गाडरवारा में झोलाछाप डॉक्टरों पर स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, संयुक्त टीम की दबिश से मचा हड़कंप डिग्री, पंजीयन और दस्तावेजों की हुई जांच, दवाएं व चिकित्सा उपकरणों के नमूने जब्त
- bySatendra Mishra
- 18 Jun 2026, 07:00 PM
- 8 Mins
गाडरवारा में झोलाछाप डॉक्टरों पर स्वास्थ्य विभाग की बड़ी कार्रवाई, संयुक्त टीम की दबिश से मचा हड़कंप
डिग्री, पंजीयन और दस्तावेजों की हुई जांच, दवाएं व चिकित्सा उपकरणों के नमूने जब्त — अब उठने लगे कार्रवाई की गंभीरता पर सवाल
वर्षों से फल-फूल रहे अवैध दवाखानों पर चलेगा प्रशासन का डंडा या नोटिसों तक सिमट जाएगी मुहिम?
गाडरवारा। नरसिंहपुर कलेक्टर रजनी सिंह एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनीष मिश्रा के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने गाडरवारा नगर एवं आसपास के क्षेत्रों में संचालित अपंजीकृत चिकित्सकों के विरुद्ध जांच अभियान प्रारंभ किया है। सिविल अस्पताल गाडरवारा एवं शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (UPHC) गाडरवारा की संयुक्त टीम ने कई निजी दवाखानों और क्लीनिकों पर पहुंचकर चिकित्सा डिग्री, पंजीयन एवं अन्य वैधानिक दस्तावेजों की जांच की निरीक्षण के दौरान टीम द्वारा क्लीनिकों में उपलब्ध एलोपैथिक दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों एवं जांच के दायरे में आने वाली अन्य सामग्री के नमूने जब्त किए गए हैं। जब्त सामग्री को प्रभारी अधीक्षक सिविल अस्पताल गाडरवारा डॉ. उपेंद्र वस्त्रकार के संरक्षण में रखा गया है। संबंधित संचालकों को नोटिस जारी कर स्पष्ट किया गया है कि वे केवल उसी चिकित्सा पद्धति में कार्य कर सकते हैं, जिसके लिए उनके पास मान्यता प्राप्त डिग्री एवं वैध पंजीयन उपलब्ध है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी कार्यालय नरसिंहपुर से प्राप्त निर्देशों के अनुसार जिन लोगों के पास आवश्यक पंजीयन उपलब्ध नहीं है, उन्हें तत्काल क्लीनिक संचालन बंद कर विभाग को सूचित करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश का पालन नहीं करने पर मध्यप्रदेश आयुर्विज्ञान परिषद अधिनियम की धारा 24 सहित अन्य वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत कार्रवाई किए जाने की चेतावनी दी गई है। कार्रवाई की फोटो, वीडियो एवं प्रतिवेदन रिपोर्ट संबंधित उच्च अधिकारियों को अग्रिम कार्यवाही हेतु प्रेषित की गई है।
*बड़ा सवाल — वर्षों से संचालित हो रहे अपंजीकृत दवाखानों की जानकारी अब तक विभाग के पास क्यों नहीं थी?*
इस कार्रवाई के बाद आम नागरिकों के बीच कई सवाल चर्चा का विषय बन गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि क्षेत्र में लंबे समय से बिना वैध पंजीयन या निर्धारित नियमों के विपरीत क्लीनिक संचालित हो रहे थे, तो स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं थी। यदि विभाग के रिकॉर्ड में सभी वैध चिकित्सकों एवं पंजीयन संबंधी जानकारी उपलब्ध रहती है, तो फिर वर्षों से संचालित ऐसे मामलों की निगरानी कैसे नहीं हो सकी। लोगों के बीच यह भी चर्चा है कि कहीं यह अभियान केवल नोटिस जारी करने और दस्तावेजों की जांच तक सीमित न रह जाए। जनता अब यह जानना चाहती है कि जांच के बाद जिन मामलों में नियमों का उल्लंघन पाया जाएगा, उन पर वास्तविक और प्रभावी कार्रवाई होगी या नहीं।
*शहर से गांव तक पहुंचेगी जांच या गाडरवारा तक ही सीमित रहेगा अभियान?*
गाडरवारा नगर ही नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी लंबे समय से अवैध रूप से चिकित्सा सेवाएं देने वाले लोगों को लेकर शिकायतें और समय-समय पर समाचार पत्रों एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में प्रकाशित खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे में आमजन की निगाहें स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं कि यह अभियान गांव-गांव तक पहुंचकर नियम विरुद्ध संचालित क्लीनिकों पर कठोर कार्रवाई करेगा या फिर कुछ दिनों की औपचारिकता के बाद फाइलों में दबकर रह जाएगा। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की यह कार्रवाई क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह मुहिम स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी या केवल नोटिसों और कागजी प्रक्रिया तक सीमित रह जाएगी।
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
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