे उनके दोनों पैर और एक हाथ बुरी तरह फ्रैक्चर हो गए। अब पीड़ित ने अस्पताल प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि दबाव में आकर उन्हें जबरन डिस्चार्ज करने की कोशिश की जा रही है। जानकारी के अनुसार, 16 जनवरी 2026 को भारतीय जनता पार्टी कार्यालय में आयोजित जनसुनवाई में पवन पटेल ने जिले में चल रहे अवैध रेत उत्खनन, अवैध रॉयल्टी वसूली और रेत ठेकेदारों की मनमानी की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के कुछ ही समय बाद कथित तौर पर रेत ठेकेदारों से जुड़े लोगों ने उन पर हमला कर दिया।

इस हमले में उनके दोनों पैरों (घुटनों के नीचे) में मल्टीपल फ्रैक्चर हुए, वहीं दाहिना हाथ भी टूट गया। हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें तत्काल गाडरवारा से जबलपुर के निजी अस्पताल रेफर किया गया, जहां दोनों पैरों का ऑपरेशन कर प्लेट और रॉड डाली गई। आर्थिक तंगी के चलते बाद में उन्हें वापस शासकीय सिविल अस्पताल गाडरवारा में भर्ती होना पड़ा। पवन पटेल का कहना है कि वे अभी भी चलने-फिरने की स्थिति में नहीं हैं। न तो वे स्वयं खड़े हो सकते हैं और न ही दैनिक कार्य कर सकते हैं। ऐसे में यदि अस्पताल से जबरन छुट्टी दी जाती है, तो संक्रमण बढ़ने का खतरा है, जिससे उनके पैर काटने तक की नौबत आ सकती है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यह केवल इलाज का मामला नहीं, बल्कि उनकी जिंदगी का सवाल है। पीड़ित ने अस्पताल प्रबंधन को लिखित आवेदन देकर पूर्ण स्वस्थ होने तक भर्ती रखे जाने की मांग की है। साथ ही आरोप लगाया कि रेत ठेकेदार कंपनी के दबाव में अस्पताल प्रशासन यह अमानवीय कदम उठा रहा है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए पवन पटेल ने मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को शिकायत भेजकर निष्पक्ष जांच, सुरक्षा और न्याय की मांग की है।

सबसे बड़ा सवाल अब यह है—क्या रेत माफियाओं के दबाव में व्यवस्था पूरी तरह झुक चुकी है? क्या शिकायत करने वालों को न्याय के बजाय अस्पताल से बाहर का रास्ता दिखाया जाएगा? प्रशासन की अग्निपरीक्षा अब शुरू हो चुकी है।

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।