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नरसिंगपुर गाडरवारा सिविल अस्पताल में मौत का तांडव! बिना डॉक्टर के इलाज,

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🚨 गाडरवारा सिविल अस्पताल में मौत का तांडव! बिना डॉक्टर के इलाज, 

​📍 स्थान: गाडरवारा, जिला नरसिंहपुर (मध्य प्रद

​मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के शासकीय सिविल अस्पताल, गाडरवारा में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का जनाजा निकल चुका है। अस्पताल प्रबंधन की घोर लापरवाही, अयोग्य और बिना प्राधिकार के अवैध प्रैक्टिस का एक ऐसा काला सच सामने आया है, जो सीधे तौर पर आम जनता की जिंदगी के साथ खुला खिलवाड़ और आपराधिक कृत्य है।

​गाडरवारा निवासी आवेदक सुनील शर्मा द्वारा मध्य प्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री को सौंपे गए शिकायती पत्र में अस्पताल प्रशासन की पोल खोलकर रख दी गई है।

  • ​इलाज के नाम पर मरीजों की जान से खिलवाड़: हृदयघात (हार्ट अटैक) जैसी गंभीर और आपातकालीन स्थिति में अस्पताल पहुँचने वाले मरीजों का उचित परीक्षण या ईसीजी (ECG) जैसी आवश्यक जाँच करने के बजाय उन्हें गैर-जिम्मेदाराना तरीके से टरका दिया जा रहा है, जिससे कई मरीजों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ रहा है।

 

  • ​अवैध और फर्जी डॉक्टरों का खेल: आरटीआई (RTI) से मिले दस्तावेजों के अनुसार, अस्पताल में बिना किसी वैध पदस्थापना आदेश, बिना नियुक्ति और बिना अनिवार्य शैक्षणिक/चिकित्सा पंजीयन के केवल "मौखिक निर्देशों" पर अप्रशिक्षित इंटर्न डॉक्टरों से आपातकालीन ड्यूटी कराई जा रही है।

 

  • ​सबूत मिटाने के लिए CCTV फुटेज विलोपित (गायब) करना: अस्पताल प्रशासन की अमानवीयता यहीं नहीं रुकी; मरीजों की मौत के बाद अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज और महत्वपूर्ण अभिलेखों को जानबूझकर गायब या डिलीट कर दिया गया है, ताकि दोषियों को बचाया जा सके और साक्ष्यों को नष्ट किया जा सके।

​शिकायतकर्ता ने स्वास्थ्य मंत्री से तत्काल निम्नलिखित कठोर कदम उठाने की माँग की है:

  1. ​एफ.आई.आर. और निलंबन: गाडरवारा सिविल अस्पताल में बिना प्राधिकार के मरीजों का इलाज करने वाले और अवैध रूप से ड्यूटी कराने वाले जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों व डॉक्टरों पर आपराधिक मामला (FIR) दर्ज कर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए।

 

  1. ​उच्च स्तरीय जाँच समिति: पूरे प्रकरण और साक्ष्य विलोपन की निष्पक्ष जाँच के लिए राज्य स्तर पर एक उच्च स्तरीय जाँच समिति का गठन किया जाए।

 

  1. ​कठोरतम दंडात्मक कार्रवाई: दोषियों पर ऐसी मिसाल कायम करने वाली कार्रवाई हो, ताकि जनता के जीवन से खिलवाड़ करने की हिम्मत कोई दोबारा न कर सके। चेतावनी दी गई है कि यदि जल्द ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो पीड़ित न्यायहित में न्यायालय की शरण लेने और उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा।

 

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।