नरसिंहपुर स्वास्थ्य विभाग या भ्रष्टाचार का अड्डा? मरीजों की जिंदगियों से खिलवाड़ और फर्जीवाड़े पर फूटा जनता का भारी आक्रोश!

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नरसिंहपुर स्वास्थ्य विभाग या भ्रष्टाचार का अड्डा? मरीजों की जिंदगियों से खिलवाड़ और फर्जीवाड़े पर फूटा जनता का भारी आक्रोश!

​नरसिंहपुर / भोपाल:

मध्य प्रदेश के नरसिंहपुर जिले का स्वास्थ्य विभाग इन दिनों इलाज और सेवा का केंद्र नहीं, बल्कि खुलेआम भ्रष्टाचार, आपराधिक लापरवाही और घोर अनियमितताओं का अड्डा बन चुका है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि मरीजों की जिंदगी भगवान भरोसे है और शासन-प्रशासन की مجرمانہ (अपराधपूर्ण) चुप्पी ने पूरी स्वास्थ्य व्यवस्था को वेंटिलेटर पर डाल दिया है। जनता और प्रबुद्ध नागरिकों में इसको लेकर भारी उबाल है।

​प्रमुख खुलासे और सनसनीखेज मामले

​डॉ. पंकज थारवानी प्रकरण में लीपापोती: स्वास्थ्य विभाग के चर्चित डॉ. पंकज थारवानी के मामले में निष्पक्ष जांच करने के बजाय, वरिष्ठ स्तर पर गहरी साठगांठ कर दोषियों को बचाने के लिए एक 'झूठी जांच रिपोर्ट' तैयार की गई है। जनता ने इस फर्जी रिपोर्ट को खारिज कर नए सिरे से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

​अस्पतालों में अमानवीयता की सारी हदें पार:

​साइंखेड़ा स्वास्थ्य केंद्र: यहां प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की जगह अस्पताल के सफाईकर्मियों द्वारा मरीजों को इंजेक्शन और ग्लूकोज की बोतल चढ़ाई जा रही है।

​गाडरवारा अस्पताल: अस्पताल के सुरक्षाकर्मियों द्वारा मरीजों का इलाज और उन्हें इंजेक्शन लगाने जैसे खतरनाक काम किए जा रहे हैं। वहीं, अस्पताल में एक नवजात शिशु को चूहों द्वारा कुतरे जाने का बेहद अमानवीय और दहला देने वाला मामला भी सामने आया है। इसके अलावा, एक्स-रे मशीन के निजी और अनाधिकृत उपयोग से कोई रिकवरी न होने और बाउंड्री वॉल तोड़े जाने पर भू-माफियाओं पर एफआईआर न होना प्रशासनिक लाचारी को दिखाता है।

​जिले के अन्य बड़े कलंक:

​करेली अस्पताल: एंबुलेंस समय पर न मिलने के कारण एक मरीज की तड़प-तड़प कर मौत हो गई, जिसे सीधे तौर पर हत्यात्मक लापरवाही माना जा रहा है।

​जिला अस्पताल नरसिंहपुर: सीजर (ऑपरेशन) के नाम पर गरीब मरीजों से खुलेआम अवैध उगाही की जा रही है।

​अन्य मामले: देवरी के सुनील नाथ प्रकरण में 11 महीने बीत जाने के बाद भी जांच ठंडे बस्ते में पड़ी है और डॉ. संदीप पटेल के विवादित मामले में भी ढुलमुल रवैया अपनाया गया है।

​जनता की दो टूक चेतावनी और सख्त मांगें

​आक्रोशित जनता और प्रबुद्ध नागरिकों ने माननीय स्वास्थ्य मंत्री, मध्य प्रदेश शासन को कड़े शब्दों में चेतावनी देते हुए तत्काल निम्नलिखित सख्त कदम उठाने की मांग की है:

​झूठी रिपोर्ट पर एक्शन: डॉ. पंकज थारवानी मामले की फर्जी जांच रिपोर्ट को तत्काल खारिज किया जाए और यह झूठी रिपोर्ट तैयार करने वाले भ्रष्ट अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई हो।

​फर्जीवाड़े पर FIR: गाडरवारा एनटीपीसी क्षेत्र में अवैध पैथोलॉजी और फर्जी फिटनेस सर्टिफिकेट का रैकेट चलाने वाले जालसाजों पर तुरंत एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए।

​निलंबन और दंडात्मक कार्रवाई: उपरोक्त सभी संगीन मामलों में संलिप्त लापरवाह अधिकारियों और कर्मचारियों को तुरंत बर्खास्त या निलंबित कर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए, 

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।