नरसिंगपुर स्वास्थ्य व्यवस्था या लापरवाही का अड्डा? नरसिंहपुर स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप, 10 गंभीर मामलों पर लीपापोती से जनता में आक्रोश

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स्वास्थ्य व्यवस्था या लापरवाही का अड्डा? नरसिंहपुर स्वास्थ्य विभाग में मचा हड़कंप, 10 गंभीर मामलों पर लीपापोती से जनता में आक्रोश

नरसिंहपुर। जिला स्वास्थ्य विभाग इन दिनों गंभीर अनियमितताओं, भ्रष्टाचार और आपराधिक लापरवाही के दलदल में पूरी तरह धंस चुका है। इलाज के नाम पर मरीजों की जान से खिलवाड़ और प्रशासनिक स्तर पर की जा रही लीपापोती ने जिले की चरमराती स्वास्थ्य सेवाओं को पूरी तरह बेनकाब कर दिया है। लगातार सामने आ रहे गंभीर मामलों के बावजूद उच्च अधिकारियों की चुप्पी यह दर्शाती है कि जिले में स्वास्थ्य तंत्र खुद 'वेंटिलेटर' पर है।

​प्रशासनिक संरक्षण और जांच के नाम पर चल रहे ढोंग के बीच ऐसे 10 प्रमुख और सनसनीखेज मामले सामने आए हैं, जिन्होंने विभागीय जवाबदेही की धज्जियां उड़ा दी हैं:

  • डॉ. पंकज थारवानी प्रकरण: वरिष्ठ स्तर पर सांठगांठ कर मामले को रफा-दफा करने के लिए कथित रूप से झूठी जांच रिपोर्ट तैयार की गई, जिससे निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
  • सुनील नाथ का मामला: देवरी निवासी पीड़ित 11 महीने से न्याय के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन उसकी फाइल ठंडे बस्ते में दबा दी गई है।
  • साईंखेड़ा केंद्र में खौफनाक लापरवाही: प्रशिक्षित स्टाफ की अनुपस्थिति में सफाईकर्मी मरीजों को ड्रिप चढ़ाते और इंजेक्शन लगाते पाए गए।
  • गाडरवारा में सुरक्षाकर्मी बना 'डॉक्टर': सुरक्षा गार्ड द्वारा मरीजों को इंजेक्शन लगाने के फोटो-वीडियो सामने आने के बाद भी आला अधिकारियों ने आंखें मूंद रखी हैं।
  • एक्स-रे मशीन का निजी उपयोग: शासकीय संपत्ति और सुविधाओं का निजी लाभ के लिए अनधिकृत इस्तेमाल हुआ, पर अब तक न तो कोई रिकवरी हुई और न ही दंडात्मक कार्रवाई।
  • अस्पताल की बाउंड्री वॉल तोड़ना: सुरक्षा से खिलवाड़ करते हुए परिसर की दीवार ढहा दी गई, लेकिन भू-माफिया या असामाजिक तत्वों के खिलाफ एफआईआर तक दर्ज नहीं की गई।
  • नवजात को चूहों ने कुतरा: गाडरवारा अस्पताल में संवेदनहीनता की सारी हदें पार हो गईं जब एक नवजात शिशु को चूहों ने काट लिया। इस भयावह घटना के बाद भी दोषियों को बचाने का खेल जारी है।
  • सीजर ऑपरेशन के नाम पर उगाही: जिला अस्पताल नरसिंहपुर में गर्भवती महिलाओं से सिजेरियन डिलीवरी के एवज में अवैध वसूली के संगीन आरोप हैं, जिनकी जांच सिर्फ कागजों तक सीमित है।
  • डॉ. संदीप पटेल विवाद: विवादित प्रकरण में ढुलमुल रवैया अपनाकर मामले को दबाने का प्रयास किया जा रहा है।
  • एम्बुलेंस न मिलने से मौत: करेली अस्पताल में समय पर एम्बुलेंस न मिलने के कारण एक मरीज ने तड़प-तड़पकर दम तोड़ दिया। इस आपराधिक लापरवाही पर भी किसी की जवाबदेही तय नहीं हुई।
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Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।