गाडरवारा अस्पताल में सीजर व्यवस्था पर सवाल: आखिर क्यों बढ़ रहे नरसिंहपुर रेफर के मामले?

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गाडरवारा अस्पताल में सीजर व्यवस्था पर सवाल: आखिर क्यों बढ़ रहे नरसिंहपुर रेफर के मामले?

चीचली, साईंखेड़ा और सालीचौका से मरीज गाडरवारा आते हैं, लेकिन यहां से भी नरसिंहपुर रेफर होने लगे तो गरीब मरीज आखिर जाएं कहां?

गाडरवारा। शासकीय सिविल अस्पताल गाडरवारा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों सहित कई तहसील एवं विकासखंडों के गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। चीचली, साईंखेड़ा और सालीचौका जैसे स्वास्थ्य केंद्रों पर सामान्य प्रसव की सुविधा उपलब्ध होने के बावजूद जटिल प्रसव अथवा सीजर की आवश्यकता वाले मामलों में मरीजों को गाडरवारा रेफर किया जाता है। ऐसे में गाडरवारा अस्पताल की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।

लेकिन पिछले करीब 15–20 दिनों से महिला प्रसव संबंधी मामलों में सीजर व्यवस्था और मरीजों के रेफर किए जाने को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि जिन मरीजों को गाडरवारा अस्पताल में उपचार और सीजर की सुविधा मिल सकती थी, उनमें से कई को नरसिंहपुर रेफर किया जा रहा है।

कभी एक दिन में 5 से 10 तक सीजर, अब रेफर की बढ़ती संख्या क्यों?

स्थानीय लोगों के अनुसार पूर्व में गाडरवारा अस्पताल में प्रतिदिन लगभग 5 से 10 तक सीजर डिलीवरी होने के मामले सामने आते रहे हैं। यदि वर्तमान में इसी प्रकार के मरीजों को बड़ी संख्या में नरसिंहपुर रेफर किया जा रहा है, तो सवाल स्वाभाविक है कि आखिर व्यवस्था में ऐसा क्या बदलाव आया है?

क्या अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता प्रभावित हुई है?
क्या ऑपरेशन थिएटर की व्यवस्था में कोई तकनीकी समस्या है?
क्या आवश्यक दवाइयों या उपकरणों की कमी है?
क्या एनेस्थीसिया अथवा अन्य स्टाफ की उपलब्धता प्रभावित हुई है?
या फिर रेफरल के पीछे कोई अन्य प्रशासनिक अथवा चिकित्सकीय कारण है?

इन सवालों का स्पष्ट जवाब अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग से मिलना चाहिए।

निजी अस्पतालों को लेकर भी उठ रहे सवाल

यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इस खबर का उद्देश्य किसी चिकित्सक, अधिकारी या निजी अस्पताल पर प्रत्यक्ष आरोप लगाना नहीं है। लेकिन जब सरकारी अस्पताल से बड़ी संख्या में मरीज बाहर रेफर होते हैं और निजी स्वास्थ्य संस्थानों में उन्हीं मरीजों को उपचार मिलता है, तो आम नागरिकों के मन में सवाल उठना स्वाभाविक है।

यदि सरकारी अस्पताल में सीजर की पर्याप्त व्यवस्था उपलब्ध है, तो मरीजों को अनावश्यक रूप से बाहर रेफर न किया जाए। वहीं यदि किसी मरीज को चिकित्सकीय कारणों से रेफर करना आवश्यक है, तो उसके पीछे का स्पष्ट मेडिकल कारण रिकॉर्ड में दर्ज होना चाहिए।

मरीज के लिए डॉक्टर भगवान से कम नहीं

एक गरीब परिवार जब प्रसव के लिए सरकारी अस्पताल पहुंचता है, तो उसके पास सबसे बड़ा भरोसा डॉक्टर और अस्पताल की व्यवस्था पर ही होता है। परिवार के लिए प्रसव केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि मां और नवजात दोनों के जीवन से जुड़ा संवेदनशील विषय होता है।

ऐसे में यदि परिवार को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भेजा जाता है, तो आर्थिक बोझ के साथ मानसिक तनाव भी बढ़ता है। विशेषकर रात के समय या आपात स्थिति में रेफर किया गया मरीज और उसका परिवार कई कठिनाइयों से गुजरता है।

प्रभारी और अस्पताल प्रबंधन से सीधा सवाल

गाडरवारा अस्पताल के प्रभारी एवं जिम्मेदार अधिकारियों से जनहित में केवल इतना जानना आवश्यक है—

पिछले 15–20 दिनों में कितने प्रसव हुए?
कितने सीजर हुए?
कितने मरीजों को नरसिंहपुर रेफर किया गया?
रेफर किए गए प्रत्येक मामले में मेडिकल कारण क्या था?
सीजर की सुविधा के लिए कितने विशेषज्ञ चिकित्सक, एनेस्थेटिस्ट और स्टाफ उपलब्ध हैं?
ऑपरेशन थिएटर और आवश्यक उपकरण पूरी तरह कार्यशील हैं या नहीं?

इन आंकड़ों को सार्वजनिक करने से स्थिति स्वतः स्पष्ट हो सकती है।

व्यवस्था पर निगरानी जरूरी, विवाद पर नहीं

सरकारी अस्पताल किसी व्यक्ति, अधिकारी या राजनीतिक प्रभाव का केंद्र नहीं, बल्कि जनता के स्वास्थ्य का भरोसेमंद संस्थान है। यहां आने वाला हर मरीज समान अधिकार और सम्मान के साथ उपचार पाने का हकदार है।

इसलिए अस्पताल प्रबंधन से आग्रह है कि व्यवस्थाओं को किसी भी प्रकार के व्यक्तिगत, राजनीतिक अथवा अन्य प्रभाव से दूर रखते हुए पूरी ईमानदारी, पारदर्शिता और संवेदनशीलता के साथ संचालित किया जाए।

यदि कहीं कमी है तो उसे दूर किया जाए और यदि व्यवस्था पूरी तरह ठीक है तो आंकड़ों और रिकॉर्ड के माध्यम से जनता के सामने स्थिति स्पष्ट की जाए।

क्योंकि सवाल किसी व्यक्ति पर नहीं, सवाल उस व्यवस्था का है जिस पर हजारों गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार अपनी जिंदगी और अपने परिवार की जिंदगी का भरोसा रखते हैं।

गाडरवारा अस्पताल में सीजर व्यवस्था मजबूत हो, अनावश्यक रेफरल पर रोक लगे और मरीजों को बेहतर उपचार यहीं मिले—यही इस खबर का उद्देश्य और जनहित की वास्तविक मांग है।

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Author

Satendra Mishra

संवाददाता एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिन्हें राजनीति, प्रशासन और सामाजिक मुद्दों की रिपोर्टिंग का व्यापक अनुभव है। वे जमीनी स्तर की खबरों को निष्पक्ष और तथ्यात्मक रूप में पाठकों तक पहुँचाने पर विश्वास रखते हैं। उनका मुख्य उद्देश्य विश्वसनीय जानकारी के साथ जनहित से जुड़े विषयों को सरल भाषा में प्रस्तुत करना है।