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तहसीलदार गाडरवारा, हल्का पटवारी सहित तीन लोगों के विरुद्ध न्यायालय में आपराधिक परिवाद प्रस्तुति उपरांत विचारण में लिया गया, सरकारी अभिलेखों में कूटरचना और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप।

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तहसीलदार गाडरवारा, हल्का पटवारी सहित तीन लोगों के विरुद्ध न्यायालय में आपराधिक परिवाद प्रस्तुति उपरांत विचारण में लिया गया, सरकारी अभिलेखों में कूटरचना और फर्जीवाड़े के गंभीर आरोप।

सीमांकन प्रकरण में राजस्व रिकॉर्ड से कथित कूटरचना एवं छेड़छाड़ का मामला पहुंचा अदालत, न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी ने परिवाद संज्ञान में लेकर नोटिस जारी करने का आदेश किया पारित।


गाडरवारा। गाडरवारा के न्यायालय में राजस्व विभाग से जुड़े कथित फर्जीवाड़े और सरकारी अभिलेखों में कूटरचना के गंभीर आरोपों वाला मामला अब न्यायिक प्रक्रिया में पहुंच गया है। ग्राम बरहेटा निवासी हिमाचल कौरव द्वारा दायर परिवाद पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, गाडरवारा ने प्रारंभिक साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद प्रकरण यूएनसीआर क्रमांक 190/2026 के रूप में दर्ज कर लिया है तथा आरोपित पक्ष को नोटिस जारी करने का आदेश पारित किया है। परिवाद में तत्कालीन तहसीलदार प्रियंका नेताम, हल्का पटवारी चैतन्य विश्वकर्मा एवं किसान बुद्धा चमार को आरोपी बनाया गया है। परिवादी का आरोप है कि ग्राम बरहेटा स्थित बुद्धा चामर की भूमि के सीमांकन से संबंधित शासकीय राजस्व अभिलेखों में सुनियोजित तरीके से फेरबदल कर बाद में अतिरिक्त टिप्पणियां जोड़ी गईं, जिससे वास्तविक रिकॉर्ड की प्रकृति बदल गई और एक पक्ष को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। परिवाद के अनुसार वर्ष 2023 एवं वर्ष 2024 में एक ही सीमांकन प्रकरण की प्राप्त प्रमाणित प्रतियों की तुलना करने पर अनेक महत्वपूर्ण अंतर सामने आए, जिनमें सीमांकन प्रतिवेदन एवं पंचनामा में बाद में जोड़ी गई कथित टिप्पणियां भी शामिल हैं। शिकायतकर्ता का कहना है कि इन परिवर्तनों से यह प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया कि संबंधित भूमि पर परिवादी द्वारा अवैध कब्जा किया गया था, जबकि पूर्व में प्राप्त प्रमाणित अभिलेखों में ऐसा कोई उल्लेख नहीं था। परिवादी ने आरोप लगाया है कि तहसीलदार के कब्जे के नस्तीबद्ध राजस्व प्रकरण के शासकीय रिकॉर्ड में यह कथित फेरबदल संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से किया गया तथा इस संबंध में पुलिस, राजस्व विभाग, कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक सहित अन्य सक्षम अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायतें देने के बावजूद कोई प्रभावी दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई, जिसके बाद परिवादी को मजबूरन माननीय न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। न्यायालयीन आदेश पत्रिका के अनुसार 14 मई 2026 को परिवाद प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद न्यायालय ने प्रकरण में  प्रारंभिक साक्ष्य के लिए तिथि निर्धारित की। 9 जुलाई 2026 को परिवादी के साक्ष्य दर्ज किए गए तथा प्रारंभिक साक्ष्य पूर्ण होने के बाद न्यायालय ने आरोपित पक्ष को नोटिस जारी करने का आदेश दिया। 23 जुलाई 2026 के आदेश में नोटिस तामील कराने की प्रक्रिया का उल्लेख किया गया है। परिवाद में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराएं 201, 318(4), 335, 336(1), 336(2), 336(3), 339 एवं 340 सहित भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के अंतर्गत आरोपितों को कठोर दंड से दंडित कराए जाने की मांग की गई है।  उल्लेखनीय है कि वर्तमान में मामला न्यायालय में विचाराधीन है तथा न्यायालय ने अभी केवल परिवाद पर प्रथम दृष्टया कार्यवाही करते हुए नोटिस जारी करने की प्रक्रिया प्रारंभ की है। आरोपों की सत्यता अथवा आरोपितों की जिम्मेदारी का अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा दोनों पक्षों की सुनवाई एवं उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही किया जाएगा।

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।