49 लाख से बना उप स्वास्थ्य केंद्र बना ‘बिना डॉक्टर का अस्पताल’ — दो साल बाद भी ताला, 15 गांव के आदिवासी परेशान

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 49 लाख से बना उप स्वास्थ्य केंद्र बना ‘बिना डॉक्टर का अस्पताल’

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले के चीचली जनपद के अंतर्गत आने वाले आदिवासी वनांचल गांव गोटिटोरिया में लाखों रुपये की लागत से बना उप स्वास्थ्य केंद्र आज भी लोगों को सुविधा देने के बजाय उपेक्षा का शिकार बना हुआ है। लगभग दो वर्ष पूर्व स्वास्थ्य विभाग द्वारा करीब 49 लाख रुपये की लागत से इस उप स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया गया था, जिसका लोकार्पण प्रदेश के शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह के द्वारा किया गया था

लेकिन लोकार्पण के दो साल बाद भी इस स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर और स्टाफ नर्स की नियुक्ति नहीं हो सकी है, जिसके कारण यह अस्पताल केवल भवन बनकर रह गया है। डॉक्टर की नियुक्ति न होने से गोटिटोरिया सहित आसपास के 15 से अधिक गांवों के ग्रामीणों को इलाज के लिए करीब 20 किलोमीटर दूर गाडरवारा जाना पड़ रहा है

ग्रामीणों का कहना है कि आदिवासी क्षेत्र होने के कारण यहां स्वास्थ्य सुविधाओं की पहले से ही भारी कमी है। अगर इस उप स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर और स्टाफ की नियुक्ति हो जाए तो आदिवासी ग्रामीणों को बेहतर और समय पर इलाज मिल सकता है

डॉक्टर और स्टाफ की नियुक्ति न होने के कारण नव निर्मित स्वास्थ्य केंद्र अब धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी भी देखी जा रही है

ग्रामीणों ने मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री, जिला कलेक्टर और जिला स्वास्थ्य अधिकारी से मांग की है कि जल्द से जल्द उप स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर और स्टाफ नर्स की नियुक्ति की जाए, ताकि क्षेत्र के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ मिल सके

आदिवासी गांव गोटिटोरिया के उप स्वास्थ्य केंद्र में शीघ्र डॉक्टर की नियुक्ति की जाए, जिससे आदिवासी समुदाय को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिल सके नरसिंगपुर जिला  स्वास्थ अधिकारी डा. मनीष मिश्रा से सम्पर्क  करने की कोशिश की तो जिला CMHO फोने नही उठाते न किसी भी मामले का जबाब देते है  

 

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Satendra Mishra

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