मौत के आरोपों पर पर्दा डालने में जुटा स्वास्थ्य विभाग? डा. पंकज ठारवानी केस में 6 माह से ‘जांच’ गायब!

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मौत के आरोपों पर पर्दा डालने में जुटा स्वास्थ्य विभाग?

डा. पंकज ठारवानी केस में 6 माह से ‘जांच’ गायब!

मौत, लापरवाही और सरकारी संसाधनों का दुरुपयोग

डा. पंकज ठारवानी केस बना ‘सिस्टम फेल’ की मिसाल

डा. पंकज ठारवानी मामला : जांच की आड़ में संरक्षण?
मुख्य चिकित्सा अधिकारी व स्वास्थ्य विभाग की भूमिका संदेह के घेरे में

गाडरवारा। गाडरवारा के चर्चित चिकित्सक डा. पंकज ठारवानी पर लगे गंभीर आरोपों का मामला अब केवल चिकित्सा लापरवाही तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने स्वास्थ्य विभाग, मुख्य चिकित्सा अधिकारी CMHO कार्यालय और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर बड़े और असहज सवाल खड़े कर दिए हैं। दो मरीजों की मौत, कई अन्य मरीजों की हालत लापरवाहीपूर्ण इलाज के कारण बिगड़ने, शासकीय संपत्ति के दुरुपयोग और नुकसान जैसे गंभीर आरोपों के बावजूद लगभग छह माह बीत जाने के बाद भी किसी भी प्रकार की ठोस कार्रवाई न होना पूरे प्रकरण को और अधिक संदेहास्पद बना रहा है।

इस मामले में आवेदक द्वारा नरसिंहपुर कलेक्टर को जनसुनवाई के दौरान दो लिखित आवेदन सौंपे गए थे। इसके बाद मुख्य चिकित्सा अधिकारी CMHO डा. मनीष मिश्रा द्वारा जांच समिति गठित करने की औपचारिक घोषणा तो की गई, लेकिन जांच वास्तव में कब हुई, कहां हुई और किन अधिकारियों द्वारा की गई, इसकी कोई भी जानकारी आज दिनांक 19 फरवरी 2026 तक सार्वजनिक नहीं की गई है। जब आवेदक ने स्वयं मुख्य चिकित्सा अधिकारी CMHO से जांच की स्थिति और प्रगति के संबंध में जानकारी चाही, तो न तो कोई संतोषजनक उत्तर दिया गया और न ही जांच से जुड़े दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। उल्टे मुख्य चिकित्सा अधिकारी CMHO द्वारा यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया गया कि “RTI से कागज निकालो”, जिससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि यह पारदर्शिता है या फिर जांच से बचने की सोची-समझी रणनीति।

डा. पंकज ठारवानी पर लगे आरोप किसी मामूली या तकनीकी त्रुटि के नहीं हैं। उन पर दो मरीजों की मौत के आरोप हैं, लगभग छह मरीजों का ऐसा लापरवाहीपूर्ण इलाज करने के आरोप हैं जिससे उनकी हालत गंभीर हो गई, शासकीय अस्पताल गाडरवारा की बाउंड्री वॉल को तोड़ने के गंभीर आरोप हैं और शासकीय एक्स-रे मशीन के दुरुपयोग का भी मामला सामने आया है। इतने गंभीर और बहुआयामी आरोपों के बावजूद स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी और मुख्य चिकित्सा अधिकारी CMHO की निष्क्रियता यह सवाल खड़ा करती है कि क्या संबंधित चिकित्सक को विभागीय संरक्षण प्राप्त है।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी CMHO की भूमिका पर भी बड़े सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि आज दिनांक तक न तो मुख्य चिकित्सा अधिकारी CMHO डा. मनीष मिश्रा ने आवेदक प्रीति नाथ से कोई संपर्क किया है, न ही गठित जांच टीम ने सुनील नाथ से जुड़े मामले में कोई जांच की है। न कोई जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की गई है और न ही किसी प्रकार की अंतरिम कार्रवाई सामने आई है। ऐसे में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि इतने गंभीर आरोपों के बावजूद न तो निलंबन की कार्रवाई क्यों हुई, न प्राथमिकी दर्ज क्यों की गई और न ही किसी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई क्यों की गई।

जब यह मामला जनसुनवाई के माध्यम से सीधे कलेक्टर नरसिंहपुर तक पहुंच चुका है, तब भी कलेक्टर स्तर से प्रभावी हस्तक्षेप न होना प्रशासनिक उदासीनता या किसी प्रकार के दबाव की ओर इशारा करता है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की इस चुप्पी ने आम जनता के बीच भय और आक्रोश दोनों को जन्म दे दिया है।

अब क्षेत्र में यह चर्चा आम हो चली है कि एक कथित अपराधी चिकित्सक को यमराज बनकर खुलेआम काम करने की छूट आखिर कौन और क्यों दे रहा है। क्या स्वास्थ्य विभाग और मुख्य चिकित्सा अधिकारी CMHO कार्यालय किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहे हैं, या फिर सबूत मिटाने और मामले को ठंडा पड़ने देने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

यह मामला अब केवल एक डॉक्टर तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि यह स्वास्थ्य व्यवस्था की साख, प्रशासन की जवाबदेही और आम नागरिक के जीवन की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर प्रश्न बन चुका है। जनहित में अब तत्काल स्वतंत्र जांच कराए जाने, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने, दोषियों पर कठोर कार्रवाई करने और मुख्य चिकित्सा अधिकारी CMHO सहित संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच किए जाने की आवश्यकता है।

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।