नरसिंगपुर एक अधिकारी के कंधों पर कितनी जिम्मेदारियां? कृषि विभाग में अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था पर उठे सवाल मूल पद के साथ कई शाखाओं का चार्ज, क्या इससे किसानों के काम की रफ्तार प्रभावित नहीं?
- bySatendra Mishra
- 26 Aug 2026, 03:43 PM
- 11 Mins
एक अधिकारी के कंधों पर कितनी जिम्मेदारियां? कृषि विभाग में अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था पर उठे सवाल
मूल पद के साथ कई शाखाओं का चार्ज, क्या इससे किसानों के काम की रफ्तार प्रभावित नहीं?
नरसिंहपुर। कृषि विभाग सीधे तौर पर जिले के किसानों की योजनाओं, अनुदान, बीज, उर्वरक, फसल बीमा, कृषि यंत्रीकरण, प्रशिक्षण और विभिन्न कृषि कार्यक्रमों के क्रियान्वयन से जुड़ा महत्वपूर्ण विभाग है। ऐसे में विभागीय शाखाओं और योजनाओं का सुचारु संचालन केवल कार्यालयीन व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि हजारों किसानों को समय पर सरकारी सुविधाएं और योजनाओं का लाभ पहुंचाने से जुड़ा मामला है। इसी बीच एक अधिकारी को उसके मूल पद के दायित्व के साथ कई शाखाओं एवं योजनाओं का अतिरिक्त प्रभार दिए जाने की व्यवस्था को लेकर जनहित में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एक अधिकारी, कई शाखाएं और जिम्मेदारियों का बोझ!
सवाल यह है कि यदि किसी अधिकारी को उसके मूल दायित्व के अतिरिक्त कई महत्वपूर्ण शाखाओं का प्रभार सौंप दिया जाए, तो क्या वह प्रत्येक शाखा के कार्यों को अपेक्षित समय, निगरानी और प्रभावशीलता के साथ संचालित कर पाएगा?
एक अधिकारी को एक साथ कई शाखाओं की फाइलें, हितग्राहियों के आवेदन, योजनाओं की मॉनिटरिंग, लक्ष्य पूर्ति, पत्राचार, रिपोर्टिंग और विभागीय समीक्षा जैसे कार्य देखने पड़ते हैं। ऐसे में कार्यभार का अत्यधिक केंद्रीकरण क्या विभागीय कार्यप्रणाली को प्रभावित नहीं कर सकता? यह सवाल अब जवाब मांग रहा है।
सवाल सिर्फ अधिकारी का नहीं, पूरी व्यवस्था का है
यह मुद्दा किसी अधिकारी विशेष को कटघरे में खड़ा करने का नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों के वितरण की पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़ा है। यदि विभाग में अन्य अधिकारी और कर्मचारी उपलब्ध हैं, तो क्या सभी की क्षमता और विशेषज्ञता का समान रूप से उपयोग किया जा रहा है?
यदि एक ही अधिकारी को लगातार कई शाखाओं और योजनाओं की जिम्मेदारी दी जा रही है, तो विभाग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इसके पीछे प्रशासनिक आवश्यकता, पद की प्रकृति, अनुभव, कार्यक्षमता या कोई अन्य वैधानिक आधार क्या है।
कहीं किसान हित प्रभावित तो नहीं हो रहा?
कृषि विभाग में किसी फाइल या आवेदन के निपटारे में देरी का सीधा असर किसान पर पड़ सकता है। अनुदान, कृषि यंत्र, बीज, फसल बीमा, प्रशिक्षण अथवा अन्य योजनाओं से संबंधित कार्य समय पर नहीं होने पर किसान को योजना का लाभ मिलने में देरी हो सकती है।
इसलिए यह सवाल बेहद महत्वपूर्ण है कि क्या अतिरिक्त प्रभार के कारण किसी शाखा के नियमित कार्य, आवेदनों के निराकरण, योजनाओं की निगरानी या किसानों को मिलने वाले लाभ की प्रक्रिया प्रभावित हुई है?
यदि ऐसा नहीं है तो विभाग के पास इसे स्पष्ट करने के लिए शाखावार कार्य निष्पादन और प्रभार व्यवस्था की जानकारी सार्वजनिक करने में कोई कठिनाई नहीं होनी चाहिए।
प्रभार आदेश सार्वजनिक हों तो तस्वीर साफ होगी
जनहित में यह जानना जरूरी है कि जिला कृषि विभाग में वर्तमान में किस अधिकारी के पास कितनी शाखाओं और योजनाओं का प्रभार है। प्रत्येक अधिकारी का मूल पद क्या है, उसके अतिरिक्त कौन-कौन से दायित्व सौंपे गए हैं और यह प्रभार किस आदेश क्रमांक एवं दिनांक के तहत दिया गया है—इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि अतिरिक्त प्रभार देने के लिए विभागीय स्तर पर कौन-से नियम, निर्देश अथवा प्रशासनिक आधार अपनाए गए हैं।
अन्य कर्मचारियों की कार्यक्षमता का उपयोग क्यों नहीं?
यदि विभाग में पर्याप्त अधिकारी-कर्मचारी कार्यरत हैं और फिर भी कई शाखाओं का दायित्व एक ही अधिकारी को दिया जाता है, तो यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि क्या जिम्मेदारियों का समान वितरण नहीं किया जा सकता था?
क्या विभाग में उपलब्ध अन्य अधिकारियों एवं कर्मचारियों की क्षमता, अनुभव और विशेषज्ञता का उपयोग किया जा रहा है? क्या शाखाओं के कार्यभार की समय-समय पर समीक्षा होती है? क्या अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था स्थायी है या केवल अस्थायी प्रशासनिक आवश्यकता के कारण की गई है?
इन सवालों का स्पष्ट जवाब विभागीय व्यवस्था को लेकर उठ रही चर्चाओं को समाप्त कर सकता है।
उप संचालक कृषि से पारदर्शिता की अपेक्षा
उप संचालक कृषि, नरसिंहपुर से जनहित में अपेक्षा है कि जिला कृषि विभाग की सभी शाखाओं एवं योजनाओं की अद्यतन शाखावार प्रभार सूची सार्वजनिक की जाए। इसमें प्रत्येक अधिकारी का मूल पद, अतिरिक्त प्रभार, संबंधित शाखा/योजना तथा प्रभार आदेश का विवरण शामिल किया जाए।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया जाए कि एक अधिकारी को कितनी शाखाओं का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है और ऐसा प्रभार सौंपने का प्रशासनिक आधार क्या है।
जवाबदेही जरूरी, क्योंकि मामला किसान के हित का है
कृषि विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता केवल विभागीय औपचारिकता नहीं है। यह सीधे किसान के अधिकार और सरकारी योजनाओं के समयबद्ध लाभ से जुड़ी है। व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए जिसमें अधिकारी पर अनावश्यक कार्यभार न हो, शाखाओं का काम प्रभावित न हो और किसान को अपने काम के लिए अनावश्यक इंतजार न करना पड़े।
फिलहाल सवाल यही है—
एक अधिकारी के पास मूल पद के अलावा कितनी शाखाओं का प्रभार है?
अतिरिक्त जिम्मेदारियां देने का आधार क्या है?
और क्या इस व्यवस्था से किसानों के काम की गति प्रभावित नहीं हो रही?
इन सवालों का जवाब अब जिला कृषि विभाग से अपेक्षित है।
क्योंकि किसान को केवल अधिकारी नहीं, समय पर समाधान चाहिए।
जनहित में सवाल — जवाब जरूरी है।
पारदर्शी व्यवस्था, जवाबदेह विभाग और समय पर लाभ—यही किसान हित की असली कसौटी है।
Satendra Mishra
संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।
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